


ग्राम सेतु ब्यूरो.
हनुमानगढ़ जिले में सर्दी का असर सिर्फ अलमारियों से निकलते ऊनी कपड़ों तक सीमित नहीं है। ठंड बढ़ते ही थाली का रंग बदला है और बाजारों की धड़कन तेज हुई है। शहर से लेकर कस्बों और गांवों तक गरम तासीर वाले पकवानों, मिठाइयों, अचार और आयुर्वेदिक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ी है। यही वजह है कि हनुमानगढ़ में सर्दियों के आते ही ‘भूख का कारोबार’ पूरे शबाब पर नजर आने लगा है। व्यापारी बताते हैं कि नवंबर से फरवरी तक जिले में सर्दी से जुड़े खाद्य पदार्थों का कारोबार करोड़ों में पहुंच जाता है। हनुमानगढ़ टाउन, जंक्शन, संगरिया, टिब्बी, पीलीबंगा, रावतसर और नोहर के बाजारों में गजक, तिलकुट, रेवड़ी, मूंगफली की चिक्की और खोपरे की मिठाइयों की दुकानें सज गई हैं। परंपरागत ठेलों से लेकर पक्की दुकानों तक भीड़ साफ दिखती है। तिल, गुड़ और मूंगफली से बनी ये मिठाइयां न सिर्फ स्वाद में लाजवाब हैं, बल्कि शरीर को गर्म रखने में भी मददगार मानी जाती हैं। कारोबारियों के मुताबिक, गजक-तिलकुट और गरम तासीर की मिठाइयों का सीजनल कारोबार ही जिले में बड़े स्तर पर होता है।
सर्दियों के साथ ही घरों में हल्दी की सब्जी, बाजरे की रोटी, घी में बने व्यंजन, लहसुन की चटनी और तरह-तरह के घर के बने अचार बनने लगे हैं। ग्रामीण इलाकों में महिलाएं परंपरागत तरीके से सरसों के तेल में अचार डाल रही हैं। खेतों से ताजी हल्दी, हरा लहसुन और सरसों की साग सीधे रसोई तक पहुंच रही है। इससे स्थानीय किसानों और छोटे कारोबारियों को भी सीधा फायदा मिल रहा है।
आयुर्वेदिक उत्पादों की बढ़ी मांग
जिले की आयुर्वेदिक दुकानों और मेडिकल स्टोर्स पर च्यवनप्राश, आंवला मुरब्बा, अश्वगंधा पाक और हर्बल काढ़ों की बिक्री कई गुना बढ़ गई है। सर्दी-खांसी से बचाव और इम्युनिटी बढ़ाने के लिए लोग इन उत्पादों की ओर लौट रहे हैं। दुकानदार बताते हैं कि ठंड शुरू होते ही च्यवनप्राश की मांग सबसे पहले बढ़ती है, इसके बाद काढ़ा, गिलोय और आंवला उत्पादों की। खानपान विशेषज्ञों के अनुसार, सर्दियों में खाए जाने वाले पारंपरिक खाद्य पदार्थ पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। तिल और गुड़ आयरन व कैल्शियम का अच्छा स्रोत हैं, मूंगफली और ड्राई फ्रूट्स प्रोटीन व हेल्दी फैट देते हैं, जबकि हल्दी की सब्जी एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से इम्युनिटी मजबूत करती है। च्यवनप्राश और आंवला विटामिन-सी से भरपूर होते हैं, जो सर्दी-खांसी से बचाव में मददगार हैं। सरसों के तेल और मसालों से बने अचार पाचन शक्ति बढ़ाते हैं।
सर्दियों के सीजन में गजक बनाने वाले कारीगर, मूंगफली भूनने वाले, अचार बेचने वाले और आयुर्वेदिक उत्पादों के विक्रेताओं की संख्या बढ़ जाती है। कई परिवारों के लिए यह समय अतिरिक्त आय का मौका लेकर आता है। ग्रामीण इलाकों से लोग शहरों में अपने पारंपरिक उत्पाद बेचने पहुंच रहे हैं, जिससे स्थानीय बाजारों में रौनक बनी हुई है। पूर्व जिला आयुर्वेद अधिकारी डॉ. शिव कुमार शर्मा बताते हैं कि सीमित मात्रा में गरम तासीर वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सर्दियों में शरीर को संतुलित ऊर्जा और गर्माहट देता है। जरूरत से ज्यादा मिठाई या तला-भुना नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए संतुलन जरूरी है।
कुल मिलाकर हनुमानगढ़ जिले में सर्दी सिर्फ मौसम का बदलाव नहीं, बल्कि स्वाद, सेहत और कारोबार का नया मौसम लेकर आई है। परंपरागत पकवानों की वापसी ने न सिर्फ लोगों की थाली को समृद्ध किया है, बल्कि गांव-कस्बों की अर्थव्यवस्था को भी गर्माहट दी है। सर्दी जितनी बढ़ेगी, उतनी ही बाजार की रौनक और देसी स्वादों की मांग बढ़ती नजर आएगी।




