



नीपेन शर्मा.
धूम्रपान अब सिर्फ व्यक्तिगत आदत नहीं, बल्कि एक सामाजिक और प्रशासनिक चुनौती बन चुका है। राष्ट्रीय धूम्रपान निषेध दिवस हमें यह याद दिलाता है कि तंबाकू का धुआँ केवल फेफड़ों में नहीं, बल्कि पूरे समाज की नसों में ज़हर घोलता है। यह आलेख धूम्रपान के दुष्प्रभावों, इससे मुक्ति के लाभ और खासकर सरकारी तंत्र में इसकी सख़्त रोकथाम की ज़रूरत पर सीधी, साफ़ और बेबाक रोशनी डालता है, क्योंकि बदलाव की शुरुआत उपदेश से नहीं, उदाहरण से होती है।
राष्ट्रीय धूम्रपान निषेध दिवस पहली बार 1984 में मनाया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य धूम्रपान से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को उजागर करना और धूम्रपान करने वालों को इसे छोड़ने में सहायता करना था। हर साल मार्च महीने के दूसरे बुधवार को धूम्रपान निषेध दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य लोगों को धूम्रपान के घातक दुष्प्रभावों से जागरूक करना और उन्हें इस आदत को छोड़ने के लिए प्रेरित करना है। धूम्रपान केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सेहत पर बुरा असर डालता है। तंबाकू का सेवन कैंसर, हृदय रोग और श्वसन संबंधी समस्याओं जैसी रोकथाम योग्य बीमारियों का एक प्रमुख कारण बना हुआ है। यह दिन लोगों को धूम्रपान और अन्य तंबाकू उत्पादों से जुड़े जोखिमों को पहचानने के लिए प्रोत्साहित करता है। यह समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए तम्बाकू छोड़ने के महत्व पर भी जोर देता है।
धूम्रपान छोड़ने के स्वास्थ्य लाभ
समय से पहले मृत्यु का जोखिम कम करता है और जीवन प्रत्याशा में 10 वर्ष तक की वृद्धि कर सकता है। हृदय रोग, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी), कैंसर और प्रजनन स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं सहित कई प्रतिकूल स्वास्थ्य प्रभावों का जोखिम भी कम करता है।
धूम्रपान से कैसे बचें?
अपने किसी ऐसे मित्र या परिवार के सदस्य से, जो धूम्रपान करता हो, कहें कि वह आपके साथ धूम्रपान छोड़ दे, या कम से कम आपके आसपास धूम्रपान न करे। अपने दोस्तों और परिवार से कहें कि वे आपको सिगरेट न दें, चाहे आप कुछ भी कहें या करें। अपने दोस्तों और परिवार को बता दें कि छोड़ने के दौरान आपका मूड खराब हो सकता है।
क्या करे
सर्वप्रथम आज हमें खुद तंबाकू छोड़ने की शपथ लेनी चाहिए और मेरा राजस्थान सरकार से अनुरोध है कि इसकी रोकथाम के लिए प्रथम चरण में समस्त सरकारी संस्थान के अधिकारी कर्मचारी को इसकी श्रेणी में लाना चाहिए। नौकरियों में इसके लिए शपथ पत्र भी दिया जा रहा है परंतु उसकी पालना सुनिश्चित नहीं की जा रही है। सरकार को सरकारी कार्यालयों में पालना सुनिश्चित की जानी चाहिए। समाज के बाहरी आवरण की तरह ही सरकारी तंत्र में भी अधिकतर अधिकारी कर्मचारी कई बड़े नशों की गिरफ्त में हैं।
-लेखक कर्मचारी नेता और सामाजिक कार्यकर्ता हैं







