



भारतीय जनता पार्टी, राजस्थान में हाल ही में कुछ नए प्रदेश प्रवक्ताओं की नियुक्ति की गई है। इनमें प्रमुख नाम डॉ. चेतन प्रकाश राजपुरोहित का है। डॉ. राजपुरोहित पार्टी के चुनाव प्रबंधन विभाग के प्रदेश सह संयोजक भी हैं। राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के रूप में सेवाएं देने के बाद उन्होंने वीआरएस लेकर पूरी तरह संगठन कार्य में स्वयं को समर्पित किया है। आरएसएस के स्वयंसेवक के रूप में अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत करने वाले डॉ. राजपुरोहित को डेटा और चुनावी प्रबंधन का विशेषज्ञ माना जाता है। वे पार्टी के वरिष्ठ रणनीतिकार सुनील बंसल के करीबी नेताओं में गिने जाते हैं। ‘भटनेर पोस्ट मीडिया ग्रुप’ से विशेष बातचीत में डॉ. राजपुरोहित ने विपक्ष के आरोपों पर दो टूक जवाब देते हुए कहा कि बीजेपी न तो चुनाव से भागती है और न ही डरती है, बल्कि रिकॉर्ड मतों से जीतने का माद्दा रखती है। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख संपादित अंश

भटनेर पोस्ट न्यूज सर्विस
सरकार को ढाई साल से अधिक हो चुके हैं। आप तीन ऐसे काम बताइए, जिनसे आम आदमी की ज़िंदगी वास्तव में बदली हो।
-तीन क्यों, मैं दर्जनों काम गिना सकता हूं। लेकिन यदि तीन प्रमुख कार्यों की बात करें, तो सबसे पहले आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना का उल्लेख जरूरी है। पिछली सरकार की चिरंजीवी योजना की जगह हमने आयुष्मान योजना लागू की, जिसमें उपचार की सीमा पांच लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपये की गई। इसमें पोर्टेबिलिटी की सुविधा भी है, जिससे राजस्थान का व्यक्ति दूसरे राज्यों, जैसे पंजाब और हरियाणा आदि दूसरे राज्यों में भी निःशुल्क इलाज करवा सकता है। पहले जहां 1300 अस्पताल जुड़े थे, अब यह संख्या बढ़कर 1900 हो गई है। बीमारियों की श्रेणियां भी बढ़ाई गई हैं। यह सब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की संवेदनशील सोच को दर्शाता है।
दूसरा बड़ा काम अन्नदाता किसान के हित में हुआ है। ईआरसीपी की जगह राम सेतु परियोजना पर काम शुरू हो चुका है। पिछली सरकार सिर्फ बातें करती रही, जबकि भजनलाल सरकार ने इसे प्राथमिकता दी। यमुना जल समझौते के तहत शेखावाटी तक पानी पहुंचाने की दिशा में ठोस पहल हुई है। नकली बीज से किसानों को बचाने के लिए 35 लाख बीज किट वितरित की गईं। खेतों की तारबंदी पर अनुदान की व्यवस्था की गई है और किसान सम्मान निधि को 12 हजार रुपये तक करने की तैयारी चल रही है।
तीसरा बड़ा वर्ग युवा है। भजनलाल सरकार ने अब तक 351 परीक्षाएं आयोजित करवाई हैं और एक भी पेपर लीक नहीं हुआ। यह सरकार की नीति और नीयत दोनों को दर्शाता है। अब तक 1 लाख 1 हजार युवाओं को सरकारी नौकरी दी जा चुकी है और इतने ही पदों की प्रक्रिया चल रही है। पदोन्नति की प्रक्रिया भी समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ रही है। ये सभी कार्य आम आदमी की ज़िंदगी में वास्तविक बदलाव लाने वाले हैं।
किसान कह रहा है कि मौसम मार रहा है और नियम परेशान कर रहे हैं। सरकार राहत देने में धीमी क्यों दिखती है?
