







ग्राम सेतु डॉट कॉम
हनुमानगढ़ जिले में पंचायतीराज चुनाव का प्रस्तावित कार्यक्रम इस बार बेहद ऐतिहासिक और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होने जा रहा है। जिला गठन के बाद यह पहला मौका होगा जब जिले की 10 पंचायत समितियों में पंचायतीराज चुनाव करवाए जाएंगे। इसका सीधा अर्थ यह है कि इस बार जिले में 10 प्रधान चुने जाएंगे। शहरी निकाय चुनावों की सरगर्मी समाप्त होने के बाद अब समूचे जिले की नजरें ग्रामीण सत्ता के इस महामुकाबले पर टिक गई हैं। जिले के पंचायतीराज इतिहास में इस बार सबसे बड़ा बदलाव जिला मुख्यालय के प्रशासनिक ढांचे में देखने को मिला है। हनुमानगढ़ टाउन और हनुमानगढ़ जंक्शन को अलग-अलग अस्तित्व देते हुए दो स्वतंत्र पंचायत समितियों का रूप दिया गया है।
इस पुनर्गठन के बाद हनुमानगढ़ जंक्शन पंचायत समिति अलग से बनाई गई है। इसके अधिकार क्षेत्र में कुल 23 ग्राम पंचायतें शामिल की गई हैं। हनुमानगढ़ टाउन पंचायत समिति के तहत 30 ग्राम पंचायतों को रखा गया है। इस नई व्यवस्था से स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों में तेजी आने और ग्रामीण क्षेत्रों की प्रशासनिक पहुंच सुगम होने की उम्मीद जताई जा रही है।
नवीनतम परिसीमन और पुनर्गठन के चलते हनुमानगढ़ जिले में ग्राम पंचायतों की कुल संख्या बढ़कर 325 तक पहुंच गई है। ग्राम पंचायतों की संख्या में बढ़ोतरी से न केवल जनप्रतिनिधियों का दायरा बढ़ेगा, बल्कि गांवों के बुनियादी विकास के लिए बजट आवंटन और योजनाओं की निगरानी भी बेहतर ढंग से हो सकेगी। खास बात है कि नोहर पंचायत समिति क्षेत्र में सर्वाधिक 59, पीलीबंगा में 43, टिब्बी में 33, हनुमानगढ़ टाउन में 30, जंक्शन में 23, रावतसर में 30, राजपुरा में 39, संगरिया में 27, भादरा में 26, पल्लू में 25 ग्राम पंचायत होंगी।
चुनाव की आहट के साथ ही ग्रामीण इलाकों में राजनीतिक जोड़-तोड़ शुरू हो चुकी है। आगामी 23 और 24 सितंबर को आरक्षण की लॉटरी निकाली जाएगी, जिसके बाद प्रत्याशियों की तस्वीर स्पष्ट होगी। इसके तहत 23 सितंबर को जिला मुख्यालय पर जिला परिषद के सदस्यों, पंचायत समितियों के डायरेक्टरों और 10 पंचायत समितियों के प्रधान पदों के लिए आरक्षण लॉटरी निकाली जाएगी। जबकि 24 सितंबर को उपखंड स्तर पर संबंधित क्षेत्रों के सरपंचों और वार्ड पंचों के पदों के लिए वर्गवार आरक्षण तय किया जाएगा। आरक्षण लॉटरी निकलते ही विभिन्न राजनीतिक दलों के दिग्गज, स्थानीय कार्यकर्ता और संभावित उम्मीदवार अपनी चुनावी गोटियां बिछाना शुरू कर देंगे।
उच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों और स्पष्ट आदेशों के अनुरूप इस बार राज्य निर्वाचन आयोग को 15 नवंबर से पहले पंचायतीराज चुनाव संपन्न करवाने की कानूनी बाध्यता है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, 24 सितंबर को आरक्षण प्रक्रिया पूरी होते ही राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा किसी भी समय चुनाव तिथियों का आधिकारिक ऐलान किया जा सकता है। अधिसूचना जारी होते ही जिले के ग्रामीण अंचल में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी। संभावित प्रत्याशी अभी से अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय हो गए हैं और चौपालों पर चुनावी चर्चाओं का दौर शुरू हो चुका है।






