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देश के ऊर्जा एवं संसाधन क्षेत्र में एक बड़ा मील का पत्थर स्थापित करते हुए सार्वजनिक क्षेत्र की श्महारत्नश् कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड ने राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में पोटाश के वैज्ञानिक अन्वेषण की ऐतिहासिक शुरुआत की है। स्वतंत्रता के बाद यह पहला अवसर है जब किसी कॉरपोरेट इकाई ने कंपोजिट लाइसेंस के तहत देश में पोटाश खनिज के वैज्ञानिक अन्वेषण का कार्य हाथ में लिया है। यह परियोजना जिले के अंतर्गत आने वाले जोड़कियाँ-सतीपुरा-खुंजा अमलगमेटेड पोटाश एवं हैलाइट ब्लॉक में शुरू की गई है।
पोटाश भारत के कृषि क्षेत्र और फसल उत्पादन के लिए अनिवार्य प्राथमिक उर्वरक खनिजों में से एक है। वर्तमान में भारत अपनी पोटाश आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए बड़े पैमाने पर विदेशी आयातों पर निर्भर है। घरेलू स्तर पर पोटाश के प्रचुर भंडारों की पहचान और उनके वैज्ञानिक दोहन से न केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भरता कम होगी, बल्कि देश की दीर्घकालिक खाद्य सुरक्षा भी सुदृढ़ होगी।
कृषि उत्पादन में इसकी अहम भूमिका को रेखांकित करते हुए ऑयल इंडिया ने इस अन्वेषण अभियान की आधिकारिक टैगलाइन ‘पोटाश हमारी भूख को मिटा सकती है’ निर्धारित की है। कंपनी का उद्देश्य घरेलू पोटाश संसाधनों को विकसित कर देश के किसानों और उर्वरक उद्योग को स्थायी संबल प्रदान करना है।
केंद्र सरकार द्वारा आयोजित पारदर्शी एवं प्रतिस्पर्धी नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से ऑयल इंडिया ने हनुमानगढ़ स्थित 16.99 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैले इस पोटाश एवं हैलाइट ब्लॉक का कंपोजिट लाइसेंस हासिल किया है। इस क्षेत्र में आधुनिक वैज्ञानिक प्रणालियों और बहुविषयक तकनीकों के जरिए अन्वेषण कार्य को गति दी जाएगी।
इस अन्वेषण परियोजना के तहत भूमिगत पोटाश भंडार के सटीक आकार, गुणवत्ता और फैलाव का पता लगाने के लिए उन्नत वैज्ञानिक अध्ययन किए जाएंगे। भूमिगत पोटाश संरचना की विस्तृत मैपिंग की जाएगी, जिससे उसके त्रि-आयामी (3डी) मॉडल और विस्तार का सही अनुमान लगाया जा सके। संयुक्त राष्ट्र रूपरेखा वर्गीकरण के मानकों के अनुरूप जी2 स्तर का अन्वेषण कार्य संपन्न किया जाएगा।
ब्लॉक की भूगर्भीय स्थिरता और जल संरचना का विश्लेषण करने के लिए व्यापक हाइड्रोजियोलॉजिकल तथा जियोटेक्निकल अध्ययन भी किए जाएंगे।
पारंपरिक रूप से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के उत्पादन से जुड़ी ऑयल इंडिया अब देश के रणनीतिक और महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र में अपने कदम तेजी से बढ़ा रही है। पोटाश के साथ-साथ कंपनी ने भविष्य की औद्योगिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ग्रेफाइट और वैनेडियम जैसे अहम खनिजों के अन्वेषण में भी प्रवेश किया है।
कंपनी प्रबंधन के अनुसार, महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में विस्तार की यह दूरदर्शी रणनीति ऑयल इंडिया के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. रंजीत रथ तथा निदेशक (अन्वेषण एवं विकास) सलोमा योमडो के नेतृत्व में तैयार की गई है। हनुमानगढ़ में शुरू हुआ यह वैज्ञानिक अन्वेषण आने वाले समय में देश को उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में गेमचेंजर साबित हो सकता है।






