



ग्राम सेतु ब्यूरो.
कहते हैं प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती। इस कहावत को सच कर दिखाया है हनुमानगढ़ जिले के पीलीबंगा निवासी होनहार छात्र रवनीत ने। छोटे से कस्बे के निवासी तेजिंदर सिंह और हरप्रीत कौर के सुपुत्र रवनीत ने अपनी असाधारण बौद्धिक क्षमता और सतत परिश्रम के बल पर दिल्ली विश्वविद्यालय का प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी गोल्ड मेडल प्राप्त कर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र का मान बढ़ाया है।
वरिष्ठ अधिवक्ता रिछपाल चहल ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि रवनीत की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदार हो, तो छोटे कस्बों से निकलकर भी देश के सर्वाेच्च शैक्षणिक मंचों पर परचम लहराया जा सकता है। यह उपलब्धि पीलीबंगा और हनुमानगढ़ के हर विद्यार्थी के लिए प्रेरणा है।
रवनीत की यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष मानी जा रही है क्योंकि वह हंसराज कॉलेज में इस वर्ष पढ़ाए जाने वाले सभी विषयों और अनुशासनों में एकमात्र छात्र हैं, जिन्हें दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा यह सर्वाेच्च शैक्षणिक सम्मान प्रदान किया गया। यह उपलब्धि कॉलेज के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है।
मूल रूप से यह स्वर्ण पदक फरवरी माह में आयोजित दीक्षांत समारोह में प्रदान किया जाना था, किंतु उस समय आईआईटी रूड़की में मिड-टर्म परीक्षाओं के कारण रवनीत समारोह में उपस्थित नहीं हो सके। बाद में यह स्वर्ण पदक हंसराज कॉलेज की प्राचार्य प्रोफेसर डॉ. रामा द्वारा उन्हें विशेष रूप से प्रदान किया गया।
हंसराज कॉलेज में बी.एससी. लाइफ साइंसेज़ के दौरान रवनीत ने केवल अकादमिक उत्कृष्टता ही नहीं दिखाई, बल्कि नेतृत्व और शोध के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बनाई। वह एक साथ तीन प्रमुख छात्र सोसायटियों के अध्यक्ष रहे और विद्यार्थियों के कौशल विकास में सक्रिय भूमिका निभाई। स्नातक स्तर पर रहते हुए उन्होंने दो पुस्तक अध्याय लिखे और नौ से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शोध प्रस्तुतियों में पुरस्कार प्राप्त किए।
वरिष्ठ अधिवक्ता रिछपाल चहल के अनुसार, आज के समय में केवल डिग्री नहीं, बल्कि शोध और नेतृत्व क्षमता ही किसी विद्यार्थी को विशिष्ट बनाती है। रवनीत ने इस संतुलन को बखूबी साधा है।
रवनीत की शैक्षणिक यात्रा यहीं नहीं रुकी। उन्होंने आईआईटी संयुक्त प्रवेश परीक्षा जैसी कठिन परीक्षा उत्तीर्ण की और वर्तमान में आईआईटी रुड़की से एम.एस. बायोसाइंसेज़ एंड बायोइंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने गेट 2026 परीक्षा में पूरे देश में 57वीं अखिल भारतीय रैंक प्राप्त कर अपनी मेधा का एक और प्रमाण दिया है।
रवनीत की इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने न केवल उनके माता-पिता, बल्कि पीलीबंगा, हनुमानगढ़ और पूरे राजस्थान को गौरवान्वित किया है। वरिष्ठ अधिवक्ता रिछपाल चहल ने कहा कि ऐसे विद्यार्थी ही किसी क्षेत्र की असली पहचान होते हैं। रवनीत ने यह सिद्ध कर दिया है कि प्रतिभा यदि सच्ची लगन से जुड़ जाए, तो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच दूर नहीं रहते।






