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राजस्थान के हनुमानगढ़ जैसे शहर में अब शिक्षा का दायरा स्थानीय और राष्ट्रीय सीमाओं से आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने लगा है। इसका ताजा उदाहरण श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय यानी एसकेडीयू में देखने को मिला है, जहां पापुआ न्यू गिनी की छात्रा बोनी कैरेन विधि संकाय में बीए-एलएलबी प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रही हैं। विदेशी विद्यार्थी का विधि शिक्षा के लिए विश्वविद्यालय से जुड़ना न केवल संस्थान के लिए गौरव का विषय है, बल्कि हनुमानगढ़ के शैक्षणिक परिदृश्य के बदलते स्वरूप का भी संकेत माना जा रहा है।
विश्वविद्यालय के विधि संकाय में आयोजित एक विशेष शैक्षणिक संवाद में बोनी कैरेन ने भारत और पापुआ न्यू गिनी की शिक्षा व्यवस्था को लेकर अपने अनुभव विद्यार्थियों के साथ साझा किए। उन्होंने दोनों देशों की शिक्षण एवं अधिगम प्रक्रिया, कक्षाओं में विद्यार्थियों की सहभागिता, व्यावहारिक शिक्षा, परीक्षा प्रणाली और शैक्षणिक वातावरण के बारे में विस्तार से चर्चा की।
इस संवाद की खास बात यह रही कि यहां केवल एक विदेशी विद्यार्थी अपने अनुभव साझा नहीं कर रही थीं, बल्कि भारतीय विद्यार्थियों को भी एक अलग देश की शिक्षा व्यवस्था को प्रत्यक्ष अनुभव के आधार पर समझने का अवसर मिला। विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ संवाद में भाग लिया और पापुआ न्यू गिनी की शिक्षा प्रणाली, वहां के विद्यार्थी जीवन, उच्च शिक्षा के अवसरों तथा शिक्षण पद्धति से जुड़े विभिन्न सवाल पूछे।
बोनी कैरेन का विश्वविद्यालय में अध्ययन भारतीय विद्यार्थियों के लिए किसी अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंज कार्यक्रम से कम अनुभव नहीं है। एक ही कक्षा और परिसर में अलग-अलग देश, संस्कृति और शैक्षणिक पृष्ठभूमि से आए विद्यार्थी साथ पढ़ रहे हैं। इससे विद्यार्थियों को किताबों और पाठ्यक्रम से बाहर निकलकर दुनिया को करीब से समझने का अवसर मिल रहा है।
विधि शिक्षा के संदर्भ में इस तरह का अंतरराष्ट्रीय वातावरण और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कानून अब केवल किसी एक देश की सीमाओं तक सीमित विषय नहीं रह गया है। अंतरराष्ट्रीय संबंधों, मानवाधिकार, व्यापार, साइबर कानून और वैश्विक स्तर पर होने वाले कानूनी बदलावों ने विधि के विद्यार्थियों के लिए अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण को जरूरी बना दिया है। ऐसे में विदेशी विद्यार्थी के साथ पढ़ना भारतीय विद्यार्थियों के लिए तुलनात्मक विधि और अंतरराष्ट्रीय विधिक व्यवस्था को समझने का व्यावहारिक अवसर प्रदान कर सकता है।
बोनी कैरेन की मौजूदगी का प्रभाव केवल कक्षा तक सीमित नहीं है। विश्वविद्यालय परिसर में विद्यार्थियों को पापुआ न्यू गिनी की संस्कृति, समाज और विद्यार्थी जीवन को समझने का अवसर मिल रहा है। वहीं विदेशी विद्यार्थी को भी भारत की शिक्षा व्यवस्था, सामाजिक विविधता और भारतीय विश्वविद्यालयी वातावरण को करीब से जानने का मौका मिल रहा है।
इस तरह का संवाद विद्यार्थियों के दृष्टिकोण को व्यापक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अलग-अलग पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों के बीच होने वाला संवाद पूर्वाग्रहों को कम करने और दूसरे समाजों को समझने की क्षमता विकसित करने में मदद करता है।
श्री गुरु गोबिंद सिंह चौरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष बाबूलाल जुनेजा ने कहा कि विदेशी विद्यार्थियों का विश्वविद्यालय से जुड़ना संस्थान के लिए गौरव की बात है। इससे विश्वविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण में विविधता आती है और भारतीय विद्यार्थियों को विभिन्न देशों की शिक्षा एवं संस्कृति को समझने का अवसर मिलता है।
विश्वविद्यालय के प्रबंध निदेशक दिनेश कुमार जुनेजा ने कहा कि विदेशी विद्यार्थियों का विधि संकाय में अध्ययन करना विश्वविद्यालय की बढ़ती वैश्विक शैक्षणिक पहुंच का सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा कि विधि संकाय का उद्देश्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण विधि शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण और व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना है।
वहीं डॉ. मेहरा ने कहा कि विदेशी विद्यार्थियों की उपस्थिति से भारतीय विद्यार्थियों को अपने ही विश्वविद्यालय परिसर में अंतरराष्ट्रीय स्तर का शैक्षणिक और सांस्कृतिक अनुभव मिल रहा है। यह विधि संकाय को व्यापक वैश्विक शैक्षणिक वातावरण की ओर ले जाने वाला महत्वपूर्ण कदम है।
पापुआ न्यू गिनी की बोनी कैरेन का हनुमानगढ़ आकर विधि शिक्षा प्राप्त करना इस बात का संकेत है कि छोटे शहरों के विश्वविद्यालय भी अब अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों के लिए विकल्प बन सकते हैं। यह केवल एक विदेशी विद्यार्थी के दाखिले की कहानी नहीं, बल्कि स्थानीय परिसर में वैश्विक शिक्षा के प्रवेश की कहानी है।
श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय के विधि संकाय में बोनी कैरेन की मौजूदगी से आने वाले समय में भारतीय और विदेशी विद्यार्थियों के बीच शैक्षणिक, सांस्कृतिक और वैचारिक आदान-प्रदान को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। हनुमानगढ़ के विद्यार्थियों के लिए दुनिया अब केवल किताबों में पढ़ने की चीज नहीं रह गई है, वह उनके साथ वाली बेंच पर बैठकर भी पढ़ रही है।








