




ग्राम सेतु ब्यूरो
वाग्भट वैलनेस एवं आयुष रिसर्च सेंटर के सौजन्य से सरस्वती स्कूल, गोलूवाला में विशाल निःशुल्क आयुर्वेद एवं नेचुरोपैथी चिकित्सा शिविर का भव्य आयोजन किया गया। शिविर में क्षेत्र के 213 से अधिक मरीजों ने भाग लेकर निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ प्राप्त किया। शिविर को लेकर ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखने को मिला तथा बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी स्वास्थ्य जांच करवाई।
उद्घाटन वाग्भट वैलनेस एवं आयुष रिसर्च सेंटर के संस्थापक बाबूलाल जुनेजा, प्रभु दयाल धतरवाल, दिलीप वर्मा, बलराम निवाद, कॉमरेड जगदीश सारस्वत, अमरीक सिंह, गुरबख्श लाल डोडा, प्रेम सिंगला, नरेश मिमानी, सुखवीर सिंह त्यागी, मांगे राम शर्मा, हरपाल धतरवाल, बाबू सिंह, कालू सिंह, मनोज स्वामी, दयाराम सिहाग तथा रुलदू सिंह पंच सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों द्वारा सामूहिक रूप से किया गया।
शिविर में अनुभवी आयुर्वेद एवं नेचुरोपैथी विशेषज्ञों की टीम ने अपनी सेवाएं प्रदान कीं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. देवेन्द्र सैनी एवं डॉ. राकेश बागोरिया ने मरीजों की गहन जांच कर रोगानुसार परामर्श प्रदान किया। साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने हेतु ‘वाग्भट अमृत काढ़ा’ निःशुल्क वितरित किया गया। योग शिक्षक अतुल ने ‘करोगे योग, रहोगे निरोग’ का संदेश देते हुए सभी को नियमित योग अपनाने के लिए प्रेरित किया। आवश्यक आयुर्वेदिक औषधियां भी नाममात्र शुल्क पर उपलब्ध करवाई गईं।
शिविर में किडनी रोग, लीवर संबंधी समस्याएं, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, अनिद्रा, थायराइड, मोटापा, जोड़ों एवं घुटनों का दर्द, रीढ़ की हड्डी के विकार, स्लिप डिस्क (एल-4 एवं एल-5), नसों की समस्याएं, मिर्गी, अस्थमा, नजला-जुखाम सहित अनेक जटिल एवं दीर्घकालिक रोगों का आयुर्वेद एवं नेचुरोपैथी पद्धति से उपचार एवं मार्गदर्शन प्रदान किया गया। विशेषज्ञों ने रोगों के मूल कारणों को समझाते हुए प्राकृतिक एवं संतुलित जीवनशैली अपनाने पर विशेष बल दिया।
श्री गुरु गोबिंद सिंह चौरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं वाग्भट वैलनेस एवं आयुष रिसर्च सेंटर के संस्थापक बाबूलाल जुनेजा ने कहा कि इस प्रकार के चिकित्सा शिविर समाज के लिए अत्यंत उपयोगी एवं जनकल्याणकारी सिद्ध हो रहे हैं। वर्तमान समय में बढ़ती जीवनशैली जनित बीमारियों के बीच आयुर्वेद एक सुरक्षित, प्रभावी एवं विश्वसनीय चिकित्सा पद्धति के रूप में उभर रहा है। उन्होंने लोगों से नियमित स्वास्थ्य परीक्षण करवाने तथा स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की अपील की।
सरपंच प्रतिनिधि कॉमरेड जगदीश सारस्वत ने कहा कि स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है। उन्होंने आयुर्वेद को भारतीय संस्कृति एवं परंपरा का अमूल्य विज्ञान बताते हुए कहा कि यह केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के संतुलन का आधार है। उन्होंने ग्रामीणों को प्राकृतिक जीवनशैली अपनाने, संतुलित आहार लेने एवं नियमित दिनचर्या का पालन करने की सलाह दी। साथ ही गोलूवाला में आयोजित इस निःशुल्क शिविर के लिए आयोजकों का आभार व्यक्त किया।
सरस्वती स्कूल के निदेशक मदन गोपाल शर्मा ने कहा कि हनुमानगढ़ जिले में वाग्भट वैलनेस एवं आयुष रिसर्च सेंटर की स्थापना अत्यंत सराहनीय पहल है। यह प्रयास हमारे ऋषि-मुनियों द्वारा प्रदत्त प्राचीन आयुर्वेद पद्धति को पुनर्जीवित करने का कार्य कर रहा है। उन्होंने सेंटर के संस्थापक बाबूलाल जुनेजा एवं उनके परिवार को इस जनसेवा हेतु साधुवाद दिया।
शिविर में आए सभी मरीजों को उनकी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार आहार-विहार, दिनचर्या एवं जीवनशैली से संबंधित महत्वपूर्ण सुझाव भी प्रदान किए गए। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा आयोजन की सराहना की। इस शिविर के सफल आयोजन में प्रशासक जयवीर सिंह , शिविर संयोजक अनिल जांदू, विपणन कार्यकारी विकास भादू, मलकीत सिंह, चिकित्सीय सहयोगी कमलेश एवं पूजा, औषधि विशेषज्ञ राजकुमार, प्रयोगशाला तकनीशियन अनमोल खान, विक्रम, नर्सिंग अधिकारी कनुप्रीत कौर तथा आयुष, नर्सिंग एवं पैरामेडिकल विभाग के विद्यार्थी रवि कुमार, वंदना, स्नेहा, संदीप, पूजा, बिलाल खान, अनमोल सिंह, शिवानी, अल्का, सानिया एवं हरनूर सहित वाग्भट टीम के सभी सदस्यों का विशेष योगदान रहा।






