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शिक्षा किसी भी समाज की दिशा और दशा बदलने की सबसे मजबूत ताकत मानी जाती है। जब किसी संस्था की गतिविधियां केवल डिग्री और परीक्षा परिणामों तक सीमित न रहकर प्रतिभाओं को पहचानने, उन्हें प्रोत्साहित करने और समाज में शिक्षा के प्रति सकारात्मक वातावरण बनाने की कोशिश करती हैं, तो उसका प्रभाव संस्था की सीमाओं से बाहर भी दिखाई देता है। राजस्थान के बाड़मेर में आयोजित गौरवोत्सव प्रतिभा सम्मान समारोह 2026 में श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय हनुमानगढ़ की ऐसी ही पहल की झलक देखने को मिली। समारोह में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों और समाज के विभिन्न वर्गों की मौजूदगी ने यह संकेत दिया कि शिक्षा को लेकर सामुदायिक भागीदारी का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
एसकेडीयू के तत्वावधान में छात्र कल्याण क्लब ‘स्पंदन’ के अंतर्गत संचालित सद्भाव क्लब के संयोजन में महावीर टाउन हॉल, मधुबन कॉलोनी, लक्ष्मी नगर में समारोह आयोजित किया गया। इसमें दसवीं, बारहवीं और स्नातक स्तर पर 60 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले 1500 से अधिक मेधावी विद्यार्थियों को प्रशस्ति-पत्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। इसके अलावा वर्ष 2025 में सरकारी नौकरी में चयनित युवाओं तथा सरकारी और गैर सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों का भी सम्मान हुआ।
समारोह का महत्व केवल इस बात तक सीमित नहीं रहा कि कितने विद्यार्थियों को सम्मान मिला। इसके पीछे एक व्यापक संदेश भी दिखाई दिया, मेहनत करने वाले विद्यार्थियों को समय रहते पहचान और प्रोत्साहन मिले। प्रतियोगिता के इस दौर में अच्छे अंक निश्चित रूप से महत्वपूर्ण हैं, लेकिन विद्यार्थियों के व्यक्तित्व में अनुशासन, नैतिकता, आत्मविश्वास और सामाजिक जिम्मेदारी का विकास भी उतना ही जरूरी है। इसी सोच को समारोह के वक्ताओं ने भी रेखांकित किया। शिक्षा को केवल नौकरी हासिल करने का माध्यम मानने के बजाय उसे बेहतर नागरिक और जिम्मेदार व्यक्तित्व तैयार करने की प्रक्रिया के रूप में देखने पर जोर दिया गया।
श्री गुरु गोविंद सिंह चौरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष बाबूलाल जुनेजा ने कहा कि सफलता केवल अच्छे अंकों से हासिल नहीं होती। अनुशासन, सकारात्मक सोच, संस्कार और निरंतर परिश्रम सफलता की वास्तविक बुनियाद हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और कठिन परिस्थितियों में भी संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया।
बाबूलाल जुनेजा ने विद्यार्थियों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, जंक फूड से दूरी रखने और संतुलित खानपान पर ध्यान देने की सलाह भी दी। उनके संदेश में शिक्षा के साथ स्वास्थ्य और जीवनशैली को जोड़ने की कोशिश दिखाई दी, क्योंकि स्वस्थ शरीर और संतुलित जीवन भी बेहतर प्रदर्शन की आधारशिला है।
विश्वविद्यालय के प्रबंध निदेशक दिनेश कुमार जुनेजा ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और विस्तार की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि वर्तमान में 12 हजार से अधिक विद्यार्थी विश्वविद्यालय से जुड़े हैं, जिनमें विदेशी विद्यार्थी भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने योग के क्षेत्र में विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया है। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय स्तर का कृषि मेला भी आयोजित किया गया। खेलों के क्षेत्र में भी विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने 100 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पदक हासिल किए हैं।
दिनेश कुमार जुनेजा ने शिक्षा की भूमिका को व्यापक परिप्रेक्ष्य में रखते हुए कहा कि शिक्षा केवल डिग्री हासिल करने का माध्यम नहीं है। यह व्यक्तित्व निर्माण, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित करने का आधार है। यह दृष्टिकोण आज के बदलते शैक्षणिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण है, जहां विद्यार्थियों के सामने केवल परीक्षा में सफल होने की नहीं, बल्कि तेजी से बदलती दुनिया के साथ कदम मिलाने की चुनौती भी है।
मुख्य वक्ता सेवानिवृत्त आईजी गिरीश चावला ने भावी पीढ़ी को सम्मानित करने की पहल को सराहनीय बताया। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन, आत्मविश्वास और निरंतर सीखने की आदत विकसित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपने माता-पिता के संघर्ष, त्याग और मार्गदर्शन का सम्मान करना चाहिए। साथ ही समय के साथ स्वयं को अपडेट रखने की जरूरत पर जोर दिया। उनका संदेश स्पष्ट था कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में केवल वर्तमान ज्ञान पर्याप्त नहीं है। जो विद्यार्थी सीखने की प्रक्रिया को लगातार जारी रखते हैं, उनके लिए सफलता की संभावनाएं अधिक रहती हैं।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर एवं सरस्वती वंदना के साथ किया। स्थानीय बच्चों ने भाषण और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम को जीवंत बनाया। गुरुजनों और अभिभावकों की मौजूदगी ने समारोह को केवल पुरस्कार वितरण तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि इसे विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा और संवाद का मंच बनाया।
समारोह में रिटायर्ड आईजी गिरीश चावला, एसएचओ मनोज परिहार, मेजर डिफेंस एकेडमी के डायरेक्टर अशोक धारीवाल, विद्याभारती स्कूल के प्रधानाचार्य हीरालाल स्वामी, व्याख्याता सरोजदेवी, सहायक प्रोफेसर शंकर जाखड़, व्याख्याता अनवर खान और व्याख्याता ओमप्रकाश सहित शिक्षाविद्, समाजसेवी एवं गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। अतिथियों ने प्रतिभाओं को सम्मानित करने की विश्वविद्यालय की पहल की सराहना की। मंच संचालन अनिल जिज्ञासू व खेताराम जाणी ने किया।
गौरवोत्सव की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि इसमें उपलब्धि को केवल पुरस्कार तक सीमित नहीं रखा गया। 1500 से अधिक विद्यार्थियों को सम्मानित करना निश्चित रूप से बड़ा आयोजन है, लेकिन इसकी वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि यह सम्मान विद्यार्थियों को आगे और बेहतर करने के लिए कितनी प्रेरणा देता है।
श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय एवं सैनिक स्कूल हनुमानगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में पिछले कई वर्षों से प्रतिभा सम्मान समारोह आयोजित किया जा रहा है। ऐसे आयोजनों की निरंतरता यह बताती है कि प्रतिभा को पहचानना जितना जरूरी है, उससे कहीं अधिक जरूरी है प्रतिभा को आगे बढ़ने के लिए सही दिशा देना। बाड़मेर में आयोजित यह समारोह इसी दिशा में एक प्रयास के रूप में सामने आया, जहां अंकों के साथ संस्कार, अनुशासन, परिश्रम और जिम्मेदार नागरिक बनने की सीख को भी बराबर महत्व दिया गया।






