



डॉ. पीयूष त्रिवेदी.
इस समय देश में सबसे गंभीर बीमारी डायबिटीज मानी जा रही है, जिसे आम भाषा में शुगर कहा जाता है। बताया जाता है कि लगभग 4 करोड़ 80 लाख लोग पहले से इस बीमारी से पीड़ित हैं और करीब 3 करोड़ लोग इसके जोखिम में बताए जा रहे हैं। डायबिटीज ऐसी बीमारी है जो धीरे-धीरे पूरे शरीर को अंदर से कमजोर कर देती है। दुनिया भर के वैज्ञानिक इसे एक ऐसी बीमारी बताते हैं, जिसमें व्यक्ति को कई बार यह भी पता नहीं चलता कि बीमारी कितनी गंभीर रूप ले चुकी है।
इसी वजह से डायबिटीज को अंग्रेजी में ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है। यह बीमारी चुपचाप शरीर को नुकसान पहुंचाती है। जिन लोगों को लंबे समय से डायबिटीज रहती है, उनकी किडनी, लीवर और रक्त प्रणाली प्रभावित हो सकती है। खराब रक्त के कारण ब्रेन स्ट्रोक, ब्रेन हेमरेज, डायलिसिस और यहां तक कि मृत्यु तक की आशंका बताई जाती है। कई मामलों में आंखों की रोशनी जाने का खतरा भी सामने आता है।
यह भी कहा जाता है कि डायबिटीज होने पर शरीर का कोई भी अंग प्रभावित हो सकता है। आधुनिक चिकित्सा में आमतौर पर डॉक्टर इंसुलिन इंजेक्शन या दवाइयों की सलाह देते हैं। हालांकि, कुछ वर्गों का दावा है कि लंबे समय तक इंसुलिन लेने से शरीर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसी वजह से वे योग, प्राणायाम और आयुर्वेदिक पद्धतियों को विकल्प के रूप में प्रस्तुत करते हैं।
योग और प्राणायाम के समर्थकों के अनुसार डायबिटीज रोगियों को रोजाना तीन प्रमुख प्राणायाम करने चाहिए। पहला है हस्तिका प्राणायाम, जिसे शांत बैठकर गहरी सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया बताया गया है। दूसरा कपालभाति प्राणायाम है, जिसमें जोर से सांस बाहर निकाली जाती है। तीसरा अनुलोम-विलोम प्राणायाम है, जिसमें दोनों नासिकाओं से क्रमवार श्वास-प्रश्वास किया जाता है। इन तीनों प्राणायामों को प्रतिदिन लगभग एक घंटे करने की सलाह दी जाती है।
इसके साथ कुछ घरेलू और आयुर्वेदिक सामग्रियों का भी उल्लेख किया जाता है। मेथी दाना, तेज पत्ता, जामुन की गुठली और बेलपत्र को सुखाकर पीसकर चूर्ण बनाने की सलाह दी जाती है। इस मिश्रण को सुबह और शाम भोजन से पहले गुनगुने पानी के साथ लेने की बात कही जाती है। दावा किया जाता है कि यह उपाय सस्ता और आसानी से उपलब्ध है।
इलाज के दौरान परहेज को भी जरूरी बताया गया है। विशेष रूप से चीनी और मीठे पदार्थों से पूरी तरह दूरी बनाने पर जोर दिया जाता है। चाय, दूध, मिठाइयों और मीठे खाद्य पदार्थों से परहेज करने की सलाह दी जाती है। कहा जाता है कि जागरूकता, अनुशासन और नियमित अभ्यास से डायबिटीज पर नियंत्रण संभव है।
-लेखक आयुर्वेद विशेषज्ञ हैं



