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आयुक्तालय खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण, राजस्थान की औषधि नियंत्रण विंग के उच्चाधिकारियों की बैठक में लिए गए निर्णयों के विरोध में हनुमानगढ़ जिले के दवा विक्रेताओं ने एकजुट होकर जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व जिले के पूर्व अध्यक्ष प्रेम सेतिया ने किया, जिन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह निर्णय न केवल अव्यावहारिक है, बल्कि आमजन के स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ भी है। ज्ञापन में बैठक की कार्यवाही के बिंदु संख्या 9 के तहत नए दवा लाइसेंस, लाइसेंस नवीनीकरण और पुराने लाइसेंसों की समीक्षा के दौरान व्यवसायिक उपयोग कन्वर्जन को अनिवार्य किए जाने पर गहरी आपत्ति दर्ज कराई गई। कैमिस्ट समुदाय का कहना है कि 29 दिसंबर 2025 को जारी बैठक कार्यवाही विवरण के अनुसार यह शर्त लागू की जा रही है, जो प्रदेशभर में संचालित दवा दुकानों के अस्तित्व पर सीधा खतरा बनकर उभरी है।
पूर्व अध्यक्ष प्रेम सेतिया ने प्रशासन को चेताते हुए कहा कि राजस्थान के अधिकांश कस्बों और शहरों में दवा दुकानें वर्षों से कृषि या आवासीय भूमि पर संचालित हैं, जिनका मुंह सड़क या मुख्य मार्ग की ओर खुलता है। इन स्थानों पर दशकों से दुकानें, क्लीनिक, जनरल स्टोर और अन्य व्यवसायिक गतिविधियां बिना किसी बाधा के चल रही हैं।
पूर्व जिलाध्यक्ष प्रेम सेतिया ने ‘ग्राम सेतु डॉट कॉम’ से कहा, ‘अगर दवा लाइसेंस के लिए व्यवसायिक कन्वर्जन को अनिवार्य किया गया, तो बड़ी संख्या में दवा दुकानें बंद हो जाएंगी। यह फैसला दुकान बंद करने का नहीं, बल्कि दवा की उपलब्धता बंद करने का फैसला साबित होगा।’
कैमिस्टों ने ज्ञापन में विशेष रूप से उल्लेख किया कि छोटे कस्बों, ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में कन्वर्जन प्रक्रिया न केवल जटिल है, बल्कि अत्यधिक खर्चीली और समयसाध्य भी है। कई जगहों पर तो नगर निकाय स्तर पर स्पष्ट नियम ही नहीं हैं, जिससे व्यापारी वर्षों तक फाइलों के चक्कर काटने को मजबूर हो जाएंगे। प्रेम सेतिया ने इसे ‘फाइलों में लिया गया फैसला, जो जमीन पर दवा की कमी पैदा करेगा’ बताया।
कैमिस्ट समुदाय ने एक स्वर में कहा कि दवा कोई सामान्य उपभोक्ता वस्तु नहीं, बल्कि जीवन रक्षक आवश्यक वस्तु है। ऐसे में दवा व्यवसाय पर अतिरिक्त शर्तें थोपना जनहित के विपरीत है। यदि यह निर्णय लागू होता है, तो दूर-दराज के गांवों में रहने वाले मरीजों को साधारण बुखार, शुगर, बीपी और अन्य जरूरी दवाइयों के लिए भी कई किलोमीटर भटकना पड़ेगा।
ज्ञापन में जिला कलेक्टर से आग्रह किया गया कि उक्त निर्णय पर पुनर्विचार कराते हुए दवा व्यवसाय हेतु व्यवसायिक उपयोग कन्वर्जन की बाध्यता समाप्त कराई जाए। कैमिस्ट समुदाय ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि निर्णय वापस नहीं लिया गया, तो दवा आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होगी, जिसका सीधा असर आम जनता के स्वास्थ्य पर पड़ेगा। इस अवसर पर पूर्व अध्यक्ष प्रेम सेतिया के साथ इन्द्र सिंह राठौड़, जितेश गोयल, सतीश कटारिया, नरेन्द्र मिड्ढा, मांगीलाल, बलराज सिंह, रायसाहब आहुजा, राजेश कुमार गुप्ता, अमित मिगलानी, अंकित अरोड़ा, मोनू नागपाल, महबूब खान, विनोद कुक्कड़, साहिल गर्ग, विपन तनेजा, जयकिशन चावला, वीरेन्द्र सिड़ाना सहित बड़ी संख्या में दवा विक्रेता उपस्थित रहे।




