




ग्राम सेतु ब्यूरो.
सामाजिक सरोकार जब संस्थागत जिम्मेदारी से जुड़ते हैं, तो उसके परिणाम दूरगामी होते हैं। ऐसा ही उदाहरण मंडी समिति हनुमानगढ़ जंक्शन में देखने को मिला, जहां व्यापारियों और मंडी स्टाफ ने मिलकर क्षय रोग (टीबी) से जूझ रहे मरीजों के लिए 1 लाख 31 हजार रुपये की सहयोग राशि चिकित्सा विभाग को प्रदान की। यह सहयोग न केवल आर्थिक सहायता है, बल्कि उस संवेदनशील सोच का प्रतीक भी है, जो बीमारी से लड़ते व्यक्ति को सम्मान और संबल देती है। यह राशि जिला कलेक्टर डॉ. खुशाल यादव की प्रेरणा से सीएमएचओ डॉ. नवनीत शर्मा एवं जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. मुकेश शेखावत को सौंपी गई। इस सहयोग से जिले के 40 से अधिक टीबी मरीजों को छह माह तक पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे उनके उपचार की गति और प्रभावशीलता दोनों बढ़ेंगी।
कलेक्टर डॉ. खुशाल यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि टीबी कोई छुआछूत की बीमारी नहीं है। समय पर सही दवा और संतुलित पोषण मिलने से इसका पूरी तरह इलाज संभव है। उन्होंने बताया कि जिन लोगों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, उनके शरीर में मौजूद टीबी के जीवाणु सक्रिय नहीं हो पाते। इसके विपरीत कुपोषण, कमजोरी और लापरवाही बीमारी के खतरे को बढ़ा देती है।
डॉ. यादव ने अन्य मंडी समितियों, व्यापारिक संगठनों और संस्थाओं से भी इस अभियान में आगे आने की अपील की, ताकि टीबी उन्मूलन का यह प्रयास जनांदोलन का रूप ले सके।
सीएमएचओ डॉ. नवनीत शर्मा ने बताया कि जिला कलेक्टर स्वयं एक टीबी मरीज को छह माह तक पोषण सामग्री उपलब्ध कराकर ‘निक्षय मित्र’ बन चुके हैं। उनके इस आह्वान का सकारात्मक असर यह हुआ कि अधिकारी, जनप्रतिनिधि, भामाशाह और आम नागरिक भी आगे आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी इच्छुक व्यक्ति या संस्था किसी टीबी मरीज को गोद लेकर उसे नियमित रूप से दाल, चना, गुड़, तेल, गेहूं-चावल जैसी पोषण सामग्री उपलब्ध करा सकता है। यह सहायता दवा के साथ मिलकर मरीज के शीघ्र स्वस्थ होने में निर्णायक भूमिका निभाती है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. मुकेश शेखावत ने बताया कि वर्ष 2022 से अब तक जिले में 4254 टीबी मरीजों की पहचान की गई है, जबकि अब तक केवल 2195 लोग ही ‘निक्षय मित्र’ बने हैं। यानी अभी भी बड़ी संख्या में मरीज ऐसे हैं, जिन्हें अतिरिक्त पोषण सहयोग की आवश्यकता है।
सीएमएचओ डॉ. नवनीत शर्मा ने नागरिकों, सामाजिक संस्थाओं और व्यापारिक संगठनों से अधिक संख्या में आगे आने का आह्वान करते हुए कहा कि टीबी के खिलाफ लड़ाई सिर्फ दवा से नहीं, बल्कि सामूहिक संवेदना और सहयोग से जीती जा सकती है। दवा रोग को नियंत्रित करती है, लेकिन पोषण मरीज को ताकत देता है।
कार्यक्रम में मंडी सचिव विष्णुदत्त शर्मा, फूडग्रेन मर्चेंट्स एसोसिएशन अध्यक्ष रामलाल किरोड़ीवाल, व्यवसायी पदम चंद्र जैन, तरुण कौशल, इंद्र कुमार हिसारिया सहित लेखाधिकारी मांगीलाल शर्मा, सहायक लेखाधिकारी प्रकाश चंद्र एवं अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में इस तरह की पहल को आगे भी जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया। मंडी समिति के इस प्रयास ने यह साबित किया कि जब व्यापार, प्रशासन और समाज एक साथ कदम बढ़ाते हैं, तो स्वास्थ्य जैसी जटिल चुनौती भी कमजोर पड़ने लगती है।







