



ग्राम सेतु ब्यूरो.
हनुमानगढ़ जिले में टिब्बी के एथनॉल प्लांट को लेकर उपजा विवाद आखिरकार 12 दिसंबर की रात थोड़ी नरमी की ओर बढ़ता दिखा, जब प्रशासन और किसान प्रतिनिधियों के बीच तीन घंटे चली वार्ता से पहली बार सकारात्मक संकेत मिले। प्रशासन ने पर्यावरणीय मानकों की दोबारा समीक्षा होने तक निर्माण कार्य रोकने का भरोसा दिया, जिसे किसानों ने संघर्ष के बीच एक महत्वपूर्ण कदम माना। लंबे समय से क्षेत्रीय लोगों के बीच उपजा गुस्सा अभी पूरी तरह ठंडा नहीं हुआ, लेकिन संवाद का दरवाज़ा जरूर खुला है। धरना जारी है, मांगें जस की तस हैं, और 17 दिसंबर की महापंचायत इस मुद्दे को और निर्णायक मोड़ दे सकती है। किसान प्रतिनिधियों के मुताबिक, प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि प्लांट से जुड़े सभी निर्धारित पर्यावरणीय और सुरक्षा मानकों की दोबारा समीक्षा (रिव्यू) होने तक निर्माण कार्य बंद रखा जाएगा। इस महत्वपूर्ण आश्वासन के बाद किसानों की ओर से भी बातचीत आगे बढ़ाने में रुचि दिखाई गई।
वार्ता स्थल से बाहर निकलते हुए कांग्रेस नेत्री शबनम गोदारा ने ‘ग्राम सेतु’ को बताया कि बातचीत उम्मीद के मुताबिक रही और पहली बार प्रशासन ने किसानों की मांगों को गंभीरता से सुना। उनका कहना था कि किसान पिछले पखवाड़े से एक ही बात कह रहे थे, जब तक प्रदूषण संबंधी आशंकाओं का समाधान नहीं होता, प्लांट निर्माण रोका जाए। लेकिन प्रशासन ने पहले इस ओर ध्यान नहीं दिया और इसके उलट, कई किसान प्रतिनिधियों की देर रात गिरफ्तारी ने माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया। यही कारण था कि ग्रामीणों में शासन के प्रति गहरा रोष फैल गया था।
गोदारा ने बताया कि आज की वार्ता में कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ, लेकिन रवैया पहले से काफी अलग था। उनके अनुसार, प्रशासन का रुख लगातार ढुलमुल रहा है, लेकिन सरकार की ओर से विधायक गुरवीर सिंह बराड़ के वार्ता में शामिल होने के बाद स्थिति बदली। बराड़ ने किसान प्रतिनिधियों की बात धैर्य से सुनी, जिससे संघर्ष समिति ने भी वार्ता में शामिल होने का निर्णय लिया। किसानों की ओर से प्रशासन को मांगपत्र भी सौंपा गया है। इसमें स्पष्ट लिखा गया है कि किसी भी परिस्थिति में एथनॉल प्लांट का निर्माण स्वीकार नहीं किया जाएगा। मांगपत्र में कहा गया कि प्लांट से इलाके में जल और वायु प्रदूषण फैलने की भारी आशंका है, जिससे खेत-खलिहान, रहने का माहौल और पूरा क्षेत्र बर्बाद हो सकता है। किसान प्रतिनिधियों ने यह भी बताया कि प्रशासन ने मांगपत्र को गंभीरता से लिया है और इसे सरकार तक भेजकर उचित फैसला करने की बात कही है।

भाजपा जिलाध्यक्ष प्रमोद डेलू ने ‘ग्राम सेतु’ को बताया कि आपसी सौहार्द्र के माहौल में अच्छी बातचीत हुई। किसान प्रतिनिधियों ने अपनी चिंताएं रखीं, हम भी उन्हें सरकार तक पहुंचा रहे हैं। सरकार वैधानिक परीक्षण के बाद उचित निर्णय लेगी। उन्होंने बातचीत को सकारात्मक बताया और जोर देकर कहा कि भाजपा हमेशा किसानों के साथ थी, है और आगे भी रहेगी।
वार्ता में पुलिस और प्रशासन के शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें एडीजी वी.के. सिंह, आईजी हेमंत शर्मा, जिला कलक्टर डॉ. खुशाल यादव, पुलिस अधीक्षक हरि शंकर सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शामिल थे। सत्तापक्ष से विधायक गुरवीर सिंह बराड़, भाजपा प्रदेश प्रवक्ता दशरथ सिंह शेखावत, विजेंद्र पूनिया, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रमोद डेलू, पूर्व जिलाध्यक्ष बलवीर बिश्नोई, देवेंद्र पारीक, पूर्व विधायक गुरदीप शाहपीनी और धर्मेंद्र मोची शामिल थे तो किसानों की ओर से संघर्ष समिति के लगभग सभी प्रमुख नेता मौजूद थे, जिनमें शबनम गोदारा, रवि जोशन, बलराज सिंह, जगजीत सिंह ‘जग्गी’, सुखजीत सिंह चटठा, प्यारा सिंह, नितिन ढाका, इंद्रजीत पन्नीवाली, बलतेज सिंह, रविंद्र रणवा, मदन दुर्गेसर, बलदेव सिंह, हंसराज और सुरजाराम आदि प्रमुख थे।
किसान नेता जगजीत सिंह ‘जग्गी’ ने ‘ग्राम सेतु’ को बताया कि भले ही वार्ता सकारात्मक रही हो, लेकिन आंदोलन में किसी तरह की ढील नहीं दी जाएगी। धरना पहले की तरह शांतिपूर्वक गुरुघर के पास जारी रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने जिस तरह बल प्रयोग किया, वह बर्बरता किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार्य नहीं। इसी के विरोध में किसान मुख्यमंत्री का पुतला दहन करेंगे।
किसान नेता जगजीत सिंह जग्गी ने बताया कि 17 दिसंबर को कलक्टर कार्यालय के सामने विशाल महापंचायत बुलाई गई है, जिसमें किसानों के समर्थन में देशभर से नेता शामिल होंगे। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत सहित कई वरिष्ठ किसान नेता इस महापंचायत में शिरकत करेंगे। किसानों का कहना है कि जब तक सरकार की ओर से स्पष्ट, लिखित और स्थायी निर्णय नहीं आता, आंदोलन जारी रहेगा।




