



ग्राम सेतु ब्यूरो.
पंजाब और राजस्थान के बीच पानी को लेकर एक बार फिर सियासी टकराव तेज हो गया है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राजस्थान सरकार पर पिछले छह दशकों से पानी का पैसा नहीं देने का गंभीर आरोप लगाते हुए 1.44 लाख करोड़ रुपये के बकाये की मांग कर दी है। मान ने साफ शब्दों में कहा है कि राजस्थान या तो यह बकाया चुकाए या फिर पंजाब से पानी लेना बंद करे।
चंडीगढ़ में मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री मान ने कहा कि पंजाब सरकार इस मुद्दे पर औपचारिक दावा पेश करने जा रही है और मामले को मजबूती से आगे बढ़ाया जाएगा। भगवंत मान ने अपने दावे की जड़ें ब्रिटिश काल तक बताते हुए कहा कि वर्ष 1920 में तत्कालीन बीकानेर महाराजा और बहावलपुर रियासत (जो अब पाकिस्तान में है) के बीच पानी को लेकर एक समझौता हुआ था। इसी समझौते के तहत राजस्थान फीडर के माध्यम से बीकानेर और श्रीगंगानगर क्षेत्र को 18,000 क्यूसेक पानी दिया जाने लगा।
मान के अनुसार, उस समय प्रति एकड़ के हिसाब से पानी देने की स्पष्ट फीस तय की गई थी। राजस्थान सरकार 1960 तक नियमित रूप से यह भुगतान करती रही। यानी पानी भी लिया गया और उसका मूल्य भी चुकाया गया, जैसा कि पुराने जमाने में होता था, साफ-सुथरा हिसाब।
मुख्यमंत्री मान ने कहा कि 1960 में सिंधु जल समझौते के लागू होने के बाद पानी के बंटवारे का नया ढांचा बना। इसके बावजूद राजस्थान ने 18,000 क्यूसेक पानी लेना जारी रखा, लेकिन पानी का भुगतान देना बंद कर दिया। हैरानी की बात यह रही कि उस दौर में पंजाब ने भी इस बकाये की मांग नहीं की। मान का दावा है कि यही वजह है कि आज यह रकम बढ़कर करीब 1.44 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा, ‘पानी आप 1920 के समझौते के आधार पर ले रहे हैं और पैसे की बात करते वक्त 1960 के कानून की दुहाई दी जा रही है। यह दोहरा मापदंड नहीं चलेगा।’
भगवंत मान ने दो टूक कहा कि अगर राजस्थान यह कहता है कि सिंधु जल समझौते में भुगतान का जिक्र नहीं है, तो फिर उसे 1920 वाले समझौते के तहत पानी लेने का भी कोई अधिकार नहीं बनता। या तो पुराने समझौते को औपचारिक रूप से समाप्त करवाया जाए या फिर पंजाब से पानी लेना बंद किया जाए। मान ने कहा, ‘वे हमारा पानी तो चाहते हैं, लेकिन हमारा बकाया चुकाने को तैयार नहीं हैं। यह न्यायसंगत नहीं है।’
मुख्यमंत्री मान ने इस पूरे विवाद में एक और विरोधाभास की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि सतलुज-यमुना लिंक नहर के जरिए पंजाब से पानी की मांग करने वाला राज्य, इतने बड़े बकाये के मुद्दे पर पूरी तरह चुप है। मान ने बताया कि इस मसले पर चर्चा के लिए पंजाब सरकार ने राजस्थान सरकार को बैठक के लिए पत्र लिखा है। उनका कहना है कि पंजाब अपने हक का पानी और उसका मूल्य दोनों लेकर रहेगा।
पंजाब सरकार के इस आक्रामक रुख से स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में पानी का यह मुद्दा केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि संवैधानिक और कानूनी लड़ाई का रूप ले सकता है। राजस्थान सरकार की प्रतिक्रिया अभी नहीं आई है। देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस मामले पर क्या रुख अपनाती है।





