




एमएल शर्मा.
कामयाबी एक अनंत, अपरिमित लक्ष्य है जिसकी पराकाष्ठा को शायद व्याकरणीय शब्दों में बांध पाना नामुमकिन सा है, परन्तु यह मंजिल तय करने का हौसला देने का सबसे सशक्त माध्यम है। यह कहना है आरएएस 2024 में 309वीं रैंक हासिल करने वाली नेहा शर्मा का। ईश्वरीय शक्ति में गहरी आस्था रखने वाली बेटी नगरपरिषद हनुमानगढ़ में सहायक लेखाधिकारी रावतसर निवासी रामलाल शर्मा की सुपुत्री नेहा शर्मा के चयन का समाचार मिलते ही परिवार में खुशियों का आलम छा गया। घर पर बधाइयां देने वालों का तांता लग गया। अपनी दादी मां को अपना ‘आइडल’ मानने वाली नेहा स्कूली समय से ही प्रशासनिक सेवा को मंजिल मान चुकी थी। ‘ग्राम सेतु डॉट कॉम’ से बातचीत में नेहा शर्मा कहती हैं, ‘ज्ञान सदा छोटा बनकर ही ग्रहण किया जा सकता है। अध्ययन के दौरान घड़ी में समय नहीं बल्कि टॉपिक पर नजर रखनी चाहिए।’
प्रतियोगी परीक्षाओं में जुटे युवाओं को संदेश देते हुए नेहा ने कहा कि असफलता ही सफलता की एकमात्र सीढ़ी है। आरम्भ से अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहना बहुत जरूरी है। हताशा व्यक्तित्व को कमजोर बनाती है इसलिए सकारात्मक रहकर पढ़ाई करनी चाहिए। नेहा ने अपनी सफलता का श्रेय स्वर्गीय दादा, दादी, माता पिता व गुरुजनों को दिया।





