



ग्राम सेतु ब्यूरो.
बीकानेर में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का संभाग मुख्यालय दौरा महज बीजेपी कार्यकर्ताओं से मुलाकात भर नहीं रहा। करीब 20 मिनट के संबोधन में मुख्यमंत्री ने निकाय और पंचायत चुनाव की तैयारियों पर जिस अंदाज में बात की, उससे साफ संकेत गया कि इस बार टिकट से लेकर चुनावी नतीजों तक संगठन में प्रदर्शन का हिसाब-किताब होने वाला है।
सबसे ज्यादा चर्चा मुख्यमंत्री के उस संदेश की रही, जिसमें उन्होंने कहा कि पार्टी के लिए निष्ठा से काम करने वाले कार्यकर्ता को ही टिकट मिलेगा। यानी चुनावी मौसम में केवल सिफारिश, रसूख या पुराने संबंध काफी नहीं होंगे। संगठन के प्रति सक्रियता और जमीन पर काम करने वालों को प्राथमिकता देने का संकेत माना जा रहा है। भाजपा की राजनीति में यह संदेश छोटा जरूर है, लेकिन टिकट की दौड़ में लगे दावेदारों के लिए काफी बड़ा है।

मुख्यमंत्री ने बीकानेर के भाजपा विधायकों की ओर इशारा करते हुए एक और बात साफ कर दी, क्षेत्र के विकास के लिए विधायकों ने जितना बजट मांगा, सरकाकर ने उतना देने का प्रयास किया है, अब चुनाव में जीत दिलाने की जिम्मेदारी भी उनकी है। उन्होंने विधायकों से कमर कसकर काम करने को कहा और संकेत दिया कि हर विधायक के काम का आकलन होगा। इसे स्थानीय राजनीति में सीधे-सीधे ‘काम का रिपोर्ट कार्ड’ वाला संदेश माना जा रहा है।
दरअसल, निकाय और पंचायत चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन केवल प्रत्याशियों का नहीं, बल्कि स्थानीय नेताओं और विधायकों की राजनीतिक पकड़ का भी पैमाना बनेगा। ऐसे में मुख्यमंत्री का यह कहना कि जीत के लिए पूरी ताकत लगानी होगी, आने वाले दिनों में बीकानेर की राजनीति में खूब सुनाई दे सकता है।

बैठक में विधायक जेठानन्द व्यास, ताराचंद सारस्वत, विश्वनाथ मेघवाल और अंशुमान सिंह भाटी सहित भाजपा के कई नेता मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने अपने पुराने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए विजय आचार्य, सत्यप्रकाश आचार्य, मोहन सुराना और अखिलेश प्रताप सिंह जैसे नेताओं के साथ काम करने की बात कही। वरिष्ठ नेता जालम सिंह भाटी, रामगोपाल सुथार, पूर्व मेयर नारायण चौपड़ा और सोहनलाल बैद की मौजूदगी ने भी बैठक को पुराने और नए भाजपा नेताओं के मेल का रंग दिया।

लेकिन गपशप का असली मसाला यहां कुछ और था। बीकानेर पूर्व की विधायक सिद्धि कुमारी कार्यक्रम में नजर नहीं आईं। पार्टी कार्यक्रम में उनकी गैरमौजूदगी कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा का विषय बनी रही। खास बात यह कि 15 अगस्त के राज्य स्तरीय समारोह में भी उनकी अनुपस्थिति चर्चा में आई थी। हालांकि वेटरनरी कॉलेज के एटहोम कार्यक्रम में उनका मुख्यमंत्री से मिलना यह भी बताता है कि तस्वीर को केवल गैरहाजिरी के चश्मे से देखना जल्दबाजी होगी। फिर भी राजनीति में खाली कुर्सी भी कभी-कभी पूरी कहानी सुना देती है।
उधर, मुख्यमंत्री के सभागार में प्रवेश के दौरान सिक्योरिटी और कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की ने अलग ही रंग दे दिया। गेट बंद होने के बाद कई कार्यकर्ता अंदर-बाहर होते रहे और दोबारा प्रवेश नहीं पा सके। चुनाव से पहले कार्यकर्ताओं का जोश इतना था कि सुरक्षा व्यवस्था को भी कुछ देर के लिए उसकी कीमत चुकानी पड़ी।
कुल मिलाकर बीकानेर दौरे से मुख्यमंत्री ने दो संदेश दिए। टिकट निष्ठावान और सक्रिय कार्यकर्ताओं को मिलेगा, और चुनावी मैदान में विधायकों की परीक्षा भी होगी। अब देखना यह है कि टिकट की बिसात बिछने के बाद किसका निष्ठा-पत्र मजबूत निकलता है और किसका राजनीतिक रिपोर्ट कार्ड।





