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रक्षाबंधन के पावन पर्व पर जब देशभर में बहनें अपने भाइयों की कलाई पर प्रेम, विश्वास और रक्षा का धागा बांध रही हैं, वहीं देश की सीमाओं पर तैनात उन वीर जवानों को भी राखी का स्नेह मिले, जो अपने परिवारों से दूर रहकर मातृभूमि की रक्षा में डटे हैं। इसी भाव को आत्मसात करते हुए सशक्त नारी संस्थान की ओर से सीमा पर तैनात सैनिक भाइयों के लिए राखियां भेजी गईं।
संस्था की अध्यक्ष डॉ. मिताली अग्रवाल के नेतृत्व में संस्था की महिलाओं ने पूरे प्रेम, श्रद्धा और आत्मीयता के साथ राखियां तैयार कीं। इन राखियों के बहानें देश की बहनों का स्नेह, सैनिकों के प्रति सम्मान और उनके त्याग के लिए कृतज्ञता की भावनाएं भेजी गईं। राखियों को सीमा पर तैनात जवानों के लिए भेजा गया, ताकि रक्षाबंधन के दिन किसी सैनिक की कलाई अपनेपन के इस पवित्र धागे से वंचित न रहे।
इस सेवा कार्य में डॉ. मिताली अग्रवाल के साथ श्वेता बब्बर, बिंदु सोनी, शिमला गुप्ता, सरोज अग्रवाल, सीमा गुप्ता, मिली पाठक, कौशल्या वर्मा, नवीन, इंदु स्वामी, समेष्ता मटोरिया एवं गुंजन गजरा का सहयोग रहा।
डॉ. मिताली अग्रवाल ने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम का पर्व नहीं है, बल्कि यह सुरक्षा, विश्वास और अपनत्व की भावना का प्रतीक भी है। सीमा पर तैनात हमारे जवान अपने परिवारों से दूर रहकर देश की सुरक्षा में अपना सर्वस्व समर्पित करते हैं। ऐसे में उनके लिए राखी भेजना संस्था की बहनों के लिए केवल एक सामाजिक सेवा नहीं, बल्कि गर्व और भावनात्मक जुड़ाव का अवसर है।
डॉ. मिताली अग्रवाल ने कहा, ‘हमारी भेजी गई प्रत्येक राखी के साथ एक बहन का स्नेह और पूरे देश की ओर से वीर जवानों के प्रति सम्मान जुड़ा है। इस पहल का उद्देश्य जवानों को यह एहसास कराना है कि वे अपने परिवारों से भले ही दूर हों, लेकिन देश का हर नागरिक उनके साथ खड़ा है। सीमा पर खड़ा सैनिक जब अपनी कलाई पर बंधी राखी को देखता होगा तो उसे अपने घर की बहन की याद जरूर आती होगी। शायद उसे वह आंगन याद आता होगा, जहां हर साल बहन उसकी कलाई पर राखी बांधती थी। मां की आंखों का स्नेह, बहन की मुस्कान और घर की खुशियां उसकी आंखों के सामने तैर उठती होंगी। लेकिन उसी क्षण उसके भीतर यह विश्वास भी जागता है कि उसका अपना देश ही उसका सबसे बड़ा परिवार है।’
श्वेता बब्बर, बिंदु सिंह, शिमला गुप्ता, सराज अग्रवाल, सीमा गुप्ता, मिली पाठक, कौशल्या वर्मा, नवीन, इंदु स्वामी, समेष्ता मटोरिया व गुंजन गजरा आदि ने कहाकि रक्षाबंधन का यह धागा इसलिए खास है, क्योंकि इसके एक सिरे पर बहन का स्नेह है तो दूसरे सिरे पर देश की रक्षा का संकल्प। देश में रहने वाले भाई-बहन त्योहार की खुशियों में शामिल होते हैं, जबकि हमारे सैनिक उन खुशियों की रक्षा के लिए सीमा पर पहरा देते हैं। वे अपने परिवार की राखी का इंतजार छोड़कर करोड़ों परिवारों की सुरक्षा का दायित्व निभाते हैं।
सशक्त नारी संस्थान महिला एवं बाल कल्याण, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक सेवा और जरूरतमंदों के सहयोग के साथ-साथ देशहित से जुड़े कार्यों में भी निरंतर सक्रिय भूमिका निभा रहा है। सैनिकों के लिए राखियां भेजने की यह पहल इसी संवेदनशील और राष्ट्रहित की भावना को आगे बढ़ाती है। इस रक्षाबंधन पर सीमा की ओर भेजी गई प्रत्येक राखी मानो यही संदेश दे रही है, ‘भैया, आपकी कलाई दूर है, लेकिन हमारा स्नेह नहीं। आप सीमा पर डटे रहिए, पूरा देश आपके साथ खड़ा है।’ क्योंकि सैनिक की कलाई पर बंधी राखी सिर्फ धागा नहीं होती। उसमें एक बहन की दुआ, एक मां का आशीर्वाद और पूरे हिंदुस्तान का राष्ट्रप्रेम बंधा होता है।






