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हनुमानगढ़ जंक्शन में वाशिंग लाइन की मांग पूरी होने के बाद अब दूरस्थ क्षेत्रों के लिए सीधी रेल सेवा की उम्मीदें भी परवान चढ़ने लगी हैं। मुंबई रूट के लिए रेलगाड़ियों का संचालन शुरू होना क्षेत्र के यात्रियों के लिए राहत की बात है, लेकिन पूर्वांचल और मिथिलांचल सहित देश के अन्य हिस्सों तक सीधी रेल कनेक्टिविटी का इंतजार अब भी बरकरार है। रेलवे की ओर से हाल ही में हनुमानगढ़-पटना-हनुमानगढ़ साप्ताहिक स्पेशल रेलसेवा शुरू करने की घोषणा ने इस दिशा में उम्मीद जगाई है। इस घोषणा से पूर्वांचल मूल के लोगों के साथ-साथ सिक्ख समुदाय में भी खुशी का माहौल है, क्योंकि सिक्ख बाहुल्य क्षेत्र के लोग पटना साहिब जाते रहते हैं। हालांकि, यात्रियों और सामाजिक संगठनों की मांग है कि इस रेलसेवा को अस्थायी के बजाय स्थायी किया जाए और पटना से आगे जयनगर तक इसका विस्तार किया जाए।
हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जिले में मिथिलांचल मूल के हजारों लोग निवास करते हैं। रोजगार और व्यवसाय के सिलसिले में यहां बसे इन लोगों का अपने मूल क्षेत्र से लगातार आवागमन बना रहता है। ऐसे में बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र तक सीधी रेल सेवा की उपलब्धता लंबे समय से एक महत्वपूर्ण मांग रही है। नई रेलसेवा की घोषणा से लोगों को उम्मीद है कि अब इस मांग को भी गंभीरता से लिया जाएगा।
राजस्थान पूर्वांचल समिति के प्रदेशाध्यक्ष विजय सिंह चौहान का कहना है कि हनुमानगढ़-पटना साप्ताहिक स्पेशल रेलसेवा शुरू करने का निर्णय स्वागतयोग्य है, लेकिन यात्रियों की वास्तविक जरूरत को देखते हुए इसे पटना से आगे मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी होते हुए जयनगर तक विस्तारित किया जाना चाहिए। साथ ही इस रेलसेवा को स्थायी करने की दिशा में भी प्रयास होने चाहिए।
चौहान के अनुसार, हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जिले में मिथिलांचल मूल के करीब 40 हजार लोग रहते हैं। इनके लिए बिहार के विभिन्न क्षेत्रों तक सीधी रेल सेवा उपलब्ध होना बेहद जरूरी है। वर्तमान में अवध असम एक्सप्रेस ही इस क्षेत्र के यात्रियों के लिए प्रमुख विकल्प है। इस रेलगाड़ी में टिकटों को लेकर मारामारी रहती है। वहीं, दरभंगा और मधुबनी जाने वाले यात्रियों को समस्तीपुर से आगे दूसरे रेल या बस साधन का सहारा लेना पड़ता है। इससे यात्रियों को अतिरिक्त समय और धन खर्च करना पड़ता है।
राजस्थान मैथिल ब्राह्मण परिषद के अध्यक्ष एडवोकेट देवकीनंदन चौधरी भी इस मांग का समर्थन करते हैं। उनका कहना है कि मिथिलांचल क्षेत्र के लिए सीधी रेल सेवा की मांग वर्षों से उठाई जा रही है, लेकिन जनप्रतिनिधियों ने इसे मजबूती के साथ संबंधित मंचों पर नहीं रखा। यही वजह है कि हजारों लोगों की जरूरत होने के बावजूद इस दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो सकी।
चौधरी के मुताबिक, हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर में मिथिलांचल मूल के बड़ी संख्या में लोग रहते हैं। उन्हें अपने परिवारों से मिलने, सामाजिक और धार्मिक आयोजनों में शामिल होने तथा अन्य आवश्यक कार्यों के लिए बिहार जाना पड़ता है। ऐसे में सीधी रेल सेवा केवल सुविधा का विषय नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की जरूरत है।
ज्ञापन दिए, अब ठोस निर्णय का इंतजार
मिथिला सेवा समिति के बलदेव दास का कहना है कि संगठन की ओर से कई बार जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन देकर इस मांग से अवगत करवाया गया है, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। उनका कहना है कि सरकार को मिथिलांचल मूल के लोगों की समस्याओं को महसूस करते हुए इस दिशा में उचित कदम उठाने चाहिए।
गौरतलब है कि हनुमानगढ़-श्रीगंगानगर संसदीय क्षेत्र में मिथिलांचल मूल के हजारों लोग निवास करते हैं। ये लोग क्षेत्र के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। ऐसे में हनुमानगढ़ से बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र तक सीधी रेल सेवा शुरू होने से न केवल यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि क्षेत्र के विभिन्न समुदायों के बीच सामाजिक और सांस्कृतिक संपर्क भी मजबूत होगा।
वाशिंग लाइन की सुविधा और मुंबई रूट पर रेलगाड़ियों के संचालन के बाद अब हनुमानगढ़ के यात्रियों की निगाहें पूर्वांचल और मिथिलांचल की रेल कनेक्टिविटी पर टिकी हैं। हनुमानगढ़-पटना साप्ताहिक स्पेशल रेलसेवा को स्थायी करने और जयनगर तक विस्तारित करने की मांग इसी उम्मीद को सामने रखती है कि क्षेत्र को जल्द ही एक और महत्वपूर्ण रेल सुविधा मिल सकेगी।









बहुत ही अच्छा है, बहुत से लोगों की आवश्यकता है, लगातार मांग उठा रहे हैं, रेलवे विभाग को इस दिशा में गाड़ी चलानी चाहिए