




ग्राम सेतु ब्यूरो.
अनुशासन, देशभक्ति और उज्ज्वल भविष्य की बात जब होती है, तो किताबों से ज्यादा असर उन लोगों का होता है जिन्होंने यह सब जीकर दिखाया हो। इसी सोच के साथ हनुमानगढ़ स्थित गुड डे डिफेंस सैनिक स्कूल में 22 अप्रैल को विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के लिए एक प्रेरणादायक ओरिएंटेशन प्रोग्राम आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को केवल पढ़ाई तक सीमित न रखकर, उन्हें जिम्मेदार, अनुशासित और देशभक्त नागरिक बनने की दिशा में प्रेरित करना है।
इस विशेष कार्यक्रम के मुख्य वक्ता होंगे परमवीर चक्र से सम्मानित, कारगिल युद्ध के नायक और विद्यालय के चीफ मेंटर एवं डायरेक्टर कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 11 बजे होगी। यह जानकारी विद्यालय प्रशासक अनुराग छाबड़ा ने दी। अनुराग छाबड़ा ने बताया कि कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव अपने जीवन के वास्तविक अनुभवों के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझाएंगे कि कठिन परिस्थितियों में भी हौसला कैसे बनाए रखा जाता है और लक्ष्य के प्रति समर्पण किसे कहते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्तित्व का सान्निध्य विद्यार्थियों के जीवन में स्थायी प्रभाव छोड़ता है।
संस्था के चेयरपर्सन वरुण यादव ने बताया कि इस प्रकार के ओरिएंटेशन प्रोग्राम विद्यार्थियों के सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास में अहम भूमिका निभाते हैं। आज के समय में बच्चे जानकारी तो बहुत रखते हैं, लेकिन दिशा का अभाव होता है। जब कोई सजीव उदाहरण उनके सामने आता है, तो लक्ष्य अपने आप स्पष्ट हो जाता है।
वहीं, संस्था के प्रबंध निदेशक दिनेश जुनेजा ने कहा कि विद्यालय का उद्देश्य केवल परीक्षा पास कराना नहीं है। हम शिक्षा के साथ संस्कार देना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि यहां से निकलने वाला हर छात्र एक जिम्मेदार और देशभक्त नागरिक बने। इस ओरिएंटेशन प्रोग्राम के जरिए विद्यार्थियों और अभिभावकों को विद्यालय की कार्यप्रणाली, अनुशासन और मूल्यों से अवगत कराया जाएगा।
ये है कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव की कहानी
कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव भारतीय सैन्य इतिहास का वह नाम हैं, जिसे सुनते ही साहस की परिभाषा बदल जाती है। 1999 के कारगिल युद्ध में टाइगर हिल पर अदम्य साहस दिखाने वाले योगेंद्र सिंह यादव ने महज 19 वर्ष की उम्र में वह कर दिखाया, जो पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। वे भारत के सबसे युवा परमवीर चक्र विजेता हैं।
10 मई 1980 को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के औरंगाबाद अहिर गांव में जन्मे योगेंद्र सिंह यादव एक सैन्य परिवार से आते हैं। उनके पिता करण सिंह यादव कुमाऊं रेजिमेंट में सैनिक रहे और 1965 व 1971 के भारत-पाक युद्ध में हिस्सा ले चुके थे। बड़े भाई जितेंद्र सिंह यादव भी भारतीय सेना की आर्टिलरी रेजिमेंट में सेवा दे चुके हैं। ऐसे माहौल में देशभक्ति योगेंद्र के लिए पढ़ाई का विषय नहीं, जीवन का हिस्सा थी।
महज 16 साल 5 महीने की उम्र में उन्होंने भारतीय सेना में भर्ती के लिए आवेदन किया और 18 ग्रेनेडियर्स में शामिल हुए। कठिन प्रशिक्षण और अनुशासन ने उन्हें कम उम्र में ही एक जांबाज सैनिक बना दिया।
कारगिल युद्ध के दौरान टाइगर हिल पर दुश्मन का कब्जा भारतीय सेना के लिए बड़ी चुनौती था। यह चोटी लगभग 16,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित थी और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण थी। 3-4 जुलाई 1999 की रात 18 ग्रेनेडियर्स की घातक प्लाटून को दुश्मन के बंकरों पर कब्जा करने का आदेश मिला। इस प्लाटून में ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव भी शामिल थे।
बर्फ से ढकी खड़ी चट्टानों पर चढ़ते समय योगेंद्र ने स्वेच्छा से सबसे आगे बढ़ने का जिम्मा लिया। रस्सी लगाकर रास्ता बनाते समय दुश्मन की गोलियों और ग्रेनेड हमलों में उनके सभी साथी शहीद हो गए। योगेंद्र स्वयं भी 15 से अधिक गोलियां और ग्रेनेड के टुकड़े लगने से गंभीर रूप से घायल हो गए। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
गंभीर अवस्था में भी उन्होंने एक के बाद एक दुश्मन बंकरों पर हमला किया और कई पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया। उनकी इस असाधारण वीरता ने बाकी भारतीय सैनिकों में नया जोश भर दिया और अंततः टाइगर हिल पर तिरंगा लहराया गया। योगेंद्र सिंह यादव को हेलीकॉप्टर से अस्पताल पहुंचाया गया, जहां वे करीब डेढ़ साल तक उपचाराधीन रहे। 26 जनवरी 2000 को उन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। वर्ष 2021 में उन्हें मानद कैप्टन की उपाधि दी गई और 31 दिसंबर 2021 को वे सेना से सेवानिवृत्त हुए।
आज भी उनकी कहानी युवाओं के लिए यह संदेश है कि साहस उम्र नहीं देखता और देश के लिए किया गया बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाता। हनुमानगढ़ के विद्यार्थियों के लिए यह ओरिएंटेशन प्रोग्राम न सिर्फ एक कार्यक्रम होगा, बल्कि जीवन भर साथ रहने वाली सीख भी।






