




डॉ. भारतभूषण शर्मा और भाजपा, मानो एक-दूसरे के पर्याय हों। हनुमानगढ़ जंक्शन में मंडल अध्यक्ष के रूप में संघर्षशील नेता की पहचान बनाने वाले डॉ. शर्मा लंबे समय से संगठनात्मक परिदृश्य से दूर रहे। अब जैसे उनका वनवास समाप्त हुआ हो। प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने उन्हें भाजपा प्रदेश कार्यसमिति का सदस्य नियुक्त किया है। ‘ग्राम सेतु डॉट कॉम’ से विशेष बातचीत में डॉ. भारतभूषण शर्मा ने संगठन, कार्यकर्ताओं और राजनीति से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर खुलकर विचार रखे। प्रस्तुत हैं प्रमुख अंश
लंबे समय बाद आपको भाजपा प्रदेश कार्यसमिति में जिम्मेदारी मिली है, इसे आप कैसे देखते हैं?
-पार्टी ने जब-जब मुझे कोई जिम्मेदारी दी, मैंने उसे पूरी ईमानदारी और निष्ठा से निभाया। अब प्रदेश नेतृत्व ने नया दायित्व सौंपा है, जिसे भी उसी समर्पण भाव से निभाने का प्रयास करूंगा।
आपने मंडल अध्यक्ष और जिला उपाध्यक्ष जैसे पदों पर कार्य किया, उस अनुभव से क्या सीख मिली?
-मेरी संगठनात्मक यात्रा बूथ अध्यक्ष के रूप में शुरू हुई। इसके बाद मंडल अध्यक्ष, चिकित्सा प्रकोष्ठ में लंबे समय तक कार्य और फिर जिला उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली। सदस्यता अभियान में संयोजक के रूप में भी कार्य किया। इन सभी दायित्वों से जमीनी समझ विकसित हुई और कार्यकर्ताओं के मन को समझने का अवसर मिला। यह सीखने की प्रक्रिया आज भी जारी है।
इतने लंबे समय तक सक्रिय रहने के बावजूद प्रदेश स्तर की भूमिका नहीं मिली, क्या कभी निराशा हुई?
-बिल्कुल नहीं। निराशा मेरे स्वभाव में ही नहीं है। जिम्मेदारी मिले या न मिले, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। मेरे जैसे लोग पूर्णकालिक कार्यकर्ता होते हैं, उनके लिए पद मायने नहीं रखता। पार्टी आगे बढ़े और मजबूत हो, यही सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
प्रदेश कार्यसमिति सदस्य के रूप में आपकी प्राथमिकताएं क्या होंगी?
-मेरी प्राथमिकता हनुमानगढ़ जिले के कार्यकर्ताओं और प्रदेश नेतृत्व के बीच सेतु बनने की है। स्थानीय समस्याओं को नेतृत्व तक पहुंचाना और उनके समाधान के लिए प्रयास करना हमारा दायित्व है। हाल ही में मंडियों में गेहूं की सरकारी खरीद को लेकर जो समस्याएं थीं, उन्हें प्रदेश नेतृत्व और सरकार तक पहुंचाया गया, जिसका सकारात्मक परिणाम सामने आया। आगे भी यह प्रयास जारी रहेगा।
संगठन में नए और पुराने कार्यकर्ताओं के बीच संतुलन को आप कैसे देखते हैं?
-पार्टी समय-समय पर प्रशिक्षण शिविरों के माध्यम से वैचारिक स्पष्टता और संगठनात्मक अनुशासन पर काम करती है। पार्टी का विस्तार हुआ है, अन्य दलों से आए लोगों को भी पार्टी की नीति, रीति और विचारधारा से परिचित कराना आवश्यक होता है। नेतृत्व इसके लिए योजनाबद्ध कार्यक्रम बनाता है और हम उन्हें जमीन पर उतारने का प्रयास करते हैं।
उन कार्यकर्ताओं और आम लोगों को क्या संदेश देना चाहेंगे, जो राजनीति से निराश हो चुके हैं?
-किसी को भी निराश होने की आवश्यकता नहीं है। पार्टी के लिए निष्ठा से काम करते रहना चाहिए। नेतृत्व की दृष्टि में हर कार्यकर्ता का महत्व है। संगठन को मजबूत बनाना हम सबकी जिम्मेदारी है। उचित समय पर पार्टी अपने कार्यकर्ताओं के लिए सही निर्णय लेती है।







