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हनुमानगढ़ जंक्शन स्थित अरिहंत भवन का माहौल आज श्रद्धा और राष्ट्रसेवा की भावना से सराबोर नजर आया। कांग्रेस सेवादल के पदाधिकारी और कार्यकर्ता एकत्र हुए और सेवादल के संस्थापक डॉ. नारायण सुब्बाराव हर्डिकर की पुण्यतिथि पर उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान वक्ताओं ने डॉ. हर्डिकर के त्याग, अनुशासन, संगठन निर्माण और स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान को याद करते हुए उनके आदर्शों को आत्मसात करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में पर्यवेक्षक दिनेश सूड़ा, पीसीसी सदस्य भूपेन्द्र चौधरी, पूर्व जिला प्रमुख कविता मेघवाल, सेवादल जिलाध्यक्ष अश्विनी पारीक, ब्लॉक अध्यक्ष जिनेन्द्र जैन, संदीप सिद्धू और गुरमीत चंदड़ा ने डॉ. हर्डिकर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।
सेवादल जिलाध्यक्ष अश्विनी पारीक ने कहा कि डॉ. हर्डिकर का पूरा जीवन देशसेवा, अनुशासन और संगठन निर्माण के लिए समर्पित रहा। उन्होंने युवाओं को स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ने के साथ उनमें सेवा भावना और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित करने का कार्य किया।
वक्ताओं ने डॉ. हर्डिकर के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उनका जन्म 7 मई 1889 को कर्नाटक के धारवाड़ में हुआ था। उन्होंने अमेरिका की मिशिगन यूनिवर्सिटी से पब्लिक हेल्थ में उच्च शिक्षा प्राप्त की। अमेरिका प्रवास के दौरान वे स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय के संपर्क में आए। इसके बाद उन्होंने लाला लाजपत राय द्वारा स्थापित इंडिया होम रूल लीग ऑफ अमेरिका के प्रमुख सहयोगी और संगठन सचिव के रूप में भी कार्य किया।
पीसीसी सदस्य भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि वर्ष 1923 के नागपुर झंडा सत्याग्रह के बाद डॉ. हर्डिकर ने स्वतंत्रता आंदोलन को मजबूत बनाने के लिए अनुशासित और संगठित स्वयंसेवकों की आवश्यकता महसूस की। इसी उद्देश्य से उन्होंने हिंदुस्तानी सेवादल की स्थापना की, जो आगे चलकर कांग्रेस सेवादल के रूप में जाना गया।
समन्वयक दिनेश सूड़ा ने बताया कि पंडित जवाहरलाल नेहरू हिंदुस्तानी सेवादल के पहले अध्यक्ष बने, जबकि डॉ. हर्डिकर ने इसके मुख्य संगठनकर्ता के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि सेवादल की स्थापना का उद्देश्य युवाओं में अनुशासन, सेवा और राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करना था।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी डॉ. हर्डिकर का सार्वजनिक जीवन राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित रहा। वे वर्ष 1952 से 1962 तक राज्यसभा के सदस्य रहे। समाज और राष्ट्र निर्माण में उनके निस्वार्थ योगदान के लिए वर्ष 1958 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। 26 अगस्त 1975 को उनका निधन हुआ।
इस अवसर पर दयाराम जाखड़, कृष्ण नेहरा, जयदेव भीड़ासरा, अनिल तिवाड़ी, महेन्द्र चतुर्वेदी, लोकेन्द्र भाटी, प्रकाश जैन, संजय होटला, गौरव दयोड़ा, हेतराम भाटी, धर्मेन्द्र बजाज, नवदीप राणा, रिजवान खान, इशाक चायनान, शिशुपाल लदोईया, मामराज परिहार, खुशी अमलानी, आमिर खान, शाहरूख कुरैशी, जयपाल गिरी, दीपक डाबला, हीरालाल, जगदीश और अनूप चौधरी सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।





