




ग्राम सेतु ब्यूरो.
हनुमानगढ़ में राजस्थान किसान आयोग के अध्यक्ष सीआर चौधरी के प्रस्तावित दौरे से पहले किसान राजनीति गरमा गई है। आयोग अध्यक्ष आज यानी 30 जुलाई को दोपहर 12 बजे एसकेडी यूनिवर्सिटी कैंपस में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के प्रतिनिधियों से संवाद करेंगे। बैठक को लेकर प्रशासन की ओर से तैयारियां पूरी कर ली गई हैं, लेकिन इससे पहले किसान संगठन और प्रशासन के बीच वार्ता के स्वरूप को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
अतिरिक्त जिला कलक्टर उम्मेदीलाल मीना ने भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के जिलाध्यक्ष रेशम सिंह माणुका को पत्र भेजकर किसान प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक में शामिल होने का आग्रह किया है। प्रशासन का उद्देश्य आयोग अध्यक्ष और किसान प्रतिनिधियों के बीच संवाद स्थापित कर किसानों की समस्याओं को सुनना बताया जा रहा है।
हालांकि, भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के जिलाध्यक्ष रेशम सिंह माणुका ने इस व्यवस्था पर खुलकर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन किसानों से खुला संवाद करने के बजाय केवल चुनिंदा प्रतिनिधियों तक बातचीत सीमित रखना चाहते हैं। उनका कहना है कि जिन किसानों ने समस्याएं झेली हैं, उन्हें सीधे आयोग अध्यक्ष के सामने अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए।
रेशम सिंह माणुका ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में कहा कि यदि सीआर चौधरी स्वयं किसान परिवार से आते हैं, तो उन्हें किसानों के बीच जाकर उनकी बातें सुननी चाहिए। उन्होंने कहा कि आयोग अध्यक्ष को सीमित बैठक करने के बजाय सर्किट हाउस, जिला कलक्ट्रेट या संयुक्त निदेशक कृषि कार्यालय जैसे सार्वजनिक स्थान पर किसानों के बीच संवाद करना चाहिए।
माणुका ने प्रशासन की मंशा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन खुली बैठक से बच रहा है तो इससे यह संदेश जाता है कि कहीं न कहीं कोई खोट है। उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी सवाल किया कि क्या उन्हें अपने ही क्षेत्र के किसानों पर भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा कि हनुमानगढ़ के किसान हमेशा जनप्रतिनिधियों का सम्मान करते आए हैं, ऐसे में किसानों से खुला संवाद करने में किसी को डरना नहीं चाहिए।
किसान नेता ने गुरुवार सुबह नौ बजे किसानों से सर्किट हाउस पहुंचने की अपील भी की है। उन्होंने कहा कि किसान अपनी मांगों को मजबूती से रखेंगे और यदि उनकी बात नहीं सुनी गई तो राष्ट्रीय किसान नेता राकेश टिकैत, जोगेंद्र सिंह उगराहा तथा भारतीय किसान यूनियन सिद्धूपुर के वरिष्ठ नेताओं को भी हनुमानगढ़ बुलाया जाएगा। इससे आंदोलन को और व्यापक रूप दिए जाने के संकेत भी मिले हैं।
उधर, सूत्रों के अनुसार रेशम सिंह माणुका के इस रुख से आयोग अध्यक्ष की प्रस्तावित वार्ता में गतिरोध की स्थिति बन सकती है। प्रशासन फिलहाल मध्यस्थता कर विवाद का समाधान निकालने का प्रयास कर रहा है ताकि बैठक शांतिपूर्ण और सकारात्मक माहौल में हो सके।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जैसे किसान बहुल क्षेत्रों में किसानों और भाजपा के बीच दूूरी लगातार बढ़ती जा रही है। सरकार चुनाव से पहले ‘नुकसान पर नियंत्रण’ का तरीक अपनाना चाहती है। जानकारों का कहना है कि किसानों से बातचीत की पहल प्रशासनिक स्तर के बजाय राजनीतिक और संगठनात्मक स्तर पर अधिक प्रभावी हो सकती है। यदि स्थानीय जनप्रतिनिधि और भाजपा संगठन सीधे किसानों के साथ संवाद स्थापित करें तो कई विवाद प्रारंभिक स्तर पर ही समाप्त हो सकते हैं। ऐसे में 30 जुलाई की बैठक केवल किसानों की समस्याओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह सरकार, प्रशासन और किसान संगठनों के बीच विश्वास बहाली की भी एक महत्वपूर्ण परीक्षा मानी जा रही है।







