








ग्राम सेतु डॉट कॉम
हनुमानगढ़ टाउन (नगर परिषद रामलीला रंगमंच)। घड़ियों की सुइयां आगे बढ़ रही हैं, मगर हनुमानगढ़ टाउन के नगर परिषद रामलीला रंगमंच पर इस वक्त त्रेतायुग साकार हो उठा है। मंच के इर्द-गिर्द हजारों आंखें अपलक टिकी हैं, कानों में वैदिक मंत्रों की गूंज है और हवा में धूप-अगरबत्ती की खुशबू तैर रही है। श्री रामलीला समिति की ओर से आयोजित इस ऐतिहासिक रामलीला के चौथे दिन आज दृश्य सिर्फ मंचन भर नहीं, एक ऐसा सजीव उत्सव बन चुका है, जिसने समूचे शहर को जनकपुरी और अयोध्या के मिलन का साक्षी बना दिया है।
मंच पर पर्दा उठते ही भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न की सचेतन झांकी प्रकट होती है। बाल सुलभ तेज, सिर पर मुकुट, कानों में कुंडल और होठों पर दिव्य मुस्कान लिए चारों भाइयों के इस स्वरूप के सामने आते ही पूरा पंडाल ‘जय सियाराम’ के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठता है।
रंगमंच से ठीक नीचे अब बारात प्रस्थान की हलचल तेज हो रही है। चारों राजकुमार भव्य सुसज्जित रथों पर विराजमान हैं। आगे-आगे नगाड़ों की थाप और पीछे मशहूर बैंड-बाजों की मधुर धुनें गूंज रही हैं। जैसे ही बारात रवाना होती है, बाराती बने शहरवासी, श्रद्धालु और समिति के सदस्य भक्ति रस में डूबकर नाचने लगते हैं।
यह बारात रंगमंच से निकलकर टाउन के मुख्य बाजारों से होकर गुजर रही है। दुकानों की छतों और गलियों के मोड़ों पर खड़े लोग हाथ जोड़कर प्रभु के दर्शन कर रहे हैं। बारात आगे बढ़ते हुए नई धान मंडी स्थित दुकान नंबर 110 यानी रुगलाल चेतन प्रकाश दादरी प्रतिष्ठान के द्वार पर पहुंचती है। यहां का दृश्य देखते ही बनता है। दादरी परिवार पूरी आत्मीयता और वैदिक मर्यादा के साथ समधी पक्ष की अगवानी के लिए पलक-पावड़े बिछाए खड़ा है।
पंडितजी के सानिध्य में गूंजते मंगलाचरण और स्वस्तिवाचन के बीच दादरी परिवार ने बारात का शाही अंदाज में स्वागत किया। आकाश में पुष्पवर्षा के बीच दादरी परिवार के सदस्यों ने भगवान श्रीराम और तीनों भाइयों के ललाट पर कुमकुम-चंदन का तिलक लगाया, आरती उतारी और चरण वंदन किए। स्वागत-सत्कार का यह क्रम इतनी श्रद्धा से संपन्न हुआ कि सड़क पर चल रही यह रस्म किसी आधुनिक अभिनय से परे विशुद्ध आस्था की पराकाष्ठा बन गई।
अगवानी और स्वागत के सत्कार के पश्चात बारात वापस अपने मूल पड़ाव यानी नगर परिषद रामलीला रंगमंच पर लौटती है। अब मंच पर जनकपुर का राजदरबार और विवाह मंडप सज चुका है। माता जानकी, उर्मिला, मांडवी और श्रुतकीर्ति के साथ चारों राजकुमारों के पाणिग्रहण संस्कार की तैयारियां हैं।
इस पावन अवसर पर कन्यादान की रस्म निभाने का परम सौभाग्य जुगल किशोर खदरिया परिवार को प्राप्त हुआ है। खदरिया परिवार के सदस्य विवाह मंडप में पूरे पारंपरिक रीति-रिवाजों, श्रद्धा और भावुकता के साथ बैठे हैं। पंडितजी की वेदमंत्रोच्चार की गूंज के बीच जैसे ही संकल्प और कन्यादान की रस्म पूरी होती है, पूरा परिसर मंगल गीतों से गूंज उठता है।
