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राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने शासन सचिवालय में प्रदेश के युवा जिला कलेक्टरों के साथ महत्वपूर्ण बैठक कर शिक्षा, स्वास्थ्य, साइबर अपराध की रोकथाम, हरियालो राजस्थान अभियान और जल जीवन मिशन सहित कई अहम प्रशासनिक विषयों पर विस्तार से चर्चा की। इस बैठक में हनुमानगढ़ जिला कलेक्टर डॉ. खुशाल यादव भी शामिल हुए और जिले में चल रहे विकास कार्यों, योजनाओं के क्रियान्वयन तथा फील्ड स्तर की चुनौतियों को लेकर अपने अनुभव साझा किए।
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने जिला कलेक्टरों से विभिन्न सरकारी योजनाओं की जमीनी स्थिति, प्रशासनिक नवाचारों और आमजन को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर फीडबैक लिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जिला प्रशासन का केंद्र बिंदु हमेशा नागरिक होना चाहिए और शासन की संवेदनशीलता का अनुभव आमजन को हर स्तर पर होना चाहिए।
हनुमानगढ़ के जिला कलेक्टर डॉ. खुशाल यादव ने जिले में शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। बताया जा रहा है कि उन्होंने योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप किए जा रहे प्रशासनिक प्रयासों की जानकारी भी साझा की। युवा अधिकारियों में शामिल डॉ. यादव की सक्रिय कार्यशैली को देखते हुए बैठक में उनकी उपस्थिति को महत्वपूर्ण माना गया।
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि जिला कलेक्टरों को नियमित रूप से फील्ड में जाना चाहिए ताकि योजनाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके। उन्होंने कहा कि कार्यालयों में बैठकर मिलने वाली जानकारी और जमीन पर दिखाई देने वाली स्थिति में अंतर हो सकता है, इसलिए फील्ड विजिट प्रशासन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने अधिकारियों से स्थानीय समस्याओं को समझकर समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के विद्यालयों में सुरक्षित और मजबूत आधारभूत संरचना उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने जिला कलेक्टरों को स्कूलों का नियमित निरीक्षण करने, पेयजल, शौचालय, भवन और अन्य सुविधाओं की स्थिति की समीक्षा करने तथा कमियों को जल्द दूर करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार इस वर्ष स्कूलों के आधारभूत ढांचे को मजबूत बनाने के लिए करीब तीन हजार करोड़ रुपये का निवेश करेगी।
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी मुख्य सचिव ने विशेष जोर दिया। उन्होंने जिला कलेक्टरों को सीएमएचओ और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें करने के निर्देश दिए। खासतौर पर हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों की निगरानी, समय पर उपचार और अस्पतालों में आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया। उन्होंने बताया कि प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक चिकित्सा संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का प्रभावी समाधान संभव है।
साइबर अपराध की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए मुख्य सचिव ने जिला स्तरीय समितियों को सक्रिय रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि साइबर ठगी में इस्तेमाल हो रहे संदिग्ध बैंक खातों की पहचान कर उन पर त्वरित कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही पुलिस, बैंकिंग संस्थानों और अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर प्राप्त शिकायतों की नियमित समीक्षा करने और आमजन को साइबर अपराध से बचाव के प्रति जागरूक बनाने के लिए विशेष अभियान चलाने की आवश्यकता भी बताई। उनका कहना था कि जागरूकता ही साइबर अपराध के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है।
बैठक में हरियालो राजस्थान अभियान की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी देखभाल और संरक्षण भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने जिला प्रशासन को इस अभियान को जनभागीदारी से जोड़ने के निर्देश दिए ताकि लगाए गए पौधों का दीर्घकालिक संरक्षण सुनिश्चित हो सके।
इसके अलावा जल जीवन मिशन के तहत चल रहे कार्यों की प्रगति पर भी चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने पेयजल परियोजनाओं की गुणवत्ता और समयबद्धता पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने जिला कलेक्टरों को जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग सहित संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाकर फील्ड स्तर पर कार्यों की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए।
बैठक के अंत में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि जिला कलेक्टर प्रशासन की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं और उनकी सक्रियता का सीधा प्रभाव आमजन तक पहुंचने वाली सेवाओं की गुणवत्ता पर पड़ता है। उन्होंने युवा अधिकारियों, जिनमें हनुमानगढ़ के जिला कलेक्टर डॉ. खुशाल यादव भी शामिल थे, को तकनीक, नवाचार और बेहतर प्रशासनिक पद्धतियों का उपयोग कर नागरिक केंद्रित शासन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रेरित किया। इस महत्वपूर्ण बैठक में हनुमानगढ़ के अलावा अलवर, भरतपुर, दौसा, बीकानेर, जोधपुर और करौली के जिला कलेक्टर भी मौजूद रहे। बैठक को प्रदेश में बेहतर प्रशासन और जनसेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।






