




ग्राम सेतु ब्यूरो.
केन्द्रीय ग्रामीण विकास, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को तिरूपति से विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी योजना वीबी जी राम जी का राष्ट्रीय शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ब्यावर जिले की मसूदा कृषि उपज मंडी से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जुड़े और राज्य स्तरीय जन सम्मेलन सह शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों की समृद्धि और आत्मनिर्भरता के लिए नरेन्द्र मोदी के विजन से यह योजना लाई गई है। उनका स्पष्ट विश्वास है कि गांव विकसित होंगे तभी भारत विकसित बनेगा। किसान की समृद्धि, श्रमिक के सम्मान और गांव की आत्मनिर्भरता से ही भारत विश्व की अग्रणी शक्ति बनेगा। उन्होंने बताया कि यह योजना केवल रोजगार नहीं, बल्कि जल संरक्षण, ग्रामीण बुनियादी ढांचे और आजीविका का समग्र राष्ट्रीय अभियान है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मनरेगा रोजगार गारंटी का उद्देश्य लेकर आई थी, परंतु जमीनी स्तर पर कई कारणों से अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई। अस्थायी सड़कों, अधूरी जल संरचनाओं और बिना योजना के मिट्टी खुदाई जैसे कार्यों से दीर्घकालिक लाभ नहीं हो पाया। जांच व्यवस्था कमजोर रहने से फर्जी जॉब कार्ड, मनगढ़ंत हाजिरी और मजदूरी भुगतान में गड़बड़ियां सामने आती रहीं। सोशल ऑडिट भी कई बार औपचारिकता तक सीमित रहा। उन्होंने बताया कि मनरेगा में प्रशासनिक व्यय की सीमा कम होने से क्रियान्वयन प्रभावित हुआ। खेती के सीजन में कार्य चलते रहने से किसानों को मजदूर नहीं मिलते थे और देरी से भुगतान पर मुआवजे के प्रावधान कागजी बनकर रह जाते थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नई योजना में सालाना रोजगार की कानूनी गारंटी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन की गई है। फसल बुवाई और कटाई के समय श्रमिकों की कमी न हो, इसके लिए राज्य सरकार 60 दिनों का कार्य-विराम घोषित कर सकेगी। जल संरक्षण, ग्रामीण बुनियादी ढांचा, आजीविका और आपदा प्रबंधन से जुड़े ठोस कार्य कराए जाएंगे। पारदर्शिता के लिए जियो-टैगिंग, सैटेलाइट चित्र, मोबाइल ऐप और एआई जैसी तकनीकों का उपयोग होगा। हर छह महीने में डिजिटल तथ्यों के साथ सोशल ऑडिट अनिवार्य रहेगा। बहुस्तरीय डिजिटल शिकायत निवारण प्रणाली, समयबद्ध समाधान और जिला लोकपालों की व्यवस्था की गई है। भुगतान हर सप्ताह अनिवार्य होगा; दो सप्ताह से अधिक देरी पर स्वतः मुआवजा मिलेगा। प्रशासनिक व्यय की सीमा 9 प्रतिशत की गई है, ताकि जमीनी स्तर पर पर्याप्त स्टाफ, तकनीकी विशेषज्ञ, प्रशिक्षण और निगरानी सुनिश्चित हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना में टिकाऊ और जवाबदेह वित्तीय मॉडल है। अब हर साल के लिए स्पष्ट बजट तय होगा। कुल आवंटन बढ़ने से राज्यों को मनरेगा औसत की तुलना में लगभग 17 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ मिलने की उम्मीद है। वर्ष 2026-27 में राज्य के लिए 12 हजार 636 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, अब तक का सर्वाधिक बजट।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने ढाई वर्षों में जल और बिजली उपलब्धता के लिए ठोस कदम उठाए हैं। 26 जिलों के किसानों को दिन में बिजली दी जा रही है और 2027 तक सभी जिलों में यह सुविधा पहुंचेगी। चार लाख सरकारी नौकरियों का वादा पूरा किया जा रहा है। ‘हरियालो राजस्थान’ अभियान के तहत पौधारोपण को जन-आंदोलन बनाया जा रहा है। इस अवसर पर देवमाली में दर्शनार्थियों के लिए 2 करोड़ रुपये की लागत से आश्रय स्थल, सरोवर जीर्णाेद्धार और सड़क निर्माण की घोषणा की गई। लाभार्थियों को ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड वितरित किए गए। स्वयं सहायता समूहों की दीदियों को 3.31 करोड़ रुपये की क्रेडिट लिंकेज राशि और 1.16 करोड़ रुपये के ऋण चेक दिए गए। समर्थ सखी ऋण योजना के तहत स्कूटी वितरित की गईं। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत नए आवासों की स्वीकृति और चाबियां सौंपी गईं। लगभग 424 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का शिलान्यास भी हुआ।
केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी ने योजना को विकसित भारत की पक्की नींव बताया। ग्रामीण विकास राज्यमंत्री ओटाराम देवासी ने कहा कि यह योजना मनरेगा से अधिक सुदृढ़ और प्रभावी है। कार्यक्रम में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत, जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।