इसके बाद दोनों पक्षों के बीच ‘मिलनी’ की आत्मीय रस्म अदा की गई। समधियों और परिजनों ने एक-दूसरे को गले लगाकर प्रेम और मर्यादा का परिचय दिया तथा सामर्थ्यानुसार सुंदर उपहार भेंट किए गए।
विवाह की आनंदमयी रस्मों के फौरन बाद जब विदाई की बेला आई, तो कुछ ही मिनटों पहले उत्सव में डूबा रंगमंच एक गहरे सन्नाटे और भावुकता में बदल गया। बेटी की विदाई के वक्त माता सीता और उनकी बहनों का माता-पिता से बिछोह का वह कारुणिक अभिनय कलाकारों ने इतनी जीवंतता से पेश किया कि दर्शक दीर्घा में बैठे महिलाओं और पुरुषों की आंखें छलक पड़ीं। कई बुजुर्ग अपने आंसुओं को पोंछते दिखे। अभिनय और वास्तविकता के बीच का फर्क जैसे पूरी तरह मिट चुका था।
आयोजन की गरिमा और तकनीकी बारीकियों पर बात करते हुए समिति के सचिव दिनेश तलवाड़िया ने ‘ग्राम सेतु डॉट कॉम’ को बताया, ‘इस रामलीला की सबसे बड़ी ताकत इसकी मर्यादा है। यहां भाग लेने वाले सभी पात्र पूरी शुचिता और भक्तिभाव से अभिनय करते हैं। यही कारण है कि हनुमानगढ़ की यह रामलीला पूरे बीकानेर संभाग की पहली और सबसे प्रतिष्ठित रामलीला मानी जाती है। इसमें दशकों का अनुभव रखने वाले पुराने मंझे हुए कलाकार मंचन कर रहे हैं। निर्देशक प्रेमरतन पारीक के कुशल निर्देशन तथा उपनिर्देशक अशोक मिड्ढा और बहादुर सिंह चौहान के बारीक मार्गदर्शन में हर दृश्य सजीव हो रहा है।’
समिति अध्यक्ष अर्चित अग्रवाल ने इस दौरान एक अनोखी परंपरा की जानकारी दी। अर्चित अग्रवाल ‘ग्राम सेतु डॉट कॉम’ को बताते हैं कि इस वर्ष भी प्रतिदिन मंच पर स्थापित देवी-देवताओं की सचेतन झांकी पर 100 ग्राम शुद्ध चांदी के सिक्के से तिलक किया जा रहा है। यह क्रम पूरे 16 दिनों तक निरंतर जारी रहेगा। इसके बाद 21 अक्टूबर 2026 की मध्यरात्रि 12.15 बजे एक विशेष आयोजन होगा, जिसमें स्वयं भगवान श्रीराम के कर-कमलों द्वारा लॉटरी के माध्यम से भाग्यशाली श्रद्धालु का चयन किया जाएगा और प्रभु अपने हाथों से वह 100 ग्राम चांदी का सिक्का उस भक्त को भेंट करेंगे।
सफल मंचन और कन्यादान की रस्म के समापन पर समिति द्वारा खदरिया परिवार का सम्मान किया गया। इस मौके पर समिति अध्यक्ष अर्चित अग्रवाल, संरक्षक बालकृष्ण गोल्याण, चांद रत्न खदरिया, सचिव दिनेश तलवाड़िया, सज्जन ढींगवाल, कोषाध्यक्ष सतीश गर्ग, सुंदर बंसल तथा स्टेज व्यवस्था प्रभारी हेमंत शर्मा सहित समिति के अन्य प्रमुख सदस्यों ने मंच पर जुगल किशोर खदरीया परिवार को स्मृति चिह्न भेंट कर उनका अभिनंदन किया।
पूरे कार्यक्रम के दौरान माइक पर प्रह्लाद गुप्ता की ओजस्वी और सुरीली आवाज ने समां बांधे रखा। उन्होंने अपने प्रभावशाली मंच संचालन से हर रस्म और प्रसंग की व्याख्या करते हुए दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। रात गहरा रही है, लेकिन हनुमानगढ़ टाउन का यह रंगमंच मर्यादा पुरुषोत्तम के आदर्शों और जनकपुर के उस अमर उत्सव की आभा से अब भी जगमगा रहा है।





