





ग्राम सेतु डेस्क
सुबह से ही बिश्नोई धर्मशाला के प्रांगण में हलचल थी। कहीं पंजीकरण की कतार, कहीं डॉक्टरों से परामर्श लेते मरीज, तो कहीं योग और काढ़े की खुशबू के बीच स्वास्थ्य को लेकर जागरूक चर्चा। वाग्भट वैलनेस एवं आयुष रिसर्च सेंटर के तत्वावधान में हनुमानगढ़ टाउन में आयोजित विशाल निःशुल्क आयुर्वेद एवं नेचुरोपैथी चिकित्सा शिविर में 150 से अधिक लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। दीप प्रज्वलन के साथ शुरू हुए इस शिविर में अनुभवी चिकित्सकों ने न केवल रोगों का उपचार किया, बल्कि स्वस्थ और संतुलित जीवनशैली का संदेश देकर कार्यक्रम को जनहितकारी स्वास्थ्य अभियान का रूप दे दिया।
शिविर का उद्घाटन राजकीय आयुर्वेद प्राकृतिक चिकित्सालय के उपनिदेशक डॉ. तीर्थ राज शर्मा, व्यापार मंडल शिक्षा समिति के अध्यक्ष बलकृष्ण गोल्याण, समाजसेवी त्रिभुवन सिंह राजवी, हरी प्रकाश खदरिया, अरुण अग्रवाल, अश्वनी पूनिया, अमित महेश्वरी, राजेश दादरी सहित अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा सामूहिक रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।
शिविर में अनुभवी आयुर्वेद एवं नेचुरोपैथी विशेषज्ञों की टीम ने अपनी सेवाएं प्रदान कीं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. देवेन्द्र सैनी, डॉ. राकेश बागोरिया एवं डॉ. ज्योति ने मरीजों की गहन जांच कर रोगानुसार परामर्श एवं उपचार प्रदान किया। साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने हेतु ‘वाग्भट अमृत काढ़ा’ निःशुल्क वितरित किया गया, जिसे लोगों ने अत्यंत उपयोगी बताया।
योग शिक्षक अतुल ने ‘करोगे योग, रहोगे निरोग” का संदेश देते हुए नियमित योग एवं प्राणायाम अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि स्वस्थ जीवन के लिए योग, संतुलित आहार एवं सकारात्मक दिनचर्या अत्यंत आवश्यक है। शिविर में आवश्यक आयुर्वेदिक औषधियां भी नाममात्र शुल्क पर उपलब्ध करवाई गईं।
शिविर में किडनी रोग, लीवर संबंधी समस्याएं, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, अनिद्रा, थायराइड, मोटापा, जोड़ों एवं घुटनों का दर्द, रीढ़ की हड्डी के विकार, स्लिप डिस्क (एल-4 एवं एल-5), नसों की समस्याएं, मिर्गी, अस्थमा, नजला-जुखाम सहित अनेक जटिल एवं दीर्घकालिक रोगों का आयुर्वेद एवं नेचुरोपैथी पद्धति से उपचार एवं मार्गदर्शन प्रदान किया गया। विशेषज्ञों ने रोगों के मूल कारणों को समझाते हुए प्राकृतिक एवं संतुलित जीवनशैली अपनाने पर विशेष बल दिया।
श्री गुरु गोबिंद सिंह चौरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं वाग्भट वैलनेस एवं आयुष रिसर्च सेंटर के संस्थापक बाबूलाल जुनेजा ने कहा कि इस प्रकार के चिकित्सा शिविर समाज के लिए अत्यंत उपयोगी एवं जनकल्याणकारी सिद्ध हो रहे हैं। वर्तमान समय में बढ़ती जीवनशैली जनित बीमारियों के बीच आयुर्वेद एक सुरक्षित, प्रभावी एवं विश्वसनीय चिकित्सा पद्धति के रूप में तेजी से उभर रहा है। उन्होंने लोगों से नियमित स्वास्थ्य परीक्षण करवाने तथा स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की अपील की।
राजकीय आयुर्वेद प्राकृतिक चिकित्सालय के उपनिदेशक डॉ. तीर्थ राज शर्मा ने कहा कि स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है। उन्होंने आयुर्वेद को भारतीय संस्कृति एवं परंपरा का अमूल्य विज्ञान बताते हुए कहा कि यह केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के संतुलन का आधार है। उन्होंने प्राकृतिक जीवनशैली अपनाने, संतुलित आहार लेने एवं नियमित दिनचर्या का पालन करने की सलाह दी तथा इस निःशुल्क चिकित्सा शिविर के सफल आयोजन हेतु आयोजकों की सराहना की।
व्यापार मंडल शिक्षा समिति के अध्यक्ष बालकृष्ण गोल्याण ने कहा कि हनुमानगढ़ जिले में वाग्भट वैलनेस एवं आयुष रिसर्च सेंटर की स्थापना अत्यंत सराहनीय पहल है। यह प्रयास हमारे ऋषि-मुनियों द्वारा प्रदत्त प्राचीन आयुर्वेद पद्धति को पुनर्जीवित करने का कार्य कर रहा है। उन्होंने सेंटर के संस्थापक बाबूलाल जुनेजा एवं उनकी टीम को इस जनसेवा के लिए साधुवाद दिया।
शिविर में आए सभी मरीजों को उनकी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार आहार-विहार, दिनचर्या एवं जीवनशैली से संबंधित महत्वपूर्ण सुझाव भी प्रदान किए गए। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा आयोजन की मुक्तकंठ से सराहना की।
इस शिविर के सफल आयोजन में प्रशासक जयवीर सिंह, विपणन कार्यकारी विकास भादू, मलकीत सिंह, चिकित्सीय सहयोगी कमलेश एवं पूजा, औषधि विशेषज्ञ राजकुमार, विक्रम, नर्सिंग अधिकारी कनुप्रीत कौर तथा आयुष, नर्सिंग एवं पैरामेडिकल विभाग के विद्यार्थियों सहित वाग्भट टीम के सभी सदस्यों का विशेष योगदान रहा।
यह शिविर क्षेत्र में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने, आयुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सा के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत करने तथा ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र के लोगों को सुलभ चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक प्रेरणादायक एवं जनहितकारी पहल सिद्ध हुआ।






