



ग्राम सेतु ब्यूरो.
तेजी से बदलते समय ने इंसान की रफ्तार तो बढ़ा दी, लेकिन रिश्तों की रफ्तार थाम दी। आज हालत यह है कि बचपन के साथी, एक ही शहर में रहते हुए भी महीनों एक-दूसरे से नहीं मिल पाते। साधन हैं, सुविधाएं हैं, मोबाइल और इंटरनेट भी जेब में हैं, लेकिन साथ बैठकर खुलकर बात करने की फुर्सत जैसे कहीं खो गई है। इसी सामाजिक दूरी और बढ़ते अकेलेपन को तोड़ने के उद्देश्य से हनुमानगढ़ में पहली बार ‘बौद्धिक हथाई’ का आयोजन किया जा रहा है।
कभी हथाई केवल बैठने की जगह नहीं होती थी। वह गांव और शहर की अघोषित संसद हुआ करती थी। वहीं सुख-दुख साझा होते थे, रिश्तों में आई गांठें खुलती थीं और कई बड़े विवाद भी चाय की चुस्की के साथ सुलझ जाया करते थे। शाम को साथ बैठकर की गई बातचीत दिनभर की थकान और मानसिक बोझ को अपने आप हल्का कर देती थी। लेकिन डिजिटल क्रांति के शोर में हथाई की वह शांत, सार्थक और मानवीय परंपरा धीरे-धीरे लुप्त होती चली गई।
आज हर आयु वर्ग के लोग स्क्रीन से चिपके नजर आते हैं। रील और शॉर्ट वीडियो से मिलने वाला ‘इंस्टेंट डोपामाइन’ धैर्य और गहराईकृदोनों को खत्म कर रहा है। स्थिति यह है कि एक ही छत के नीचे रहने वाले परिवारों में भी सदस्य अलग-अलग कमरों में अपने-अपने फोन में व्यस्त रहते हैं। नतीजा, संवाद कम हुआ है और अकेलापन बढ़ा है। सामाजिक रिश्ते मतलब आधारित होते जा रहे हैं, जिससे लोग अवसाद और मानसिक तनाव का शिकार होने लगे हैं।
हनुमानगढ़ जैसे शहर में, जहां कभी अपनापन और यारी-दोस्ती पहचान हुआ करती थी, वहां भी अब लोग खुद में सिमटते नजर आते हैं। दो दशक पहले जैसा खुलापन, वैसी बेफिक्री अब दिखाई नहीं देती। सामाजिक मेलजोल कम होने से नागरिक जीवन में भी एक तरह की नीरसता और खालीपन पसर गया है। इस स्थिति को देखते हुए समाज के कुछ जागरूक लोगों ने पहल करने का निर्णय लिया।
इसी कड़ी में नागरिक सुरक्षा मंच के संस्थापक शंकर सोनी ने लोगों को घरों और मोबाइल की कैद से बाहर निकालने का बीड़ा उठाया है। मंच का उद्देश्य है, मोबाइल की लत से दूरी और सामाजिकता की ओर वापसी। इसके लिए ‘बौद्धिक हथाई’ की शुरुआत की जा रही है, जहां लोग बिना किसी औपचारिकता के बैठकर खुलकर बात कर सकेंगे। यह आयोजन किसी भाषण या मंचीय कार्यक्रम की तरह नहीं, बल्कि आत्मीय संवाद का प्रयास है।

एडवोकेट शंकर सोनी ने बौद्धिक हथाई में युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक सभी वर्गों की सहभागिता का आह्वान किया गया है। सामाजिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और समकालीन विषयों पर चर्चा होगी। आयोजकों का मानना है कि आमने-सामने बैठकर संवाद करने से न केवल मानसिक तनाव कम होता है, बल्कि समाज का बौद्धिक स्तर भी मजबूत होता है।
हनुमानगढ़ की इस पहली बौद्धिक हथाई का आयोजन 29 मार्च टाउन में भद्रकाली रोड के पास स्थित शहीद स्मारक पर किया जाएगा। दोपहर 1 से 3 बजे होने वाली हथाई को लेकर शंकर सोनी कहते हैं, ‘लोग बेहिचक आकर इस संवाद का हिस्सा बन सकते हैं। यह पहल सामाजिक जुड़ाव को फिर से मजबूत करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है। जब समाज में संवाद टूटता है, तो अकेलापन और अवसाद जन्म लेते हैं। हथाई उसी संवाद की पुनर्स्थापना का माध्यम है।’





