



ग्राम सेतु ब्यूरो.
महिला दिवस पर मुख्यमंत्री की सभा में हनुमानगढ़ पहुंचीं महिलाओं से दुपट्टे उतरवाकर प्रवेश दिलाने के मामले ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। कांग्रेस ने इसे महिलाओं के सम्मान पर सीधा हमला बताते हुए बीजेपी और भजनलाल सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। दूसरी ओर, प्रशासन इसे सुरक्षा कारणों से उठाया गया कदम बता रहा है। घटना अब केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रही, यह प्रदेश की राजनीति में महिला सम्मान, प्रशासनिक संवेदनशीलता और सरकार की मंशा पर बहस का केंद्र बन गई है।
हनुमानगढ़ के सर्किट हाउस में आयोजित पत्रकार वार्ता में जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष मनीष मक्कासर ने कहा कि बीजेपी नेताओं के मुंह से महिला सम्मान की बातें शोभा नहीं देतीं। उन्होंने आरोप लगाया कि भजनलाल शर्मा और दीया कुमारी की मौजूदगी में आम परिवारों की महिलाओं का अपमान हुआ, जो निंदनीय और शर्मनाक है। मक्कासर ने कहा कि महिला दिवस जैसे अवसर पर महिलाओं के पहनावे पर सवाल खड़े करना सरकार की संवेदनहीनता दिखाता है।
कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पर हनुमानगढ़ के लिए कोई ठोस नई घोषणा न करने का भी आरोप लगाया। मक्कासर ने कहा कि मंच से जिन विकास कार्यों का जिक्र हुआ, वे पहले के बजटों की घोषणाएं थीं, जिनका जमीन पर उतरना अब भी बाकी है। उन्होंने अपेक्षा जताई कि मुख्यमंत्री स्पिनिंग मिल को दोबारा शुरू करने, शुगर मिल खोलने और क्षेत्र को राइस बेल्ट घोषित करने जैसे ठोस मुद्दों पर स्पष्ट रोडमैप दें। कांग्रेस का कहना है कि आम किसानों से मुख्यमंत्री की सीधी मुलाकात नहीं हुई और कई संगठनों व लोगों को अपनी समस्याएं रखने से रोका गया, जिससे जन-निराशा बढ़ी है।
प्रशासन की ओर से दलील दी जा रही है कि जिले में कानून-व्यवस्था को लेकर कई जगह धरने चल रहे थे और आशंका थी कि कुछ संगठन मुख्यमंत्री को काले झंडे दिखा सकते हैं। इसी वजह से काले कपड़े पहनकर किसी को भी सभा में प्रवेश नहीं दिया गया। अतिरिक्त सतर्कता के तहत काले रंग के पॉलीथिन बैग तक बाहर रखवाए गए। कांग्रेस का तर्क है कि सुरक्षा के नाम पर महिलाओं से दुपट्टा उतरवाना असंवेदनशील कदम है और इसे बेहतर ढंग से हैंडल किया जा सकता था।
पत्रकार वार्ता में कांग्रेस के कई नेता मौजूद रहे, जिनमें ओबीसी मोर्चा अध्यक्ष मनमोहन सोनी, मीडिया प्रकोष्ठ प्रभारी जयराम ढुकिया, खुशी अमलानी और आमिर खान शामिल थे। नेताओं ने एक स्वर में कहा कि सरकार महिला सम्मान की बात करे, उससे पहले कार्यक्रम स्थलों पर महिलाओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करे।
राजनीतिक तौर पर यह मुद्दा सरकार के लिए दोहरी चुनौती बन गया है। एक तरफ महिला दिवस के मंच से ‘नारी सम्मान’ का संदेश, दूसरी तरफ प्रवेश व्यवस्था को लेकर उठे सवाल। विपक्ष इस विरोधाभास को जोर-शोर से उछाल रहा है। बीजेपी के सामने अब यह जिम्मेदारी है कि वह सुरक्षा प्रोटोकॉल पर पारदर्शिता लाए, स्पष्ट एसओपी जारी करे और यह भरोसा दिलाए कि भविष्य में किसी भी स्थिति में महिलाओं की गरिमा से समझौता नहीं होगा।






