






ग्राम सेतु डॉट कॉम
रक्षाबंधन पर जब बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है तो उसमें केवल रेशम का धागा नहीं होता, उसमें प्रेम, विश्वास और रक्षा का संकल्प बंधा होता है। लेकिन हनुमानगढ़ के सरस्वती कान्वेंट स्कूल की इन नन्ही बेटियों ने इस पवित्र रिश्ते का दायरा घर की चौखट से कहीं आगे बढ़ा दिया। जिन भाइयों की कलाइयां बहनों की राखियों से सूनी रह जाती हैं, उन्हीं सरहदी वीरों को इन बच्चियों ने अपनी मेहनत से बनाई राखियां भेजकर कहा-‘आप सीमा पर डटे रहिए, हम आपके साथ हैं।’
भारतीय डाक विभाग के ‘राखी से रक्षा’ अभियान से जुड़ते हुए सरस्वती कान्वेंट स्कूल की छात्राओं ने देश की सीमाओं पर तैनात वीर जवानों के लिए 100 से अधिक नहीं, बल्कि 200 से अधिक राखियां तैयार कीं। कक्षा 1 से 10 तक की करीब 200 बेटियों ने कई दिनों तक मेहनत कर रंगीन धागों, रेशम, मोतियों, कुंदन और फूलों से राखियां बनाईं। हर राखी में बच्चों का स्नेह था और हर लिफाफे में सैनिकों के लिए दुआ, शुभकामना और कृतज्ञता का संदेश।
स्कूल परिसर में सुबह से ही देशभक्ति का वातावरण था। नन्हे हाथ जब राखियों को अंतिम रूप दे रहे थे तो ऐसा लग रहा था मानो हर बच्ची अपनी भावनाओं को एक धागे में पिरो रही हो। किसी राखी में तिरंगे के रंग दिखाई दिए तो किसी में फूलों और मोतियों की खूबसूरती। लेकिन इन राखियों की असली खूबसूरती उनमें छिपे उस भाव में थी, जिसे शब्दों में बांधना मुश्किल है, देश की रक्षा करने वाले सैनिकों के प्रति सम्मान।
कक्षा 5 की छात्रा ईशानी ने सैनिकों के नाम संदेश में कहा, ‘आप दूर रहकर हमारी रक्षा करते हो। ये राखी हमारी तरफ से प्यार और दुआ है। आप सुरक्षित रहो और जल्दी घर आओ। हम सबको आप पर गर्व है।’
कक्षा 9 की भूमिका ने कहा, ‘हम पढ़ रहे हैं क्योंकि आप जाग रहे हैं। इस रक्षाबंधन पर हमारी ये छोटी-सी राखी स्वीकार करना। आप ही हमारे असली हीरो हो। जय हिंद!’
कक्षा 8 की प्राची मिमानी ने कहा, ‘सीमा पर आपकी हिम्मत से ही हमारे घर में खुशियों का त्योहार मन पाता है। ये राखी सिर्फ धागा नहीं, पूरे स्कूल की दुआ है। सुरक्षित रहिए।’
मकूनस प्लेविग की बेटी गविशा ने सैनिकों को संदेश देते हुए कहा, ‘सरहद पर आपकी हिम्मत से ही हमारे घर में खुशियां हैं। यह राखी सिर्फ धागा नहीं, 140 करोड़ देशवासियों की ताकत है। आप डटे रहो, हम आपके साथ हैं।’
कार्यक्रम में स्कूल की प्रधानाचार्या सीमा माहेश्वरी ने कहा कि आज बच्चे केवल त्योहार नहीं मना रहे, बल्कि देश के प्रति अपना कर्तव्य भी निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब सैनिकों को विद्यार्थियों के हाथों से बनी राखियां और प्यार भरे पत्र मिलेंगे तो निश्चित रूप से उनका मनोबल और बढ़ेगा।
मोनिका शर्मा ने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के रिश्ते का प्रतीक नहीं, बल्कि रक्षा और समर्पण का पर्व भी है। स्कूल के बच्चों ने ‘एक राखी हमारे वीर जवानों के नाम’ अभियान के तहत मेहनत से बनाई राखियां उन जवानों के लिए भेजी हैं, जो सरहद पर रहकर देश की रक्षा कर रहे हैं। उन्होंने डाक विभाग, शिक्षकगण और अभिभावकों का आभार जताते हुए कहा कि बच्चों को इस पुण्य कार्य के लिए प्रेरित करने में सभी का सहयोग रहा।
इस अवसर पर पोस्ट ऑफिस के पोस्टमास्टर ने स्कूल में विशेष काउंटर लगाकर सभी पार्सल एकत्र किए। उन्होंने बताया कि डाक विभाग रक्षाबंधन पर इस तरह के अभियान के माध्यम से आम नागरिकों और सैनिकों के बीच भावनात्मक सेतु मजबूत करने का प्रयास करता है। स्कूल से प्राप्त राखियां और शुभकामना पत्र सेना की विभिन्न यूनिट्स के नाम रवाना किए गए।
स्कूल प्रबंधन ने घोषणा की कि हर वर्ष रक्षाबंधन पर इस अभियान को और बड़े स्तर पर आयोजित किया जाएगा, ताकि बच्चों में देशसेवा, त्याग और बलिदान की भावना मजबूत हो तथा आने वाली पीढ़ी यह समझ सके कि देश की रक्षा केवल सीमा पर खड़े सैनिकों का दायित्व नहीं, बल्कि उनके पीछे खड़े करोड़ों देशवासियों की भी जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के अंत में जब स्कूल परिसर में बच्चों की आवाज एक साथ गूंजी, ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम्’ तो माहौल भावुक हो उठा। उन नन्हे कंठों में निकले जयघोष ने मानो हजारों किलोमीटर दूर सीमा पर खड़े सैनिकों तक यह संदेश पहुंचा दिया कि वे अकेले नहीं हैं।
सरस्वती कान्वेंट की इन बेटियों ने साबित कर दिया कि देशभक्ति उम्र नहीं देखती। कभी-कभी सबसे मजबूत हौसला उन्हीं नन्हे हाथों से निकलता है, जिनमें अभी कलम ठीक से थमी होती है। आज इन बच्चियों ने राखी नहीं भेजी, उन्होंने सरहद पर खड़े हर सैनिक की कलाई तक अपना प्यार, सम्मान और पूरे देश की दुआ पहुंचाई है।







