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पंचायतीराज चुनाव की सरगर्मियों के बीच हनुमानगढ़ जिला कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी खुलकर सड़कों पर आ गई है। जिलाध्यक्ष मनीष मक्कासर द्वारा प्रदेश नेतृत्व को भेजी गई एक अति गोपनीय रिपोर्ट सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पार्टी की जिला स्तरीय राजनीति में जोरदार सियासी भूचाल आ गया है। इस रिपोर्ट ने यह चौंकाने वाला खुलासा किया है कि जिले के कई वरिष्ठ नेताओं और अग्रिम संगठनों के पदाधिकारियों को न तो संगठन की गतिविधियों में कोई रुचि नहीं है।
कांग्रेस से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) ने संगठनात्मक गतिविधियों, बैठकों और अभियानों से दूरी बनाने वाले नेताओं और पदाधिकारियों की विस्तृत रिपोर्ट तलब की थी। इसके तहत जिलाध्यक्ष मनीष मक्कासर ने पिछले छह महीनों के दौरान आयोजित हुए 15 प्रमुख कार्यक्रमों में नेताओं की मौजूदगी का ब्योरा संकलित कर पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा को भेजा था। 13 जून 2026 की तारीख अंकित यह गोपनीय पत्र जैसे ही सार्वजनिक हुआ, पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी सतह पर आ गई।
लीक हुई रिपोर्ट में जिले के कद्दावर नेताओं की संगठनात्मक निष्ठा पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व मंत्री चौधरी विनोद कुमार, पीसीसी सदस्य शबनम गोदारा, भूपेंद्र चौधरी और पूर्व उप सभापति अनिल खीचड़ ने संगठन के 15 कार्यक्रमों में से एक भी कार्यक्रम में भाग नहीं लिया। इसी सूची में एआईसीसी सदस्य पवन गोदारा, विजेंद्र सिंह सिद्धू, पीसीसी सचिव मालचंद लांबा, श्रवण तंवर, धर्मपाल गोदारा, कमलेश कपिल और शब्बीर हुसैन जैसे वरिष्ठ नेताओं के नाम भी दर्ज हैं, जो 15 में से पूरे 15 कार्यक्रमों में नदारद रहे। इसके अतिरिक्त पूर्व प्रधान दयाराम जाखड़ और पूर्व जिला प्रमुख कविता मेघवाल की निष्क्रियता को लेकर रिपोर्ट में उनकी ‘निगेटिव मार्किंग’ की गई है।
वरिष्ठ नेताओं के अलावा पार्टी की रीढ़ माने जाने वाले अग्रिम संगठनों और ब्लॉक इकाइयों के पदाधिकारी भी संगठन को लेकर सजग नहीं दिखे। रिपोर्ट के अनुसार, एनएसयूआई जिलाध्यक्ष रोहित जावा संगठन के 15 कार्यक्रमों से लगातार अनुपस्थित रहे। कांग्रेस सेवादल जिलाध्यक्ष अश्विनी पारीक की सक्रियता भी लगभग शून्य के बराबर रही। हनुमानगढ़ शहर ब्लॉक अध्यक्ष जिनेंद्र जैन ‘बेबी’ और देहात अध्यक्ष संदीप सिद्धू भी बैठकों में सक्रिय भूमिका निभाने में नाकाम रहे। मंडल अध्यक्ष अनिल भांभू, हरनेक सिंह, विजेंद्र साईं, प्रकाश जैन, योगेश चौहान और विक्रांत बेनीवाल जैसे प्रमुख पदाधिकारी भी 15 में से महज एक या दो औपचारिक कार्यक्रमों में ही नजर आए।
रिपोर्ट के वायरल होने के बाद जिलाध्यक्ष मनीष मक्कासर ने स्वीकार किया कि उन्होंने यह रिपोर्ट पीसीसी के आदेश पर ही तैयार कर भेजी थी। ‘ग्राम सेतु डॉट कॉम’ के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने पिछले छह महीने की संगठनात्मक सक्रियता की रिपोर्ट मांगी थी, जिसकी पालना में निष्पक्ष तथ्य भेजे गए थे। हालांकि, उन्होंने इस बात से अनभिज्ञता जताई कि यह गोपनीय दस्तावेज किसने और किस मंशा से लीक किया।
जानकारों का कहना है कि पंचायतीराज चुनाव की दहलीज पर इस रिपोर्ट का सार्वजनिक होना सोची-समझी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। जिन नेताओं की निष्क्रियता की रिपोर्ट है, इनमें से कुछ अभी पंचायतीराज चुनाव में टिकट भी मांग रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि रिपोर्ट के सार्वजनिक होने से जिलाध्यक्ष मनीष मक्कासर और पूर्व मंत्री चौधरी विनोद कुमार के गुटों के बीच टकराव अब चरम पर पहुंच जाएगा। इसका सीधा असर आगामी पंचायत चुनावों के टिकट वितरण और प्रचार अभियान पर पड़ना तय है, जिससे कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटने की आशंका बढ़ गई है।





