




ग्राम सेतु ब्यूरो.
प्रदेश में निकाय और पंचायत चुनावों की तैयारियां अब निर्णायक चरण में पहुंच गई हैं। राज्य सरकार के तय कार्यक्रम के अनुसार 15 अगस्त तक सभी निकायों और पंचायतों में आरक्षण की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। इससे पहले ओबीसी राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग 5 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा, जिसके आधार पर विभिन्न निकायों और पंचायतों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षित सीटों का निर्धारण किया जाएगा। इसके साथ ही चुनावी प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है।
रविवार देर रात प्रदेशभर में ओबीसी सर्वे का कार्य पूरा हो गया। इस सर्वे के दौरान 76 लाख परिवारों का डाटा एकत्र किया गया, जिसमें शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के ओबीसी परिवारों की अलग-अलग सूची तैयार की गई है। आयोग अब इस आंकड़े का विश्लेषण कर प्रत्येक निकाय और पंचायत में ओबीसी की वास्तविक आबादी का निर्धारण करेगा।
प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश में पहली बार निकाय और पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण का निर्धारण ओबीसी राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग की रिपोर्ट के आधार पर किया जा रहा है। आयोग ने प्रदेश में ओबीसी की कुल आबादी करीब 3.80 करोड़ मानी है। इसी आधार पर यह तय होगा कि किस निकाय या पंचायत में कितनी सीटें ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित होंगी।
सर्वे के आंकड़ों के अनुसार जयपुर जिले में सबसे अधिक 5.44 लाख ओबीसी परिवार दर्ज किए गए हैं। इसके बाद सीकर में लगभग 3.75 लाख, जोधपुर में 3.58 लाख और झुंझुनूं में 3.33 लाख परिवार शामिल हैं। इन जिलों में ओबीसी आबादी का अनुपात अधिक होने के कारण यहां आरक्षण का प्रभाव भी अपेक्षाकृत ज्यादा देखने को मिल सकता है।
आरक्षण का निर्धारण केवल ओबीसी आबादी के आधार पर नहीं होगा, बल्कि संविधान और न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के आरक्षण को भी ध्यान में रखा जाएगा। प्रदेश में ओबीसी के लिए अधिकतम 21 प्रतिशत तक आरक्षण का प्रावधान रखा गया है, लेकिन किसी निकाय या पंचायत में एससी और एसटी की आबादी अधिक होने पर ओबीसी आरक्षण का प्रतिशत कम हो सकता है।
इसे एक उदाहरण से समझा जा सकता है। यदि किसी निकाय में एससी और एसटी की संयुक्त आबादी के आधार पर 35 प्रतिशत सीटें पहले से आरक्षित हो जाती हैं, तो कुल आरक्षण की सीमा को देखते हुए वहां ओबीसी के लिए केवल 15 प्रतिशत सीटें ही आरक्षित की जा सकती हैं। यानी प्रत्येक निकाय और पंचायत में आरक्षण का प्रतिशत स्थानीय आबादी के अनुपात के अनुसार अलग-अलग होगा।
अब सभी की निगाहें आयोग की रिपोर्ट पर टिकी हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार आरक्षण की अंतिम सूची जारी करेगी और इसके साथ ही निकाय एवं पंचायत चुनावों की अधिसूचना जारी करने की प्रक्रिया भी तेज हो जाएगी। चुनावी तैयारियों के इस महत्वपूर्ण चरण को स्थानीय लोकतांत्रिक संस्थाओं के गठन की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।







