



ग्राम सेतु ब्यूरो.
देश की तीनों सेनाओं थल सेना, नौसेना और वायु सेना में अधिकारी बनने का सपना देखने वाले विद्यार्थियों के लिए राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) सबसे प्रतिष्ठित प्रवेश मार्ग माना जाता है। हर वर्ष लाखों विद्यार्थी इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन सीमित अभ्यर्थी ही सफलता प्राप्त कर पाते हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विद्यार्थी कक्षा 9 से ही सुनियोजित और लक्ष्य आधारित तैयारी शुरू कर दें तो सफलता की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। इसी उद्देश्य से गुड डे डिफेंस अकादमी ने विद्यार्थियों और अभिभावकों को समय रहते सही दिशा में तैयारी शुरू करने का संदेश दिया।
गुड डे उिफेंस अकादमी के चेयरपर्सन वरुण यादव ने कहा कि देश को ऐसे युवा अधिकारियों की आवश्यकता है, जो केवल शारीरिक रूप से सक्षम ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी मजबूत, नेतृत्व क्षमता से परिपूर्ण और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पित हों। उन्होंने कहा कि सफलता का आधार स्पष्ट लक्ष्य, नियमित अभ्यास और अनुशासित जीवनशैली है। विद्यार्थियों को अपनी कमजोरियों की पहचान कर योजनाबद्ध तरीके से उन्हें दूर करना चाहिए तथा समय का सदुपयोग करते हुए निरंतर आत्मविकास पर ध्यान देना चाहिए।
संस्थान के प्रबंध निदेशक दिनेश कुमार जुनेजा ने कहा कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। यदि विद्यार्थी प्रारंभिक वर्षों से ही सही मार्गदर्शन और निरंतर अभ्यास प्राप्त करें तो एनडीए जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता पूरी तरह संभव है। उन्होंने अभिभावकों से भी आग्रह किया कि वे बच्चों पर अनावश्यक दबाव डालने के बजाय उनकी रुचि और क्षमता को समझें। सकारात्मक पारिवारिक वातावरण, प्रोत्साहन और विश्वास बच्चों के आत्मबल को मजबूत बनाते हैं और कठिन लक्ष्य हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
गुड डे डिफेंस अकादमी के निदेशक डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि एनडीए जैसी परीक्षा अंतिम समय की तैयारी से नहीं, बल्कि वर्षों के सुनियोजित प्रयासों से सफल होती है। उन्होंने कहा कि यदि विद्यार्थी कक्षा 9 से ही गणित, अंग्रेज़ी और सामान्य ज्ञान जैसे विषयों की मजबूत नींव तैयार कर लें तो आगे चलकर बोर्ड परीक्षाओं के साथ-साथ एनडीए, संयुक्त रक्षा सेवा तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी सहज हो जाती है।
उन्होंने कहा कि एनडीए परीक्षा में गणित का स्तर उच्च होता है तथा अंग्रेज़ी और सामान्य अध्ययन का दायरा भी व्यापक रहता है। इसलिए विद्यार्थियों को प्रारंभ से ही विषयों की मूल अवधारणाओं को समझने, नियमित अभ्यास करने तथा समाचार पत्र पढ़ने, समसामयिक घटनाओं की जानकारी रखने और सामान्य ज्ञान का अध्ययन करने की आदत विकसित करनी चाहिए। इससे विश्लेषणात्मक सोच, निर्णय क्षमता और आत्मविश्वास का निरंतर विकास होता है।
डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि एनडीए चयन प्रक्रिया केवल लिखित परीक्षा तक सीमित नहीं होती। इसके बाद होने वाले सेवा चयन बोर्ड साक्षात्कार में अभ्यर्थियों के व्यक्तित्व, नेतृत्व क्षमता, निर्णय लेने की योग्यता, संवाद कौशल, टीम भावना, मानसिक संतुलन और आत्मविश्वास का विस्तृत मूल्यांकन किया जाता है। इसलिए विद्यार्थियों को प्रारंभिक अवस्था से ही व्यक्तित्व विकास, सार्वजनिक भाषण, शारीरिक फिटनेस, खेलकूद और अनुशासित दिनचर्या को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि नियमित व्यायाम, समय प्रबंधन, सकारात्मक सोच और अनुशासन जैसी आदतें केवल रक्षा सेवाओं में चयन के लिए ही नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में सफलता की मजबूत आधारशिला साबित होती हैं। जो विद्यार्थी बचपन से ही निरंतर अभ्यास और अनुशासन को अपनाते हैं, वे कठिन से कठिन प्रतियोगिताओं में भी बेहतर प्रदर्शन करते हैं।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि सेना में अधिकारी बनना केवल एक प्रतिष्ठित करियर नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का सर्वाेच्च अवसर है। यदि विद्यार्थी समय रहते सही दिशा में तैयारी शुरू करें तो वे न केवल राष्ट्रीय रक्षा अकादमी की परीक्षा में सफलता प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि एक जिम्मेदार, अनुशासित और नेतृत्व क्षमता से परिपूर्ण नागरिक के रूप में भी विकसित होते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि यदि लक्ष्य एनडीए है तो उसकी तैयारी की सबसे उपयुक्त शुरुआत कक्षा 9 से ही मानी जानी चाहिए।





