





रूंख भायला
राजी राखै रामजी ! आज बात घरबिध री, घरबिध में बातां री कमी कठै! सोधण री दरकार ई कोनी, मतैई सामीं आवै। कदैई-कदैई तो इसी आवै कै घर री भींतां ई नीं ढाब सकै बात नै, घर सूं गळी-बास पूगी अर पूगी…। फेर कद ढबै बा, पांख लाग जावै उण बात रै। आछी हो भलंई माड़ी, बात रै पांख लाग्यां तो उडारी इसी भरै कै फेर लोग ई देखै।
नीं जचौ तो चेतै करो दिखाण…..। पांच-सात साल पैली गोलूआळै गांम में अेक धणी आपणी धणियाणी नै सरपंची रै चुनाव में खड़ी करी ही, बो लाई आपरी बोलेरो में पीळीबंगां जावै हो, जावती बेळा बो फेसबुक पर लाइव होग्यो अर आपरी धणियाणी नै बोट री अपील सारू कैयोे, अबै धणियाणी तो धणियाणी, बा लायण कद फेसबुक लाइव रा सांगा देख्या हा, बोली ‘के कैवूं……के कैवूं !’ इत्तै में तो धणी रिसाणो होग्यो अर दोनूं बैसबाजी करण लाग्या, गाळमगाळा…., धणी भूल ई ग्यो कै लाइव चालै, सै तमासो देखै। आखै जगत में बा रील वायरल होगी, फजीती होई जिकी न्यारी। बा रील अजेस ई लारो कोनी छोड्यो बां धणी लुगायां रो, जद-जद देस में चुनाव मंडै, सोशियल मीडिया पर सामीं आय’र उभी हो जावै। तत ओ है कै बात बण्या पछै कद ढबै !
स्याणा लोग जणाई कैवै, घर री बात नै घर में ई सलटणो चाहिजै। किणी दूजै नै धिंगाणिया पंचायती रो मौको नीं देवणो चाहिजै, नीं पछै बात रो रंग अर रूप सो बदळ जावै। धणी लुगाई री बात होवै का सासू बीनणी री बात, भायां री बात होवै का पछै लुगायां री बात, तीजै री पंचायती बात रो सलटारो कम करै, उण नै बिगाड़ै जादा। आपरा पोत दूजां सामीं नीं देवणा, आ ई स्याणप होवै।
हथाई रै पेटै आपणै लोक री अेक ठावी बात चेतै आई है, आप ई बांचो दिखाण-
बात इयां ही कै अेक बन में गादड़ गादड़ी रैवता। अेक दिन दोनूं पाणी पीवण सारू जंगळ री तळाई कन्नै पूग्या। भाग इस्या निबळा, कै सामीं सिंघ त्यार, जाणै बान्नै ई उडीकतो होवै। आज तो जीमण चाल’र आयो है। गादड़ रै होठां पर तो फेफी आयगी, आज तो पजग्या। गादड़ी कीं चातर ही। सिंघ सामीं जाय’र मुजरो कर यो, अर बोली-‘जेठजी, म्हारो न्याव करो ! ओ गादड़ कैवै, म्हारै साथै इणरो निभाव नीं होवै, न्यारो होवण री करै। म्हारै तीन टाबर है, म्हूं कैवूं, दो म्हूं राखसूं, अेक थूं ले लै। पण ओ लोईपीवणो कैवै, टाबर बाप रा होवै, म्हूं दो राखसूं।’
गादड़ गादड़ी री स्याणप जाणग्यो, होसलै सूं बोल्यो, ‘माई बाप, थे जंगळ रा राजा, थे ई बतावो मा रो हक जादा होवै का बाप रो ?’
गादड़ी बिच्चाळै बोली, बाइया ना बक….म्हूं तीनूं टाबरां नै अठैई ले आवूं, जेेठजी न्याव कर देसी।’
सिंघ मन में सोच्यो, आज तो बिधना भली तूठी है। दो तीन दिनां रो जीमण भेळो ई भेज रैयी है, कंवळो मांस खाया कई दिन होग्या…। बो गादड़ी सूं बोल्यो-
‘ठीक है, थूं टाबरां नै लेय’र आ, म्हूं बान्नै देख’र साचो न्याव कर देस्यूं।’ गादड़ी पाणी पीय’र जावती रैयी, घणी ताळ होगी। गादड़ी पाछी क्यूं आवै, गादड़ बोल्यो-
‘म्हाराज, गादड़ी टैम घणो लगावै है नीं, मन्नै लागै उण रै मन में खोट आग्यो, बा दो टाबर राखणा चावै, जे थे हुकम देवो तो म्हूं उण रांड रा झींटा झाल’र सणै टाबरां अठै लेय’र आवूं !’
सिंघ तो आप उडीक में आखतो होयोड़ो हो, झट सूं बोल्यो-‘बेगो सो जा अर लेय’र आ उण लखणां री लाडी नै…., टाबरां नै भूल नां जाई !’
गादड़ ई पाणी पीय’र घूरी रो मारग लियो। तळाई सारै ठाकर बण्यो सिंघ उडीकतो रैयो, घणी झूंझळ आवण लागी तो बो गादड़ री घूरी कान्नी चाल पड़्यो। मारग में जीमण रा सुपनां लेवतो जावै। घूरी पूग’र हेला पाड़्यो-‘अरे गादड़ी, कांई होयो भई ? बेगी सी तीनूं टाबरां नै बारै लेय’र आ, म्हूं थारो अर गादड़ री रांद रो सलटारो कर दूं !’
गादड़ी घूरी मांय सूं बोली-‘जेठजी, थे आवण रा फोड़ा क्यूं देख्या, म्हे तो ‘घर रा घर में सलट लिया’ ! ओ गैलसप्पो कैवै, म्हूं दो टाबर लेस्यूं ! कांई करूं, इण नै दो दे देस्यूं अर म्हूं अेक ई राख लेस्यूं। आप घरां पधारो !’
सिंघ आपरो मूंडो छा सो लेय’र रैयग्यो।
आज री हथाई रो सार ओ है, कै छोटी मोटी बात सगळै घरां में होवै। स्याणप इण में होवै कै उण नै आपां घरोघरी सलट लेवां, दूजां रै हाथ में आपणी चोटी क्यूं देवणी ! कड़ूम्बै का पाड़ौस नै पंचायती सारू बुलास्यो तो हेठी आपरी इज होसी। बाकी बातां आगली हथाई में। आपरो ध्यान राखो, रसो अर बसो….।
-लेखक राजस्थानी व हिंदी साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर हैं