-आपका सवाल जायज़ है। किसान भाइयों से मेरा आग्रह है कि वे फसल बेचने में जल्दबाज़ी न करें। हमारी सरकार ने टोकन माफिया का पूरी तरह खात्मा किया है। किसान मौसम विभाग के पूर्वानुमान को समझें और उसी के अनुसार मंडी में फसल लाएं। यदि कहीं कोई समस्या है, तो किसान सीधे मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। मुख्यमंत्री स्वयं इन शिकायतों की सुनवाई करते हैं और त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाता है।
विपक्ष आरोप लगा रहा है कि सत्ता में आते ही बीजेपी ‘केंद्रीय एजेंसियों की राजनीति’ कर रही है। आप क्या कहेंगे?
-विपक्ष को पहले 1975 का इतिहास याद करना चाहिए। उस दौर में क्या हुआ, यह देश जानता है। कांग्रेस अपने ही कुकर्मों की सज़ा भुगत रही है और उसका ठीकरा मोदी सरकार पर फोड़ने का प्रयास कर रही है। बीजेपी की नीति भ्रष्टाचार के मामले में जीरो टॉलरेंस की है। कोई भी दोषी बख्शा नहीं जाएगा। अगर कांग्रेस को चुनाव आयोग पर भरोसा नहीं है, तो वह अपने विधायकों और सांसदों से इस्तीफा क्यों नहीं लेती? जब चुनाव निष्पक्ष नहीं होते, तो उनके प्रतिनिधि जीतते कैसे हैं? इस तरह के बयान देकर कांग्रेस केवल अपनी राजनीतिक नाकामी छिपाने की कोशिश कर रही है।
महंगाई पर केंद्र और राज्य, दोनों जगह बीजेपी की सरकार है, फिर आम आदमी को राहत क्यों महसूस नहीं हो रही?
-महंगाई की चर्चा से पहले हमें 2014 की स्थिति को याद करना चाहिए। तब रसोई गैस सिलेंडर हजार रुपये के आसपास मिलता था। हमने ‘गिव अप’ अभियान चलाकर सक्षम लोगों से सब्सिडी छोड़ने का आह्वान किया। उसी पैसे से आज उज्ज्वला योजना के तहत गरीब परिवारों के चूल्हे जल रहे हैं। सच यह है कि लोगों की आय भी बढ़ी है। कीमतों में सीमित बढ़ोतरी को हर बार महंगाई कहना सही नहीं है।
बीजेपी सुशासन की बात करती है, लेकिन अफसरशाही हावी होने के आरोप लगते हैं। जनप्रतिनिधि कमजोर क्यों दिखते हैं?
-अगर किसी को अफसरशाही से समस्या है, तो वह पोर्टल पर शिकायत दर्ज करे। त्वरित कार्रवाई होगी। भ्रष्ट और काम न करने वाले अधिकारियों को किसी भी हाल में नहीं बख्शा जाएगा। पहले शिकायतों की मॉनिटरिंग मासिक बैठकों में होती थी, अब इसे पाक्षिक कर दिया गया है। मुख्यमंत्री स्वयं इसकी निगरानी कर रहे हैं। सरकार इस मामले में पूरी तरह सख्त है।
विपक्ष कह रहा है कि सरकार चुनाव से भाग रही है। क्या सच है?
-यह आरोप पूरी तरह बेबुनियाद है। विपक्ष स्पष्ट करे कि क्या ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के बिना चुनाव करवा देना चाहिए था? सरकार चुनाव से क्यों भागेगी? करीब 400 पंचायतों में ओबीसी मतदाताओं से जुड़े आंकड़ों में विसंगतियां थीं, जिन्हें सुलझाया गया है। बीजेपी सरकार वन स्टेट, वन इलेक्शन की दिशा में काम कर रही है। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। हम चुनाव से भागने वाले नहीं हैं, हम रिकॉर्ड मतों से चुनाव जीतने वाले हैं।
आखिरी सवाल, ढाई साल बीतने को हैं, राजनीतिक नियुक्तियों में देरी की क्या वजह है?
-आपका सवाल सही है। पहले चरण में आठ नियुक्तियां की गईं। अब सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि योग्य, सक्षम और निष्ठावान लोगों को ही जिम्मेदारी दी जाए। बहुत जल्द राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर सकारात्मक खबर सामने आएगी।







