




ग्राम सेतु ब्यूरो.
हनुमानगढ़ जिले के संगरिया क्षेत्र में बीती रात पर्यावरण संरक्षण की परंपरा एक बार फिर जीवित दिखी, जब कोर्ट रोड पर स्थित एक विशाल और वर्षों पुराना खेजड़ी का पेड़ अवैध कटाई से बचा लिया गया। यह संभव हुआ एक साहसी महिला की सतर्कता और त्वरित विरोध के कारण, जिसने अंधेरे का फायदा उठाकर पेड़ काटने की कोशिश कर रहे लोगों के मंसूबों पर पानी फेर दिया। जानकारी के अनुसार, कोर्ट रोड की मुख्य सड़क पर स्थित इस खेजड़ी के पेड़ को कुछ लोग पिछले कई दिनों से काटने की कोशिश कर रहे थे। दिन में टैक्सी स्टैंड से जुड़े लोगों की मौजूदगी के कारण वे सफल नहीं हो पा रहे थे। बीती रात करीब आठ बजे दुकानें बंद होने के बाद उन्होंने इसे ‘सही मौका’ समझा और कटाई शुरू कर दी।

पास में रहने वाली कल्पना बिश्नोई ने खट-खट की आवाज सुनी तो बाहर निकलकर देखा। सामने दृश्य चौंकाने वाला था। शिवबाड़ी का एक कर्मचारी सीढ़ी लगाकर खेजड़ी के तने पर आरी चला रहा था। कल्पना बिश्नोई ने बिना देरी किए जोरदार ललकार लगाई। आवाज सुनते ही कुछ और लोग भी मौके पर आ गए। खुद को घिरता देख आरोपी भागकर पड़ोस के परिसर में जा छिपा।
कुछ ही देर में आसपास के लोग भी जुट गए। मौके पर मौजूद प्रधान ने सफाई दी कि किसी न्यायाधीश के दौरे के कारण बार संघ से आदेश आया था, इसलिए यह कृत्य किया जा रहा था। हालांकि यह तर्क किसी के गले नहीं उतरा। सूचना मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुंची। इसके बाद एडवोकेट संजय आर्य ने अपने साथियों के साथ थाने में नामजद प्रार्थना पत्र देकर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।
4 अप्रैल की सुबह खेजड़ी काटने के प्रयास की खबर फैलते ही बिश्नोई समाज सहित सर्वसमाज के लोग मौके पर एकत्र हो गए और कड़ा आक्रोश जताया। लोगों का कहना था कि खेजड़ी केवल पेड़ नहीं, बल्कि उनकी आस्था, संस्कृति और पर्यावरणीय जिम्मेदारी का प्रतीक है। स्थानीय पुलिस प्रशासन ने मुख्य लोगों को आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया, इसके बाद सभी लोग उपखंड कार्यालय पहुंचे।
संगरिया एसडीएम जय कौशिक को प्रतिनिधिमंडल ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी और ज्ञापन सौंपा। पर्यावरण कार्यकर्ता विनोद बिश्नोई ने बताया कि यह कोई पहली घटना नहीं है। पूर्व में भी शिवबाड़ी परिसर के बाहर और भीतर पेड़ काटे जा चुके हैं। एक माह पहले क्रांति चौक पर शहर की स्थापना काल का पेड़ भी काट दिया गया था, लेकिन तब भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि प्रशासन की अनदेखी के कारण पेड़ काटने वालों के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि दोषियों के खिलाफ वन अधिनियम और पर्यावरण संरक्षण कानूनों के तहत तुरंत कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। मौके पर बिश्नोई समाज के प्रधान रामस्वरूप मंडा, उपाध्यक्ष ओम धारणिया, कल्पना बिश्नोई सहित बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा और टैक्सी यूनियन के पदाधिकारी मौजूद रहे।







