



रूंख भायला
राजी राखै रामजी ! आज कीं गैली गूंगी बातां….। उतराधै सींवाड़ै रा चावा लिखारा करणीदान बारहठ अेक भोत सांतरी बात कैयी हैै, ‘जिंदगी में जित्ती स्याणप री दरकार होवै उण सूं कमती सही, गैली गूंगी बातां रो भी आपरो मोल होवै!’
स्याणी हो भलंई गूंगी, लोक में बातां री कमी कठै ! अेकर ढळती सी सिंझ्या में अेक आदमी आपरै सग्गां रै घर पूग्यो। सग्गी चूल्है सारै बैठी रोटी टुकड़ै री त्यारी करै ही, उण रो धणी अजेस खेत सूं बावड़्यो नीं हो। सग्गो हथाई रो चास्कू, रामरमी पछै चूल्है सारै पड़्यै पीढै पर बैठग्यो। सग्गी काचर-फळी रो साग छमकै ही, कै उण रै ढूंकारैआळो पाद निसरग्यो। लायण घणी सरमां मरी, अब के करां….सग्गै सामीं स्यान गई आज तो…, पण फेरूं ई बा चतराई दिखावती चूल्है सारै उभ्यै आपरै आठ-दस बरस रै छोरै नै बरजण लागी-
‘के खड़्यो-खड़्यो पादै है, परियां को गिड़ीजै के !’
अबै सग्गो उण सूं चार चंदा चढतो, घणो चोघो, सा बात जाणग्यो। खावै सूर कूटीजै पाडा, लाई टिंगर नै धिंगाणै गाळ पड़ी है। उण सूं रैयो नीं गयो, झट सरका दी-
बाळूं अे सगी तेरे तड़कै नै
पादै आप बतावै लड़कै नै !
सगी रा कान खुस’र हाथ में आग्या, बोलै ई के….।
इयां ई अेकर सुसरो जी तिबारी में भायलां भेळै बैठ्या चिलम रा सुट्टा खांचौ हा। छोटकी बीनणी लायण चा रा जूठा गिलास लेवण तिबारी में आई। आछी कैवो का माड़ी, गिलास चकती बेळा बिनणी सा रै पाद निसरग्यो। बा लायण भोत सरमा मरी, गिलास बठैई छोड’र पाछी चाल पड़ी। पण सुसरोजी काग….लारै सूं हेलो दियो-‘बीनणी ! के बात ? पादण ई आया हा के ?’ अबै इस्यै सुसरां रो कोई के करल्यै !
बोलणै री बात करां तो पादणै बाबत लोक में सदांई अेक अडेखण, अेक संको रैयो है। कैबत है, पाद’र हंसै, बांरा घर कद बसै। अबै बसो भलंई उजड़ो, पाद आवै जणा पादणो ई पड़ै। पाद अर छींक ई कदेई ढाब्यां ढब्या हा के ? अंग्रेजी रा चावा लिखारा खुसवंतसिंघ आपरै अेक लेख में पाद नै लेय’र सांतरो वरणाव लिख्यो है। आपणै देस सूं इतर दुनिया रै दूजै देसां में पादणै पर कांई अर किण ढाळै चरचा होवै, इण बात री जाणकारी बां रै आलेख सूं मिलै। बां रै मुजब युरोपीय देसां में कोई पादै तो उण सूं पैली ‘एक्सक्यूज मी’ कैवण री रीत है अर पाद् यां पछै ‘सॉरी’ बोलणो पड़ै।
मध्य एशिया रै कई देसां में तो गवाड़ में, किणी सभा में पादणै नै भोत भूंडो मानीजै। इण रै पेटै अेक लोकवात और सुणो ! एक गांम में सुलतान नांव रो आदमी हो। अेक दिन गांम री गवाड़ में बैठ्यो हो कै उण रै पाद निसरग्यो, पाद ई धमाकेदार….। बठै बैठ्या सगळा उण सामीं इयां देखण लाग्या जाणै बण कीं रो कतल कर दियो होवै। सुलतान नै ई आपरै माथै भोत ग्लाणी होई, पण करै ई के ! बोलोबालो घर आयग्यो। अळोच करी, ‘भोत माड़ी बात होई है, अबै गांम में सिर नीचो कर’र चालणो पड़सी। इण भूंड सूं चोखो, आपां गांम ई छोड देवां…।’ बस तेवड़ ली, गांम के ओ देस ई छोड देवां, जठै पादणै में ई इत्ती बेइज्जती है। बो रातो रात बठै सूं निसरग्यो, अर दूजै देस में जा बस्यो, बरसां खेचळ खाई अर जियां तियां आपरो घर परिवार जमायो।
बूढै बारै अेक दिन उण रै जी में आई, ‘यार ! आपणी जलमभौम छूट्यां जुग बीतग्या, मरणै सूं पैली अेकर जा’र देख तो आवूं।’ जी में आई अर आई, साम्हणो के हो, बस चाल पड़्यो। लाम्बी जातरा पछै गांम पूग्यो तो देख्यो, गांम रा रंग ढंग ई बदळीजग्या। छान झूंपड़ी री जिग्यां पक्का मकान….बिजळी पाणी…..गवाड़ तो जाणै गमगी होवै। आपरी झूंपड़ी उण नै कठै लाधती…..। अेक सैंधी सी गळी में कीं छोरा छींपरा क्रिकेट खेलै हा, बान्नै हेलो कर’र नेड़ै बुलायो अर बूझ्यो-‘बरसां पैली अठै कठैई सुलतान रो घर होवतो, कीं सीध करो नीं !’ अेक टाबर झट सूं बोल्यो, सुलतान पादणियै रो घर के…?
