




ग्राम सेतु डॉट कॉम
घर का कमरा था, खाने की थालियां सजी थीं और माहौल किसी पारिवारिक उत्सव से कम नहीं था। फर्क सिर्फ इतना था कि इस दावत के मेहमान कोई रिश्तेदार या राजनीतिक परिचित नहीं, बल्कि शहर की गलियों और नालियों को साफ रखने वाले सफाईकर्मी थे। भाजपा नेता व पार्षद सुरेंद्र सिंह शेखावत ने दीपोत्सव की रौनक शुरू होने से पहले इन सफाईकर्मियों को अपने घर आमंत्रित किया। सभी को अपने साथ बैठाकर भोजन किया। शेखावत की धर्मपत्नी ने खुद आगे बढ़कर भोजन परोसा और मेहमानों की आवभगत की। भोजन की यह थाली सिर्फ खाने तक सीमित नहीं थी, इसमें सम्मान, आत्मीयता और सामाजिक बराबरी का संदेश भी शामिल था।
बीकानेर के वार्ड संख्या 13 से पार्षद सुरेंद्र सिंह शेखावत का यह कदम अब शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। महापौर पद के लिए भाजपा ने उन्हें अपना प्रत्याशी बनाया था, लेकिन चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिल सकी। इसके बावजूद वे अपने अलग अंदाज और व्यवहार के कारण एक बार फिर सुर्खियों में हैं। अपने आचरण में गांधीवादी मूल्यों को महत्व देने वाले शेखावत ने दीपोत्सव से पहले सफाईकर्मियों के साथ भोजन कर सामाजिक समरसता का संदेश देने की कोशिश की।
इस आयोजन की खासियत यह रही कि शेखावत परिवार ने सफाईकर्मियों को केवल भोजन के लिए आमंत्रित नहीं किया, बल्कि उन्हें परिवार के सदस्य की तरह सम्मान दिया। भोजन के दौरान पारिवारिक विषयों के साथ-साथ शहर, वार्ड और सफाई व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी खुलकर बातचीत हुई। शेखावत ने सफाईकर्मियों की दिनचर्या, उनके परिवार और कामकाज की परिस्थितियों के बारे में जानकारी ली। आमतौर पर सफाईकर्मियों से लोगों का संपर्क उस समय होता है, जब वे गलियों, सड़कों और नालियों की सफाई करते दिखाई देते हैं। लेकिन उनके जीवन, पारिवारिक परिस्थितियों और काम के दौरान आने वाली परेशानियों को जानने की पहल कम ही देखने को मिलती है। शेखावत ने इस दूरी को कम करने का प्रयास किया।

बातचीत के दौरान सफाईकर्मियों ने अपनी समस्याएं भी खुलकर रखीं। उन्होंने बताया कि शहर के वार्डों में आबादी लगातार बढ़ रही है, लेकिन उस अनुपात में सफाईकर्मियों की संख्या नहीं बढ़ी। नतीजतन सीमित कर्मचारियों पर अधिक क्षेत्र की सफाई का दबाव रहता है। काम का बोझ बढ़ने से उनकी दिनचर्या प्रभावित होती है और कई बार निर्धारित समय में पूरे क्षेत्र की सफाई करना चुनौती बन जाता है।
सफाईकर्मियों ने सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि नालियों और गंदगी के बीच काम करते समय मास्क, दस्ताने, जूते और निर्धारित वर्दी जैसे जरूरी संसाधन मिलने चाहिए। सफाई का काम केवल शारीरिक श्रम नहीं, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों से भी जुड़ा है। ऐसे में सुरक्षा उपकरणों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है। उनकी बातों से स्पष्ट था कि उन्हें केवल सहानुभूति नहीं, बल्कि काम की बेहतर परिस्थितियां और बुनियादी सुविधाएं भी चाहिए। सफाईकर्मियों की इन समस्याओं ने आयोजन को एक सामाजिक संवाद का रूप दे दिया।
भाजपा नेता सुरेंद्र सिंह शेखावत ने सफाईकर्मियों के योगदान पर फोकस करते हुए कहा कि ये लोग समाज के असली हीरो हैं। जब अधिकांश लोग सुबह अपने घरों में होते हैं, तब ये सफाईकर्मी गलियों, सड़कों और नालियों की सफाई में जुट जाते हैं। इनके श्रम से ही शहर स्वच्छ और रहने योग्य बनता है। ये स्वच्छता के प्रहरी हैं और इनके योगदान को कभी कम करके नहीं आंकना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में हर व्यक्ति का अपना महत्व है। किसी के काम को छोटा या बड़ा मानने के बजाय उसके श्रम और योगदान का सम्मान करना चाहिए। सफाईकर्मियों को अपने परिवार का हिस्सा मानने की जरूरत है। उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार करना केवल किसी विशेष अवसर की औपचारिकता नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
शेखावत परिवार की ओर से मिले सम्मान और आत्मीयता ने सफाईकर्मियों को भावुक कर दिया। उनके लिए यह अनुभव सामान्य भोज से अलग था। काम के दौरान जिन लोगों के बीच वे रोजाना रहते हैं, उनमें से किसी जनप्रतिनिधि के घर जाकर परिवार के साथ बैठकर भोजन करना उनके लिए नया अनुभव था। सफाईकर्मियों ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें पहली बार इस तरह घर बुलाकर परिवार के सदस्य जैसा सम्मान दिया गया है।
राजनीति में अक्सर सामाजिक समरसता, समानता और श्रम के सम्मान की बातें मंचों से सुनाई देती हैं। लेकिन इन विचारों को रोजमर्रा के व्यवहार में उतारना अधिक महत्वपूर्ण है। सुरेंद्र सिंह शेखावत की इस पहल को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। गांधीवादी विचारधारा में श्रम की प्रतिष्ठा, समानता और अंतिम व्यक्ति के सम्मान को विशेष स्थान दिया गया है। उल्लेखनीय है कि डॉ. सुरेंद्र सिंह शेखावत ने गांधीवाद पर शोध किया है और अब वे उसे जीवन में उतारकर ज्ञान को परिलक्षित कर रहे हैं।





