




ग्राम सेतु ब्यूरो.
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों को लेकर सवर्ण समाज में गुस्सा खुलकर सामने आने लगा है। इसी कड़ी में गुरुवार 6 फरवरी को सवर्ण समाज के एक प्रतिनिधिमंडल ने हनुमानगढ़ जिले के रावतसर उपखंड मुख्यालय पहुंचकर उपखंड अधिकारी (एसडीएम) से मुलाकात की और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन सामाजिक कार्यकर्ता सचिन कौशिक के नेतृत्व में दिया गया, जिसमें यूजीसी के नए नियमों को ‘काला कानून’ करार देते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की गई।
प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन के माध्यम से आरोप लगाया कि यूजीसी के नए नियम देश की शिक्षा व्यवस्था की जड़ों को कमजोर करने वाले हैं। इन नियमों से न केवल विद्यार्थियों और शोधार्थियों का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा, बल्कि सामान्य वर्ग सहित पूरे समाज के युवाओं के लिए अवसरों के दरवाजे संकुचित हो जाएंगे। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह के एकतरफा और जल्दबाजी में लिए गए फैसले समाज में असंतोष और विभाजन को बढ़ावा देंगे।

सामाजिक कार्यकर्ता सचिन कौशिक ने इस मौके पर कहा कि यूजीसी के नए नियम शिक्षा में समान अवसर के अधिकार के मूल सिद्धांत के खिलाफ हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कानून समाज को आपस में बांटने का प्रयास है और इससे योग्य विद्यार्थियों के साथ अन्याय होगा। कौशिक ने कहा कि नए नियमों में मनमानी और इकतरफा कार्रवाई की प्रबल आशंका है, जबकि नियमों का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया है। ऐसे में यह कानून सवर्ण समाज के युवाओं के भविष्य को अंधकार में धकेलने की साजिश जैसा प्रतीत होता है।
सचिन कौशिक ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि यूजीसी के इस काले कानून को शीघ्र वापस नहीं लिया गया तो सवर्ण समाज अन्य सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर एक बड़ा जनआंदोलन शुरू करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन शांतिपूर्ण होगा, लेकिन व्यापक स्तर पर होगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। कौशिक ने यह भी कहा कि शिक्षा के मुद्दे पर समाज चुप बैठने वाला नहीं है और जरूरत पड़ी तो सड़कों से लेकर संसद तक आवाज उठाई जाएगी।
ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रतिनिधिमंडल में राजस्थान सामाजिक मंच से जुड़े कई प्रमुख लोग भी मौजूद रहे। इनमें डॉ. प्रेम सिंह शेखावत, प्रवीण सिंह, भूपेंद्र सिंह, सुरेश कुमार, राहुल कुमार, हंसराज शर्मा, एडवोकेट राजेंद्र सिंह, एडवोकेट बलविंदर सिंह और फतेह सिंह सहित अन्य गणमान्य लोग शामिल थे। सभी ने एक स्वर में यूजीसी के नए नियमों का विरोध करते हुए उन्हें वापस लेने की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कहा कि शिक्षा किसी एक वर्ग या समुदाय का विषय नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज और देश के भविष्य से जुड़ा सवाल है। ऐसे में बिना व्यापक विमर्श और सहमति के बनाए गए नियम न केवल अव्यवहारिक हैं, बल्कि सामाजिक संतुलन को भी बिगाड़ सकते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार समय रहते इस मुद्दे की गंभीरता को समझेगी और यूजीसी के नए नियमों पर पुनर्विचार करेगी।
रावतसर उपखंड अधिकारी ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि ज्ञापन को संबंधित उच्च अधिकारियों और राष्ट्रपति तक अग्रेषित किया जाएगा। वहीं, ज्ञापन सौंपने के बाद सवर्ण समाज में आंदोलन को लेकर हलचल तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और व्यापक विरोध की संभावना जताई जा रही है।




