




ग्राम सेतु ब्यूरो.
हनुमानगढ़ में गेहूं की सरकारी खरीद अवधि बढ़ाने की मांग को लेकर किसानों का आक्रोश खुलकर सामने आ गया। सैकड़ों किसानों ने कलक्टर कार्यालय का घेराव कर दिया, जिससे इलाके में तनावपूर्ण माहौल बन गया। प्रशासन ने हालात को संभालने के लिए वार्ता का रास्ता अपनाया, लेकिन किसान अपनी मांगों पर अडिग नजर आए। उनका साफ कहना है कि जब तक खरीद की समय-सीमा और लक्ष्य नहीं बढ़ते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। पुराने जमाने की कहावत है, ‘पेट की आग तर्क नहीं सुनती।’ किसान भी उसी आग में तप रहे हैं।
किसानों का तर्क है कि इस बार मौसम और फसल चक्र के कारण बड़ी संख्या में किसान समय पर उपज मंडियों तक नहीं पहुंच पाए। सरकारी खरीद की समयावधि सीमित होने से बड़ी मात्रा में गेहूं खुले बाजार में औने-पौने दामों पर बेचना पड़ सकता है। किसानों का कहना है कि सरकार ने यदि पिछली बार की तरह लक्ष्य और अवधि में विस्तार किया, तो हजारों परिवारों को राहत मिलेगी। मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने बातचीत कर भीड़ को शांत करने की कोशिश की, लेकिन किसान प्रतिनिधियों ने दो टूक कहा कि लिखित आश्वासन के बिना वे पीछे नहीं हटेंगे।
इधर, जिले के राजनीतिक घटनाक्रम ने भी रफ्तार पकड़ ली है। भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेताओं का प्रतिनिधिमंडल जयपुर में डेरा डाले हुए है। जिलाध्यक्ष प्रमोद डेलू, भादरा विधायक संजीव बैनीवाल, पूर्व विधायक धर्मेन्द्र मोची, अभिषेक मटोरिया, गुरदीप सिंह शाहपीनी, हनुमानगढ़ सीट से भाजपा प्रत्याशी रहे अमित चौधरी और बीकानेर देहात जिला प्रभारी बलबीर बिश्नोई ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर जिले के किसानों की समस्याओं को विस्तार से रखा। राजनीति में अक्सर बातें हवा में उड़ जाती हैं, मगर इस बार मुलाकात के बाद संकेत कुछ ठोस दिखे।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से हुई इस मुलाकात में विशेष तौर पर गेहूं खरीद की सीमा बढ़ाने और समयावधि में विस्तार की मांग प्रमुख रही। भाजपा नेता अमित चौधरी ने ‘ग्राम सेतु डॉट कॉम’ से बातचीत में बताया कि मुख्यमंत्री ने किसानों के हित से जुड़े इस मुद्दे को गंभीरता से सुना और सकारात्मक आश्वासन दिया। अमित चौधरी के मुताबिक, आग्रह यह था कि गत वर्ष के लक्ष्य के अनुरूप खरीद की सीमा तय की जाए, ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने में किसी तरह की परेशानी न हो।
बीजेपी नेता अमित चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने गेहूं खरीद बढ़ाने का भरोसा दिया है और किसानों के हितों के प्रति उनकी संवेदनशीलता सराहनीय है। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री पहले भी किसान हित में कई अहम निर्णय ले चुके हैं और इस बार भी अन्नदाता के पक्ष में सहमति देकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। राजनीति में तारीफ अक्सर रणनीति का हिस्सा होती है, लेकिन किसानों को फिलहाल नतीजे चाहिए, बयान नहीं।
जिला प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और शांति व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है। पुलिस बल तैनात किया गया है, वहीं वरिष्ठ अधिकारी किसान नेताओं से संवाद में जुटे हैं। उम्मीद की जा रही है कि सरकार स्तर से निर्णय आते ही आंदोलन शांत हो जाएगा। दूसरी ओर, किसानों का साफ संदेश है, जब तक खरीद अवधि और लक्ष्य बढ़ाने की अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा।
कुल मिलाकर, हनुमानगढ़ में गेहूं खरीद का मुद्दा अब सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक दबाव का विषय बन चुका है। सरकार से सकारात्मक फैसले के संकेत जरूर हैं, लेकिन जमीन पर सुकून तब ही लौटेगा जब मंडियों में किसानों की उपज बिना अड़चन खरीदी जाएगी। आखिरकार, अन्नदाता खुश होगा तो ही व्यवस्था की फसल लहलहाएगी, बाकी सब भाषण हैं।








