




ग्राम सेतु ब्यूरो.
हनुमानगढ़ जंक्शन स्थित हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी स्थित नॉर्थ पॉइंट पब्लिक स्कूल में उस वक्त माहौल पूरी तरह गंभीर हो गया, जब प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन की बैठक में मौजूद प्रतिनिधि एक-एक कर अपनी पीड़ा रखने लगे। चेहरों पर चिंता साफ दिख रही थी, आवाज़ में आक्रोश और शब्दों में वर्षों से दबा असंतोष। मुद्दे नए नहीं थे, लेकिन इस बार प्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया ज्यादा तीखी और साफ थी। आरटीई भुगतान में देरी, नए सत्र में प्रवेश की उलझनें और सबसे बड़ा सवाल, बिना मान्यता के चल रहे क्रंच यानी प्ले स्कूलों पर प्रशासन की चुप्पी।
मुख्य अतिथि संगठन के जिलाध्यक्ष सुरेश शर्मा थे। अध्यक्षता वरिष्ठ सदस्य आर.के. त्यागी ने की। बैठक की शुरुआत से ही साफ हो गया था कि यह सिर्फ औपचारिक चर्चा नहीं, बल्कि सिस्टम को आईना दिखाने का मंच है।
जिलाध्यक्ष सुरेश शर्मा ने सबसे ज्यादा जोर बिना मान्यता के चल रहे प्ले स्कूलों पर दिया। उन्होंने दो टूक कहा कि शिक्षा विभाग मान्यता प्राप्त स्कूलों पर हर नियम सख्ती से लागू करता है, इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टाफ, सुरक्षा, रिकॉर्ड यानी सब कुछ जांचा जाता है। लेकिन इसके उलट गली-मोहल्लों में खुले प्ले स्कूल बिना किसी सरकारी नियम के संचालित हो रहे हैं और मान्यता प्राप्त विद्यालयों से दोगुनी फीस वसूल रहे हैं। सुरेश शर्मा ने कहा, ‘अगर प्ले ग्रुप शिक्षा विभाग और राज्य सरकार की शर्तों के अनुसार चलें, तो हमें कोई आपत्ति नहीं। लेकिन छोटे बच्चों को बिना सुरक्षा, बिना प्रशिक्षित स्टाफ और बिना किसी अनुभव के छोड़ देना, यह हम कभी स्वीकार नहीं करेंगे।’
आरटीई भुगतान को लेकर भी बैठक में गहरी चिंता जताई गई। संचालकों का कहना था कि नए शैक्षणिक सत्र में प्रवेश तो हो रहे हैं, लेकिन भुगतान की अनिश्चितता से स्कूलों की आर्थिक स्थिति डगमगा रही है। जिलाध्यक्ष सुरेश शर्मा ने इस मुद्दे पर स्पष्ट शब्दों में कहा कि शिक्षा सेवा जरूर है, लेकिन इसे चलाने के लिए संसाधन चाहिए। समय पर भुगतान नहीं होगा, तो गुणवत्ता सबसे पहले प्रभावित होगी।
शहरी तहसील अध्यक्ष गुरप्रीत सिंह और ग्रामीण तहसील अध्यक्ष विजय सिंह चौहान ने जानकारी दी कि शीघ्र ही स्कूल संचालकों का एक शिष्टमंडल जिला कलेक्टर से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपेगा। ग्रामीण तहसील अध्यक्ष विजय सिंह ने कहा कि यह समस्या सिर्फ शहर तक सीमित नहीं है, ग्रामीण इलाकों में भी बिना मान्यता के प्ले स्कूल तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि नियम सबके लिए बराबर होने चाहिए। जो स्कूल मान्यता लेते हैं, वही क्यों हर जांच और हर शर्त झेलें?
बैठक में संघ के महासचिव भारत भूषण कौशिक ने संगठन की आगामी रणनीति पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर गया प्रसाद, विवेक भार्गव, शिंटू मिश्रा, लोकेश शर्मा, श्रवण शर्मा, रोबिन सिंह, रामस्वरूप भाटी, योगेश शर्मा, नजेंद्र सिंह, विनोद कुमार, प्रवीण वर्मा, शिशुपाल सिंह, पंकज पाल और दीपक कश्यप सहित अनेक स्कूल संचालक मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में प्रशासन से नियमों के समान पालन की मांग की।
बैठक के अंत में जिलाध्यक्ष सुरेश शर्मा ने साफ कहा कि संगठन टकराव नहीं चाहता, लेकिन बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा की गुणवत्ता पर कोई समझौता नहीं होगा। कुल मिलाकर, यह बैठक सिर्फ शिकायतों का पुलिंदा नहीं थी, यह एक स्पष्ट चेतावनी थी कि अगर संतुलन नहीं बना, तो सवाल और तेज होंगे। और सच कहें तो, शिक्षा जैसे विषय में आधा-अधूरा सिस्टम आखिर कब तक चलेगा?







