





ग्राम सेतु ब्यूरो.
भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष बलवीर बिश्नोई ने गेहूं खरीद की मौजूदा स्लॉट व्यवस्था को लेकर गंभीर आपत्ति जताते हुए जिला कलेक्टर डॉ. खुशाल यादव को पत्र सौंपा है। पत्र में रबी सीजन 2026-27 के दौरान किसानों से गेहूं खरीद की प्रक्रिया में व्यावहारिक समस्याओं का उल्लेख करते हुए स्लॉट सिस्टम में संशोधन या उसे समाप्त कर पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग की गई है।
पत्र में बताया गया है कि हनुमानगढ़ टाउन स्थित राजकीय मंडी में किसानों से गेहूं खरीद के लिए राज्य सरकार द्वारा ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण के बाद स्लॉट बुकिंग अनिवार्य की गई है। इसी स्लॉट के आधार पर सरकार द्वारा अधिकृत एजेंसियां गेहूं खरीद करती हैं। लेकिन हकीकत यह है कि बिना स्लॉट के किसान मंडी में गेहूं बेच ही नहीं सकता, जिससे बड़ी संख्या में किसान परेशान हैं।
बीजेपी नेता बलवीर बिश्नोई ने कहाकि गेहूं का सीजन महज 15 दिनों का होता है, जबकि नरमा कपास का सीजन करीब छह माह तक चलता है। स्लॉट प्रणाली कृषि जिंसों के लंबे बिक्री अंतराल को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जो गेहूं जैसी फसल के लिए व्यवहारिक नहीं है। गेहूं कटाई के बाद किसान के पास भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होती, ऐसे में स्लॉट मिलने तक इंतजार करना किसान के लिए नुकसानदेह साबित हो रहा है।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि नरमा कपास की फसल कॉटन कॉर्पाेरेशन ऑफ इंडिया द्वारा एक तय स्लॉट व्यवस्था के तहत फैक्ट्रियों में खरीदी जाती है, लेकिन गेहूं के मामले में किसान पर निर्भरता रहती है कि वह कब फसल लेकर मंडी पहुंचे। कई बार कंबाइन मशीन की उपलब्धता स्लॉट की तारीख से मेल नहीं खा पाती, जिससे किसान समय पर मंडी नहीं पहुंच पाता और उसका स्लॉट बेकार चला जाता है।
इस स्थिति में किसान न केवल गेहूं बेचने से वंचित रह जाता है, बल्कि उसे न्यूनतम समर्थन मूल्य और सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पाता। पत्र में यह भी याद दिलाया गया है कि गत वर्ष हनुमानगढ़ मंडी में किसानों से रिकॉर्ड मात्रा में गेहूं की खरीद भारतीय खाद्य निगम द्वारा एमएसपी पर की गई थी, लेकिन मौजूदा स्लॉट व्यवस्था के तहत ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है।
बलवीर बिश्नोई ने मांग की है कि राजकीय मंडी में नियुक्त सभी गेहूं खरीद एजेंसियों को लचीलापन दिया जाए और किसानों से बिना स्लॉट के भी गेहूं खरीद की अनुमति दी जाए। साथ ही खरीद एजेंसियों के अनुसार पृथक व्यवस्था की जाए, ताकि किसान अधिक मात्रा में फसल मंडी में ला सकें और सरकार को भी अधिक गेहूं की खरीद का लाभ मिले।
पत्र के अंत में किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए स्लॉट व्यवस्था समाप्त कर पूर्व की खरीद प्रणाली बहाल करने का आग्रह किया गया है। साफ है कि अगर समय रहते निर्णय नहीं लिया गया, तो नुकसान किसान का होगा और फायदा किसी का नहीं और खेती में ऐसे प्रयोग अक्सर भारी पड़ते हैं। इस मौके पर संतोष कुमार, रामकुमार कड़वासरा, दलबीर सिंवर और सतपाल आदि मौजूद थे।






