






एमएल शर्मा
भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास का एक भावुक अध्याय बंद हुआ है। भारतीय महिला क्रिकेटर हरमनप्रीत कौर ने सभी प्रारूपों की कप्तानी से विदाई लेकर केवल एक पद नहीं छोड़ा, बल्कि उस जिम्मेदारी को अपने कंधों से उतारा है, जिसे उन्होंने वर्षों तक जीत, हार, आलोचना, दबाव और करोड़ों उम्मीदों के बीच उठाया। कप्तानी का ताज दूर से जितना चमकदार दिखाई देता है, उसके भीतर छिपा बोझ उतना ही भारी होता है। लेकिन ‘हेरी दी’ ने इस बोझ को लंबे समय तक पूरी शिद्दत से उठाया। अब ताज किसी और के सिर सजेगा, लेकिन उस ताज की चमक में हरमनप्रीत के योगदान की रोशनी हमेशा दिखाई देगी।
हरमनप्रीत का सफर केवल आंकड़ों, रिकॉर्ड और ट्रॉफियों का सफर नहीं रहा। उन्होंने उस दौर में भारतीय महिला टीम की कमान संभाली, जब देश में महिला क्रिकेट को लेकर उम्मीदें तेजी से बढ़ रही थीं। हर मैच के साथ अपेक्षाएं बढ़ीं और हर हार के बाद सवाल भी। प्लेइंग इलेवन से लेकर रणनीति तक, बल्लेबाजी के क्रम से लेकर गेंदबाजी में बदलाव तक, कप्तान का हर फैसला जांच के घेरे में रहा। पंजाबी शेरनी के कई फैसले मास्टरस्ट्रोक साबित हुए तो कुछ फैसलों ने आलोचनाओं को जन्म दिया। लेकिन एक बात लगातार कायम रही, हरमनप्रीत ने जिम्मेदारी से कभी मुंह नहीं मोड़ा।
कप्तान की हार, सिर्फ कप्तान की नहीं होती पूरी टीम की होती है। कप्तानी की सबसे कठिन परीक्षा तब होती है, जब फैसला अपनी पसंद से नहीं बल्कि टीम की जरूरत के हिसाब से लेना पड़े। कभी हालात ऐसे बनते है कि किसी अनुभवी खिलाड़ी को बाहर बैठाना पड़ता है, कभी किसी युवा खिलाड़ी पर अचानक भरोसा करना पड़ता है और कभी टीम के हित में अपनी भूमिका तक बदलनी पड़ती है।
इन फैसलों की कीमत अक्सर क्या जनाब, हर दफा कप्तान को ही चुकानी पड़ती है।
हरमनप्रीत ने भी ऐसे अनगिनत फैसलों का बोझ उठाया होगा, जिनका दर्द किसी स्कोरकार्ड में दर्ज नहीं होता। स्कोरकार्ड जीत और हार बता सकता है, लेकिन वह ड्रेसिंग रूम का तनाव, खिलाड़ियों की उम्मीदें, कप्तान की बेचौनी और करोड़ों प्रशंसकों का दबाव नहीं बता सकता।
‘पंजाबी कुड़ी’ हरमनप्रीत को आलोचना भी मिली और सम्मान भी। कुछ हार ऐसी रहीं, जिन्होंने पूरे देश को निराश किया। लेकिन कुछ मुकाबलों में यही टीम ऐसी लड़ती दिखाई दी कि हर भारतीय प्रशंसक का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। यकीनन, यही किसी कप्तान की असली विरासत होती है कि वह टीम को किस मुकाम तक लेकर गया।
हरमनप्रीत की कप्तानी में भारतीय महिला क्रिकेट ने दुनिया के बड़े मंचों पर केवल मौजूदगी दर्ज नहीं कराई, बल्कि जीत के दावेदार के रूप में अपनी पहचान मजबूत की।
यह बदलाव रातोंरात नहीं हुआ। इसके पीछे सालो की मेहनत, संघर्ष और उन खिलाड़ियों का खून पसीना था जिन्होंने रास्ता बनाया। उनमें हरमनप्रीत कौर का नाम बेहद महत्वपूर्ण है। आज ताज उतारा है, लेकिन कहानी खत्म नहीं हुई। कप्तानी छोड़ने का फैसला भावुक करने वाला जरूर है, लेकिन यह अंत नहीं है।
यह केवल भूमिका का बदलाव है। लंबे समय तक टीम की कप्तानी करने के बाद अब हरमनप्रीत के सामने एक अलग तरह की आजादी होगी। अब हर गेंद के साथ कप्तानी की रणनीति नहीं सोचनी होगी। अब प्लेइंग इलेवन, फील्ड सेटिंग और गेंदबाजी बदलाव का बोझ उनके कंधों पर नहीं होगा। अब सामने सिर्फ बल्ला होगा, गेंद होगी और विपक्षी टीम।
और शायद यही वह हरमनप्रीत है, जिसे क्रिकेट प्रेमी एक बार फिर पूरी आजादी के साथ देखना चाहेंगे।
एक पीढ़ी को दिया आत्मविश्वास, हरमनप्रीत कौर की सबसे बड़ी विरासत, शायद कोई एक रिकॉर्ड या कोई एक पारी नहीं है। उनकी सबसे बड़ी विरासत वह आत्मविश्वास है, जो उन्होंने भारतीय महिला क्रिकेट की एक पूरी पीढ़ी को दिया। उन्होंने यह भरोसा मजबूत किया कि भारतीय महिलाएं दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट मंच पर किसी से कम नहीं हैं। वे मुकाबला कर सकती हैं, दबाव झेल सकती हैं और बड़े मंच पर जीत का सपना देख सकती हैं। आज कप्तानी का अध्याय समाप्त हुआ है, लेकिन भारतीय महिला क्रिकेट की कहानी में हरमनप्रीत का अध्याय कभी समाप्त नहीं होगा।
अब कप्तान नहीं, सिर्फ हरमनप्रीत ने कप्तानी के सफर में जीत का जश्न भी देखा और हार का दर्द भी। तारीफें भी सुनीं और आलोचनाओं के तीर भी झेले। उम्मीदों का भार भी उठाया और टीम के लिए आगे खड़े होने का साहस भी दिखाया। इसलिए आज जब वह कप्तानी का ताज उतार रही हैं, तो इसे विदाई नहीं बल्कि एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखना चाहिए।
कप्तान चली गई है, क्रिकेटर नहीं। ताज उतर गया है, लेकिन तेवर बाकी हैं। जिम्मेदारी का बोझ कम हुआ है, लेकिन जुनून वही है। और मैदान पर लौटती हरमनप्रीत कौर शायद अब सिर्फ टीम की कप्तान नहीं होंगी, वह फिर वही बेखौफ बल्लेबाज होंगी, जिसने भारतीय महिला क्रिकेट को कई बार उम्मीद से हौसले और हौसले से इतिहास तक पहुंचाया है। हरमनप्रीत कौर का कप्तानी अध्याय भले बंद हो गया हो, लेकिन उनकी कहानी अभी बाकी है। और शायद अगला अध्याय सबसे खूबसूरत हो।





