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देश भर में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) के खिलाफ चल रहे विरोध-प्रदर्शनों और राजनीतिक हलचलों के बीच केंद्र सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा और अहम कदम उठाया है। केंद्र ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी प्रकाश राजपुरोहित को भारत निर्वाचन आयोग में उप चुनाव आयुक्त डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर नियुक्त किया है। कैबिनेट की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने संयुक्त सचिव स्तर के पदों पर हाल ही में कई अधिकारियों की नियुक्तियों को मंजूरी दी है, जिसमें प्रकाश राजपुरोहित का नाम सबसे प्रमुख और रणनीतिक माना जा रहा है। ऐसे संवेदनशील समय में, जब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर जनसंवाद और बहस तेज है, एक निष्पक्ष और शांत छवि वाले नौकरशाह को आयोग में लाना महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है। उल्लेखनीय है कि राजस्थान कैडर के सीनियर आईएएस भानुप्रकाश एटूरू पहले ही चुनाव आयोग में डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, प्रकाश राजपुरोहित का उप चुनाव आयुक्त के पद पर कार्यकाल 8 अप्रैल 2030 तक प्रभावी रहेगा। यानी वे निर्वाचन आयोग में लगभग 5 वर्षों की लंबी अवधि तक अपनी सेवाएं देंगे। वे पूर्व उप चुनाव आयुक्त संजय कुमार की जगह यह पदभार ग्रहण करेंगे। संजय कुमार को हाल ही में उनके मूल कैडर में वापस भेज दिया गया था, जिसके बाद से इस पद पर एक मजबूत और अनुभवी अधिकारी की तलाश की जा रही थी।
प्रकाश राजपुरोहित को प्रशासनिक गलियारों में एक रिजर्व और गंभीर प्रवृत्ति के अधिकारी के रूप में जाना जाता है। वे सिर्फ अपने काम से काम रखने वाले ऑफिसर माने जाते हैं। उनके सहयोगियों और जानकारों के अनुसार, वे ‘न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर’ के सिद्धांत पर काम करते हैं।
किसी भी प्रकार के अनावश्यक विवादों या शक्ति संतुलन से दूर रहकर केवल नियमों के तहत काम करना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। अपने इसी शांत, संयत और संतुलित व्यवहार के कारण वे जहां भी पदस्थापित रहे, वहां आम जनता के बीच अत्यंत लोकप्रिय रहे हैं। आम जन के लिए हमेशा सुलभ और न्यायसंगत दृष्टिकोण रखने वाले अधिकारी के तौर पर उनकी पहचान रही है।
आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग से लेकर आईएएस बनने तक का सफर
प्रतिभा और प्रशासनिक दक्षता के धनी प्रकाश राजपुरोहित का शैक्षणिक रिकॉर्ड भी बेहद शानदार रहा है। उन्होंने देश के अग्रणी इंजीनियरिंग संस्थान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल की और राजस्थान कैडर के 2010 बैच के आईएएस अधिकारी बने। तकनीकी पृष्ठभूमि और विश्लेषण क्षमता का लाभ उनके प्रशासनिक निर्णयों में स्पष्ट रूप से दिखाई देता रहा है।
प्रकाश राजपुरोहित ने राजस्थान के कई बड़े और संवेदनशील जिलों में जिला कलक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट के रूप में सफलतापूर्वक कार्य किया है। जयपुर में बगतौर कलक्टर कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों का सफल संचालन किया। जोधपुर में कलक्टर के तौर पर उन्होंने पश्चिमी राजस्थान के सांस्कृतिक और प्रशासनिक केंद्र में प्रभावी जनसुनवाई प्रणाली लागू की। अजमेर में सांप्रदायिक सौहार्द और प्रशासनिक तालमेल को मजबूती दी। अलवर में कलक्टर के तौर पर उन्होंने एनसीआर क्षेत्र से जुड़े संवेदनशील औद्योगिक व सीमाई क्षेत्र प्रबंधन पर जोर दिया। हनुमानगढ़ कलक्टर के तौर पर उन्होंने कृषि और सिंचाई प्रबंधन से जुड़े मुद्दों का समयबद्ध निस्तारण कर किसानों को राहत देने का प्रयास किया। नशा के खिलाफ अभियान छेड़ते हुए उन्होंने ओलंपिक का आयोजन किया जो बेहद लोकप्रिय हुआ। इन सभी जिलों में पदस्थापना के दौरान उनकी सख्त कार्यशैली और जनता के प्रति विनम्र रवैये ने उन्हें एक लोकप्रिय प्रशासक का दर्जा दिलाया।
केंद्र में प्रतिनियुक्ति के दौरान प्रकाश राजपुरोहित मई 2026 से रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस प्रोडक्शन) में संयुक्त सचिव (ज्वाइंट सेक्रेटरी) के पद पर तैनात थे। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और आधुनिक उत्पादन प्रणालियों के प्रबंधन के बाद अब केंद्र सरकार ने उन्हें देश की संपूर्ण लोकतांत्रिक और चुनावी प्रणाली के प्रबंधन जैसी अत्यंत संवेदनशील भूमिका सौंपी है। आगामी वर्षों में होने वाले चुनावों के निष्पक्ष संचालन और आयोग की विश्वसनीयता को बनाए रखने में उनकी यह नियुक्ति बेहद अहम साबित होगी।