इत्तो सुणताई सुलतान तो भींत होग्यो, मूंडो फोर’र पाछो आपरै नूंवोड़ै देस कान्नी दौड़ पड़्यो, ‘मर तेरी….आ भूंडी बात तो आगली पीढ़ी तंई जा पूगी…! हे अल्ला, जन्नत में तो नीं पूगी होवैला ?’
कोई के करल्यै लोक रो, लोक री बात रो….। पण इत्तो जाण ल्यो, संस्कृत में अपानवायु अर अंग्रेजी में फार्ट रो नांव धरायां ओ पाद जे नीं निसरै तो आदमी रै गाडी चढतां घणी देर ई नीं लागै। इण पाद रै मिस ई आपणै सरीर री वात बारै निसरै। अबै अपान में हिंगळू तो होवण सूं रैयो, गैस तो गिंधावै ई ! मेडिकल साइंस बतावै कै पाद में कार्बनडाईऑक्साइड, नाइट्रोजन, मिथेन, हाइड्रोजन अर ऑक्सीजन रो मिश्रण होवै जिको आपणी खुराक री पाचन प्रक्रिया अर सरीर री वात सूं बणै। के मिनख के जिनावार…, पांख पखेरूवां रै ई पाद बिना नीं सरै ! योग में तो ‘पवनमुक्तासन’ नांव रो अेक आसन ई है जिण सूं अपानवायु बारै निसरै। आ सागी वात आयुर्वेद रो आधार है। स्याणा डॉक्टर बतावै, अेक स्वस्थ आदमी दिन में 12 सूं 15 बार पादै, कदे पूं….कदे टूं….कदे ठस अर कदे धूमधड़ाका !
ल्यो फेर अेक बात भळै सुणो पाद री
अेक जाट आपरा मोठ लेय’र मंडी बेचण सारू गयो। बो आढतियै री दुकान पर बैठ्यो हो, कै पाद निसरग्यो, ‘पूं….’। गल्लै पर बैठ्यै बाणियो सुण लियो, झट बोल्यो, ‘ल्या, पूं गो पीसो !’ जाट बोल्यो, क्यां रा पीसा ? बाणियो बोल्यो, तन्नै ठाह कोनी के, पादणै पर राजाजी जुरमानो लगा राख्यो है, ‘पूं’ करतां ई पइसा देवणा पड़ै।’ जाट लाई कांई करतो, एक पीसो काड’र झला दियो। कड्डी अर रोट ठोक’र चाल्यो हो, बीं रै तो फेर असर होग्यो, अबकाळै ‘टूं’ निसरग्यो। बाणियै रै सागी बाण, ‘ल्या टूं रो टक्को !’ जाट अणमणै होय’र अेक टक्को और झला दियो, मटी आ तो माड़ी होई। बाणियो अणूतो राजी, आज तो जाट नै ठग लियो।
भागजोग सूं महीनै डेढ महीनै पछै बाणियो फसलबाड़ी देखण सारू जाट री ढाणी पूग्यो। जाट आवबेस दी। बाणियो ई आज घर सूं पापड़ बड़ी रो साग अर दही कांदा जीमेड़ो हो, मांचौ पर बैठ्तां ई पाद निसरग्यो, ‘ठस्स’। जाट रा कान तेज हा, सुण लियो, मुळक’र बोल्यो-‘ठस…..ल्या रिपिया दस’। अबै बाणियो बोलै ई के, जाट सामीं देखतै बोलैबालै दस रिपिया झला दिया…..।
आज री हथाई रो सार ओ है, कै गैली गूंगी बातां में ई की तत होया करै। पाद अर छींक बिना कद सरै…। जे निरोग रैवणो है तो बाव सुरणो ई चाइजै। रैयी बात लोगां री, बै तो छींकतां रो ई नाक बाढ़ै, बान्नै के धारणो ! बाकी बातां आगली हथाई में। आपरो ध्यान राखो, रसो अर बस्सो….।
-लेखक राजस्थानी व हिंदी साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर हैं





