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हनुमानगढ़ स्थित श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय परिसर में साइबर सुरक्षा जागरूकता को लेकर गजब का उत्साह और ऊर्जा देखने को मिली। डिजिटल युग के खतरों के खिलाफ जब सैकड़ों छात्र एक सुर में खड़े हुए, तो पूरा परिसर जागरूकता के रंग में रंग गया। कार्यक्रम का सबसे जीवंत और प्रभावशाली दृश्य वह था जब विद्यार्थियों ने कतारबद्ध होकर हेल्पलाइन नंबर ‘1930’ के आकार में विशाल मानव श्रृंखला बनाई, जिसने दूर से ही हर किसी का ध्यान खींचा। हाथों में साइबर सुरक्षा के नारों वाले जीवंत पोस्टर लिए युवाओं की सक्रियता ने स्पष्ट संदेश दिया कि तकनीक के इस दौर में समझदारी और सतर्कता ही साइबर ठगी से बचाव की सबसे मजबूत ढाल है।
एसकेडी विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी विभाग द्वारा साइबर पुलिस थाना, हनुमानगढ़ के सहयोग से एक दिवसीय साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ‘स्पंदन’ छात्र कल्याण क्लब के अधीनस्थ ‘सृजन’ क्लब के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को बढ़ते साइबर अपराधों के प्रति सचेत करना, सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के लिए प्रेरित करना तथा किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जानकारी देना था।
विद्यार्थियों में विषय की समझ विकसित करने के लिए विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन हुआ। पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में विभिन्न संकायों के करीब 40 विद्यार्थियों ने हिस्सा लेकर ऑनलाइन सुरक्षा, फिशिंग से बचाव, सोशल मीडिया की गोपनीयता और जिम्मेदार डिजिटल नागरिकता के महत्व को रंगों के माध्यम से कैनवस पर उकेरा। वहीं, कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई हेल्पलाइन नंबर ‘1930’ की अनूठी मानव श्रृंखला रही, जिसने आमजन को आपात स्थिति में तुरंत शिकायत दर्ज कराने के प्रति जागरूक किया।
बतौर मुख्य अतिथि एसपी बी. आदित्य ने कहा कि डिजिटल तकनीक के विस्तार के साथ साइबर ठगी के तौर-तरीके भी बेहद जटिल हो चुके हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि हर नागरिक को अपनी व्यक्तिगत व वित्तीय जानकारियों की सुरक्षा को लेकर हमेशा सतर्क रहना चाहिए। एसपी ने विद्यार्थियों को किसी भी संदिग्ध लिंक या अनजान ईमेल पर क्लिक न करने, बैंकिंग पासवर्ड व ओटीपी किसी के साथ साझा न करने और किसी भी धोखाधड़ी की स्थिति में तत्काल पुलिस व हेल्पलाइन पर सूचना देने के निर्देश दिए।
डीएसपी (साइबर) करण सिंह ने स्टूडेंट्स को ऑनलाइन फ्रॉड के मनोवैज्ञानिक पहलुओं से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि पैसा कमाने का कोई शॉर्टकट नहीं होता। रातों-रात अमीर बनाने का लालच देने वाले अधिकांश ऑनलाइन प्रस्ताव अवैध गतिविधियों या संगठित ठगी का हिस्सा होते हैं। उन्होंने युवाओं को किसी भी आकर्षक ऑफर की वास्तविकता जांचे बिना भरोसा न करने की सलाह दी। इस दौरान साइबर विशेषज्ञ केंद्र प्रताप सिंह, रिंकल गर्ग और एएसआई विजय आनंद ने फिशिंग, सोशल मीडिया अकाउंट हैकिंग, ओटीपी और बैंकिंग फ्रॉड से जुड़े व्यावहारिक मामलों पर तकनीकी मार्गदर्शन दिया।
श्री गुरु गोबिंद सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष बाबूलाल जुनेजा ने कहा कि युवा वर्ग डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का सबसे प्रमुख उपयोगकर्ता है, इसलिए उनमें साइबर नियमों की स्पष्ट समझ होना अनिवार्य है। थोड़ी सी भी लापरवाही गंभीर नुकसान का कारण बन सकती है।
विश्वविद्यालय के प्रबंध निदेशक (एमडी) दिनेश कुमार जुनेजा ने कहा कि साइबर सुरक्षा केवल पुलिस तंत्र तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह हर एक डिजिटल नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने आश्वस्त किया कि संस्थान छात्रों को समय की मांग के अनुरूप जागरूक रखने के लिए ऐसे प्रशिक्षण सत्र जारी रखेगा।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्रो-चांसलर प्रो. (डॉ.) अमरजीत सिंह, रजिस्ट्रार डॉ. मयंक माथुर, आईक्यूएसी निदेशक डॉ. अवधेश शर्मा तथा डॉ. विक्रम सिंह औलख सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी व प्राध्यापक मौजूद रहे।
कार्यक्रम का कुशल समन्वय फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के विभागाध्यक्ष डॉ. कुलवंत सिंह द्वारा किया गया। आयोजन को सफल बनाने में समन्वयक विक्रम मंगवाना, सुमित कुमार, राजविंदर सिंह, नितिन मीणा और सूरज सिंह की सक्रिय भूमिका रही। एनएसएस समन्वयक डॉ. पुनिका भादू व मदन लाल शर्मा ने छात्रों को समाज में साइबर सुरक्षा दूत बनकर संदेश फैलाने का आह्वान किया। मंच संचालन मनमीत कौर ने किया। अंत में विद्यार्थियों ने सुरक्षित डिजिटल आदतों को अपनी दिनचर्या में अपनाने और समाज को जागरूक करने का संकल्प लिया।





