



ग्राम सेतु ब्यूरो
सोमवार की सुबह हनुमानगढ़ जंक्शन के गांधी नगर स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में कुछ अलग ही माहौल था। मंदिर प्रांगण में श्रद्धा के साथ-साथ स्वास्थ्य की चर्चा गूंज रही थी। फीता कटते ही और माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ निःशुल्क आयुर्वेद-नेचुरोपैथी चिकित्सा शिविर का शुभारम्भ हुआ। कतारों में खड़े मरीज, परामर्श में जुटे चिकित्सक और स्वयंसेवकों की सक्रियता। पूरा दृश्य मानो यह संदेश दे रहा था कि आधुनिक भागदौड़ के बीच लोग अब फिर से परंपरागत, प्राकृतिक और भरोसेमंद चिकित्सा पद्धति की ओर लौट रहे हैं।
श्री नीलकंठ महादेव सेवा प्रन्यास एवं वाग्भट वैलनेस एवं आयुष रिसर्च सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में लगाए शिविर में 150 से अधिक मरीजों ने स्वास्थ्य परीक्षण, चिकित्सकीय परामर्श एवं आयुर्वेद आधारित उपचार संबंधी मार्गदर्शन का लाभ उठाया।
उद्घाटन समारोह में श्री नीलकंठ महादेव सेवा प्रन्यास के अध्यक्ष अश्विनी नारंग, वाघभट वैलनेस एवं आयुष रिसर्च सेंटर व एसकेडीयू संस्थापक बाबूलाल जुनेजा, रामचन्द्र बाघला, चिमन मित्तल बब्बू, महावीर शर्मा, भीष्म कौशिक, दीपक नारंग, अनिल शर्मा, विजय भूतना, सुरेन्द्र गाड़ी, रत्तीराम शाक्य, श्रवण सहारण, राजकुमार नागपाल, सुनील मिड्ढा, साहबराम करड़वाल, नरेश बाघला, महेश कुमार लकेसर तथा चिकित्सा अधिकारी डॉ. आनंद कुमार बंसल, स्वदेशी जागरण मंच के जिला संयोजक विजय कौशिक सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
शिविर में विशेषज्ञ आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. राकेश एवं डॉ. मांगीलाल सुथार ने मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें व्यक्तिगत चिकित्सकीय परामर्श दिया। इस दौरान किडनी, लीवर, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, थायराइड, मोटापा, जोड़ों एवं घुटनों के दर्द, रीढ़ संबंधी समस्याओं, स्लिप डिस्क, नसों के रोग, अस्थमा, अनिद्रा, मिर्गी सहित विभिन्न दीर्घकालिक बीमारियों से पीड़ित मरीजों की जांच कर आयुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति के अनुरूप उपचार एवं जीवनशैली संबंधी सुझाव दिए गए। चिकित्सकों ने संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या तथा प्राकृतिक जीवनशैली अपनाने पर विशेष बल दिया।
श्री नीलकंठ महादेव सेवा प्रन्यास के अध्यक्ष अश्विनी नारंग ने कहा कि ऐसे चिकित्सा शिविरों का उद्देश्य केवल रोगों का उपचार करना नहीं, बल्कि लोगों में आयुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सा के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद भारत की प्राचीन एवं वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धति है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ स्वस्थ एवं संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देती है।
एसकेडी संस्थापक बाबूलाल जुनेजा ने कहा कि वर्तमान समय में बदलती जीवनशैली, तनाव और अनियमित खान-पान के कारण अनेक लोग गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। ऐसे में आयुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सा रोगों के उपचार के साथ-साथ स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का प्रभावी माध्यम बन रही है। उन्होंने बताया कि शिविर का उद्देश्य आमजन तक सुलभ एवं निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है, जिससे अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें।
सामाजिक कार्यकर्ता भीष्म कौशिक ने कहा कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता ही स्वस्थ समाज की आधारशिला है। आयुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से लोग बिना दुष्प्रभाव के बेहतर स्वास्थ्य प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने समाज में ऐसे जनहितकारी आयोजनों को निरंतर आयोजित किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।
शिविर प्रभारी अनिल जांदू ने बताया कि शिविर में आए सभी मरीजों को उनकी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार व्यक्तिगत परामर्श प्रदान किया गया। उन्होंने शिविर के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले सभी चिकित्सकों, अतिथियों, स्वयंसेवकों एवं सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त किया।
शिविर के सफल संचालन में प्रशासक जयवीर सिंह, विकास भादू, राजकुमार, पूजा गौड़, कमलेश, रविकुमार, वंदना, स्नेहा, पिंकी, रेणुका, पंकज सहित नर्सिंग एवं आयुष विभाग के विद्यार्थियों तथा वाग्भट टीम के सदस्यों का विशेष योगदान रहा।






