



रूंख भायला
राजी राखै रामजी ! आज बात चुणाव री। चुणाव तो होग्या, अबै तो बात ‘रिजल्ट’ री करो ! रिजल्ट तो आयोड़ो ई है लाडी, चालणी मांयला बेज सामीं दीसै। थे तो आ बतावो, बिना भण्यां परीक्षा देवण में सार कठै ! पछै रिजल्ट नै उडीकणो तो साव गैलापणो है…पोत तो आयोड़ा ई है।
तोई, कीं तो आस जागै ई है चुनाव सूं…, सै’रां में नवी सरकार बणसी, गळी-बास में नवा पार्षद मिलसी। थोडै़’क दिनां में गांमां में ई चुनाव होसी, नवा पंच-सरपंच, नवा परधान अर नवा प्रमुख बणसी, घणो नीं तो, कीं तो करसी, सरमा मरता…।
सरम स्यार जाणो ई हो के ! जद थे ई कोनी करी, तो दूजां सूं उम्मीद क्यूं ?
के कोनी करी ? सीधा आवां, सीधा जावां, बैन नै बैन, अर बेटी नै बेटी मानां, पराई राड़ में को पड़ां नीं, और पछै के होवै सरम !
इत्ती कोनी होवै सरम, सरम तो इण बात री भी होवै कै जिण धरती, जिण देस रा जाया जलम्या हो, उणरी भी तत लेवो, आपरी रोट्यां हेठै तो खीरा सगळा ई देवै लाडी। इत्तो ई सोचो दिखाण कै निकाय चुणाव में बोट कित्ता पड़्या…72 फीसद….। इण रो मतलब सौ में सूं अट्ठाइस जणां तो बोट दिया ई कोनी, कीं तो सरम करणी चाहिजै बान्नै।
हो सकै है बान्नै कोई काम होग्यो होवै !
बोट घालणो तो काम ई कोनी…., पांच बरस में अेकर काम पड़ै है लाडी ! इत्तो ई नीं करो तो धूड़ है थारै काम नै। लोकराज में सैं सूं बेसी सिकायत ई बै करै जिका बोट घालण ई नीं जावै।
अर घालै जिका ! बै तो सरमबायरा है के !!
कीं तो है ई, आपरो धरम निभावै। पण जिका आदमी री ठौड़ झंडा नै बोट घालै, बै तो पांच बरस तंई झंडू ई बणै इण में कोई सक नीं। जे बै मजबूत पगां रो आदमी देख’र बोटड़ा देवै तो कीं आस राखण रा हकदार है।
पण पग अर पाग रैयी कठै है ! अबार तो चौफेर तका लेवो, अेक ई बात समझ आवै। ‘हाथ नै हाथ खावै, फूल नै फूल’। हर पारटी में कमोबेस ओ ई हाल है। पारटी रा लोग ई पारटी नै तेलो दे रैया है, अेक वार्ड में चार-चार बागी। बां रै मुजब म्है तो पारटी रा जलमजात कार्यकर्ता हां…., बरसां लग खेचळ खाई पारटी सारू। पण म्है टिगट मांगी तो बेटा ठगी करग्या, म्हारी पांती किणी दूजै नै…. अबै जिता लेवै दिखाण ! भाई मरयै रो दुख कोनी, भौजाई रा नखरा झड़णा चाहिजै।
पारटी आळा ई किस्या गऊ रा जायोड़ा है ! है तो बै आं मांयला ई, आपरा सिट्टा सेकणा चावै, चढावै लियां बिना कद मानै। पार्षद सूं लेय’र विधायक, मंतरी, मुख्यमंत्री सणै परधान मंतरी सगळां रा न्यारा न्यारा ‘गोळ’ है, कामना है, जणाई बै तो टिगट आपरै ‘गोळ’ रै हिसाब सूं बांटै। हार-जीत सूं बेसी बान्नै तो आपरै कद अर पद री चिंता घणी होवै। इसी घाळमेळ में ठाह ई नीं पड़ै, कुण कीं रै साथै है, कुण किन्नै डखळी दे रैयो है। इस्यै चुणावां सूं रिजल्ट री आस राखण में सार कोनी लाडी..!
बाड़ाबंदी रा समचार तो थां कन्नै ई पूग्या होसी। बोट घलतां ई आपरै आदम्यां नै बाड़ां में पूगाणो पारट्यां रो पैलो काम…, कोई धार नीं दे जावै, कात्यो कुतायो कपास नीं हो जावै। रिजल्ट आवण तंई तो ओ धन सामणो ई पड़सी। बोट मांगती बेळा पारट्यां रा जिका झंडाबरदार लाम्बी-लाम्बी फैंकै हा, बै तो आं बाड़ां में पड़्या लमलेट हो रैया है, जेकर बां री बातां सुणल्यो तो लागैला, अे मडां रा पूत तो सांचाणी सूरड़्यां दांई कादै में रम-रम राजी हो रैया है, कीचड़ उछाळ रैया है। थे रिजल्ट नै उडीको भलंई, अे तो आपरै भाग रो छींको टूटण री आस लगायां बैठ्या है, आं सूं आस लगाणी बेमानी है। ताबै लागतां ई अे तो आपरा घोघा भरसी, थारी पांती कठै ! जेकर ‘होर्सट्रेडिंग’ री रम्मत सरू होयी तो कुण कित्तै में बिकसी, ओ अंदाजो लगाबो करो।
खरी बात आ है कै लोकराज री नींव होवै चुणाव, पण आज घड़ी इत्ता बिडरूप होग्या कै लोग कैवण लाग्या है, ‘ओ काम लूंठै अर डेढ हुंस्यार लोगां रो है, स्याणां तो इण सूं चार पग दूर चालै !’ मतदाता अर प्रत्याशी दोनूं सरमबायरा है, आपरो धरम ई भूलग्या। दोनां में सूं जे अेक ई पग रोप लेवै तो कीं आस बंधै, पण रोपै कुण ओ यक्ष सवाल है।
आपां औतारां पर जादा भरोसा करां, सोचां रामजी का किरसनजी आवैला अर आपरै अेक इसारै भर सूं आपणा दुख दाळद मेट देसी, पण ओ सोचणो गैलापणो है। भगवानजी तो आपनै सोचण सारू मत दे दी, भोड दे दियो, अबै काम में लेवो उण नै…आपरा भीरी आप बणो।
आज री हथाई रो सार ओ है, का तो मतदाता होवण री सरम राखो, का पछै कुटीजणै रो होसलो, नीं पछै गांगरथ में सार ई के ! तो बाकी बातां आगली हथाई में। आपरो ध्यान राखो, रसो अर बसो…।
-लेखक राजस्थानी व हिंदी साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर हैं






