





ग्राम सेतु ब्यूरो.
विश्व स्वास्थ्य दिवस के मौके पर डॉक्टर्स फ़ॉर सोसाइटी (डीएफ़एस) की ओर से पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का सशक्त संदेश देते हुए कुमार सिटी परिसर में तृतीय पौधरोपण कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य यह स्पष्ट करना रहा कि मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के बीच गहरा तथा अटूट संबंध है। यदि पर्यावरण सुरक्षित और स्वच्छ रहेगा, तभी समाज स्वस्थ रह सकेगा।
डॉटरों ने न केवल पौधारोपण किया, बल्कि आमजन को यह भी समझाया कि आज के समय में बीमारियों की बढ़ती संख्या का एक बड़ा कारण प्रदूषण और प्रकृति से बढ़ती दूरी है। कार्यक्रम के माध्यम से डीएफ़एस ने यह संदेश दिया कि इलाज के साथ-साथ रोकथाम भी उतनी ही आवश्यक है और इसकी शुरुआत पर्यावरण संरक्षण से होती है।
कार्यक्रम के दौरान डीएफ़एस के संरक्षक डॉ. पारस जैन एवं डॉ. रवि त्रेहन ने डॉ. अर्जुन सिंह राठौड़ को डीएफ़एस की टोपी पहनाकर संस्था की सदस्यता ग्रहण करवाई। डॉक्टरों ने कहा कि युवा और सक्रिय चिकित्सकों के जुड़ने से संगठन की सामाजिक गतिविधियों को नई दिशा और गति मिलेगी।
कार्यक्रम में डीएफ़एस के अध्यक्ष डॉ. विक्रम जैन, सचिव डॉ. नरेश संकलेचा, कोषाध्यक्ष डॉ. पुनीत जैन सहित बड़ी संख्या में चिकित्सक एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इनमें डॉ. एस. एस. गेट, सीए राजेश गोयल, डॉ. संदीप भाकर, डॉ. जगदीश खत्री, डॉ. राजीव मुंजाल, डॉ. वरुण आहूजा, डॉ. जतिन सिंगला, डॉ. नरेश जिंदल, डॉ. जे. एस. संधू, डॉ. दीपक खुराना, डॉ. पवन मिड़ा, डॉ. विपुल असोपा सहित अनेक सदस्य शामिल रहे। सभी ने मिलकर पौधारोपण किया और परिसर को हरित बनाने का संकल्प लिया।
डीएफएस के सचिव डॉ. नरेश संकलेचा ने कहा कि प्रदूषित पर्यावरण में अच्छे स्वास्थ्य की कल्पना नहीं की जा सकती। स्वच्छ वायु, हरियाली, शुद्ध जल और प्रदूषण मुक्त वातावरण ही बेहतर जीवन की आधारशिला हैं। आज श्वसन रोग, हृदय रोग और अनेक गंभीर बीमारियां पर्यावरण प्रदूषण की देन हैं, जिन्हें रोका जाना अत्यंत आवश्यक है।
आईएमए के अध्यक्ष डॉ. एसएस गेट ने लोगों से अपील की कि वे दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव अपनाएं। जब भी सब्जी, फल या अन्य घरेलू सामान खरीदने बाजार जाएं, तो घर से कपड़े का थैला साथ लेकर जाएं। इससे एकल उपयोग वाली प्लास्टिक थैलियों का प्रयोग कम होगा और शहर में फैले प्लास्टिक कचरे में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकेगी।
संरक्षक डॉ. रवि त्रेहण ने बताया कि प्लास्टिक की थैलियां गलियों, पार्कों और खाली भूखंडों में बिखरी रहती हैं, जिन्हें पशु खा लेते हैं। इससे न केवल पर्यावरण को नुकसान होता है, बल्कि पशुओं की अकाल मृत्यु तक हो जाती है। यह समस्या तभी समाप्त हो सकती है, जब हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझे। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित सदस्यों ने एक स्वर में पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दोहराया, ‘अधिकाधिक वृक्षारोपण, एकल उपयोग प्लास्टिक से इंकार’ व ‘स्वच्छ हनुमानगढ़-हरित हनुमानगढ़’।







