




ग्राम सेतु डेस्क
प्रख्यात साहित्यकार विजयदान देथा बिज्जी के शताब्दी वर्ष के अवसर पर भारत सरकार को उनके सम्मान में स्मारक डाक टिकट जारी करना चाहिए। यह मांग राजस्थान साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. दुलाराम सहारण ने की है।
डॉ. सहारण ने कहा कि नोबल नामांकित, पद्मश्रीविजयदान देथा ने राजस्थानी लोककथाओं और लोकसंस्कृति को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई। उनकी रचनाओं में राजस्थान की मिट्टी की महक, लोकजीवन की संवेदनाएं और सामाजिक चेतना का अद्भुत समावेश देखने को मिलता है।
उन्होंने कहा कि ‘बातां री फुलवाड़ी’ जैसी कृतियां भारतीय लोक साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं। उनकी कहानियों ‘दुविधा’ एवं ‘पहेली’ फिल्म ने भी लोक साहित्य को व्यापक पहचान दिलाई।
डॉ. सहारण ने कहा कि विजयदान देथा (1926-2013) का शताब्दी वर्ष लोक साहित्य और राजस्थानी भाषा के सम्मान का अवसर है। ऐसे में भारत सरकार द्वारा उनके नाम से डाक टिकट जारी किया जाना उनके साहित्यिक अवदान के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी तथा नई पीढ़ी को उनके साहित्य से प्रेरणा मिलेगी।






