



ग्राम सेतु ब्यूरो.
हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी क्षेत्र में एथनॉल प्लांट को लेकर चल रहा विवाद अब और तीखा हो गया है। महापंचायत के बाद भड़की स्थिति को देखते हुए सरकार ने सख्ती का संकेत देते हुए सांसद, विधायक सहित 107 से अधिक लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कर लिए हैं। इससे साफ है कि सरकार अब कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर पीछे हटने के मूड में नहीं है। वहीं दूसरी ओर, किसान संघर्ष समिति और ग्रामीणों का आक्रोश भी कम होता दिखाई नहीं दे रहा। इसी के चलते दोनों तरफ से स्थिति को संभालने और समाधान तलाशने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं।
सरकारी स्तर पर हलचल तब बढ़ी जब मुख्यमंत्री कार्यालय ने मामले पर फोकस लिया। इसके बाद सीएमआर से विधायक गुरवीर सिंह बराड़, वरिष्ठ नेता दशरथ सिंह शेखावत और विजेंद्र पूनिया हनुमानगढ़ पहुंचे। ये नेता किसान संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों के साथ लगातार संपर्क में हैं। बातचीत के दौर ने थोड़ा ठहराव जरूर दिया है, लेकिन समाधान अभी दूर दिखाई दे रहा है। यह संकेत साफ है कि सरकार समझौते की राह तलाशने में रुचि रखती है, लेकिन व्यवस्था बिगाड़ने वाले किसी भी कदम को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। इस बीच, जिला प्रभारी मंत्री सुमित गोदारा भी 13 दिसंबर को हनुमानगढ़ पहुंच रहे हैं। वे सरकार के दो साल पूरे होने पर प्रस्तावित कार्यक्रमों में भाग लेंगे।
इधर, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रमोद डेलू ने ‘ग्राम सेतु’ को बताया कि सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर गंभीरता से काम हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा किसानों के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और किसी भी परिस्थिति में ऐसा कदम नहीं उठाया जाएगा जिससे किसानों को नुकसान पहुंचे। डेलू के बयान से यह स्पष्ट है कि सत्तारूढ़ दल संभावित राजनीतिक नुकसान से बचना चाह रहा है और स्थिति को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की कवायद में जुटा हुआ है। प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर कोशिशें जारी हैं, मगर तनाव के आधार में मौजूद अविश्वास इतनी आसानी से कम होता नहीं दिख रहा।
दूसरी तरफ, किसान संघर्ष समिति ने सरकार पर उपेक्षा और कठोर रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। किसान नेता जगजीत सिंह जग्गी ने ‘ग्राम सेतु’ से कहा कि महापंचायत के बाद जिस तरह मुकदमे दर्ज किए गए और जिस तरीके से सरकार ने पुलिस के सहारे हालात को नियंत्रित करने का प्रयास किया, उससे जनता में गहरी नाराज़गी है। इसी नाराज़गी को संगठित करने के लिए समिति अब गांव-गांव जाकर समर्थन जुटाने की तैयारी कर रही है।
जग्गी के अनुसार, 13 दिसंबर को ग्रामीण इलाकों में नुक्कड़ सभाएं आयोजित की जाएंगी, जिनमें लोगों को वर्तमान हालात और आंदोलन की दिशा के बारे में जानकारी दी जाएगी। इन सभाओं के साथ ही मुख्यमंत्री का पुतला दहन भी किया जाएगा। आंदोलन को बड़े स्तर पर ले जाने के लिए 17 दिसंबर को जिला मुख्यालय पर कलक्टर कार्यालय के सामने महापंचायत रखी गई है। इसमें किसान नेता राकेश टिकैत सहित कई राष्ट्रीय किसान नेताओं के शामिल होने की संभावना है। उस महापंचायत के बाद ही संघर्ष समिति अगली रणनीति घोषित करेगी। किसानों की इस तैयारी से साफ है कि विवाद को अब बड़े आंदोलन में बदलने की पृष्ठभूमि तैयार हो चुकी है।
इन सबके बीच, टिब्बी और आसपास के क्षेत्रों में फिलहाल शांति बनी हुई है। पुलिस ने एहतियातन बड़ी संख्या में बल तैनात किया हुआ है, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके। सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए एडीजी वी.के. सिंह स्वयं क्षेत्र का दौरा कर चुके हैं। उन्होंने मौके पर हालात की समीक्षा की और बाद में प्रेस को अपना पक्ष भी सामने रखा। उनका संदेश बिल्कुल साफ था, कानून-व्यवस्था को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा और किसी भी उकसावे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
माना जा रहा है कि पुलिस की यह सक्रियता और सरकार का सख्त रुख एक ओर प्रशासनिक नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश के संकेत देते हैं, वहीं दूसरी ओर किसानों का बढ़ता आक्रोश और भविष्य की प्रस्तावित रणनीति यह दर्शाती है कि मामला अभी लंबा खिंच सकता है। टिब्बी का एथनॉल प्लांट विवाद अब क्षेत्रीय राजनीति, पर्यावरणीय चिंताओं, किसान हितों और सरकार की निर्णय प्रक्रिया का जटिल संगम बन चुका है। आने वाले दिनों में वार्ता के नतीजे और महापंचायत की दिशा यह तय करेंगे कि समाधान की ओर कदम बढ़ेंगे या संघर्ष और तेज होगा।




