






ग्राम सेतु डॉट कॉम
देश की राजधानी दिल्ली का सियासी तापमान इन दिनों अपने चरम पर है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल रखा है। संसद से लेकर सड़कों तक जोरदार घमासान जारी है। विपक्षी सांसदों और कार्यकर्ताओं का समूह रोजाना अपने धरने की जगह बदलकर पुलिस और प्रशासन को चौंका रहा है। कभी जंतर-मंतर, कभी आकाशवाणी केंद्र तो कभी राजघाट पर अचानक विरोध प्रदर्शन शुरू हो जाता है।
इस पूरे हाई-वोल्टेज सियासी ड्रामे के केंद्र में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा लगातार अग्रिम पंक्ति में डटी हुई हैं। लेकिन इस बार राष्ट्रीय फलक पर चल रहे इस बड़े आंदोलन में राजस्थान के हनुमानगढ़ की एक युवा बेटी की मौजूदगी ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। नाम है, निशा खीचड़।
दिल्ली की सड़कों पर चल रहे इस प्रदर्शन के दौरान निशा खीचड़ लगातार प्रियंका गांधी के साथ कदम से कदम मिलाकर चलती नजर आईं। जैसे ही राजघाट के नजदीक विपक्ष का प्रदर्शन तेज हुआ और माहौल गरमाया, दिल्ली पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रियंका गांधी समेत कई वरिष्ठ नेताओं को हिरासत में ले लिया। खास बात यह रही कि हिरासत में लिए जाने के दौरान भी निशा खीचड़, प्रियंका गांधी के ठीक साथ मौजूद रहीं।
पुलिस वैन से लेकर थाने तक निशा की प्रियंका गांधी के साथ तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आते ही सियासी गलियारों में तेजी से वायरल हो गए। हालांकि, कुछ घंटों बाद पुलिस ने सभी को रिहा कर दिया, लेकिन इस घटनाक्रम ने राष्ट्रीय राजधानी के शक्ति-केंद्र में हनुमानगढ़ की इस बेटी के बढ़ते सियासी कद पर मुहर लगा दी है।
‘ग्राम सेतु डॉट कॉम’ को मोबाइल फोन पर निशा खीचड़ ने बताया कि पुलिस प्रियंका गांधी के साथ उन्हें बस में ले जाती और दूर जाकर छोड़ देतीं। तीसरे दिन वह पुलिस वैन की खिड़की से कूदकर बाहर आ गई थी। वह वीडियो काफी वायरल भी हुआ। निशा खीचड़ ने बताया कि आज यानी गुरुवार को राजघाट पर सभी कांग्रेसजन एकत्रित हुए। नारेबाजी हुई। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को आंदोलन और तेज हो सकता है।
निशा खीचड़ केवल एक सामान्य कार्यकर्ता के तौर पर इस आंदोलन में शामिल नहीं थीं, बल्कि वे संगठन में एक मजबूत युवा चेहरे के रूप में उभर चुकी हैं। हाल ही में संपन्न हुए युवा कांग्रेस के संगठनात्मक चुनावों में निशा राजस्थान यूथ कांग्रेस की प्रदेश उपाध्यक्ष निर्वाचित हुई हैं। इस पद पर आते ही उन्होंने राज्य के मुद्दों के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर के आंदोलनों में भी सक्रिय भागीदारी निभानी शुरू कर दी है।
वर्तमान में निशा दिल्ली में रहकर अपनी स्नातकोत्तर (पीजी) की पढ़ाई कर रही हैं। उच्च शिक्षा के साथ-साथ वे छात्र राजनीति और युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कार्यक्रमों में लगातार अपनी भागीदारी दर्ज करा रही हैं। पढ़ाई और संगठन के बीच बेहतरीन तालमेल बिठाते हुए निशा ने बहुत कम समय में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक अपनी सीधी पहुंच और पहचान बना ली है।
तीन पीढ़ियों से जनसेवा में जुटा परिवार
निशा खीचड़ के इस राजनीतिक उभार की जड़ें उनके परिवार की लंबी जनसेवा में छिपी हैं। उन्हें राजनीति की समझ और जनसेवा का जज्बा अपने ही घर से विरासत में मिला है। दादा चेतराम खीचड़ क्षेत्र के जाने-माने वरिष्ठ कांग्रेस नेता रहे हैं, जिनका हनुमानगढ़ के सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य में गहरा प्रभाव रहा। पिता अनिल खीचड़ हनुमानगढ़ नगरपरिषद के पूर्व वाइस चेयरमैन रह चुके हैं और स्थानीय स्तर पर संगठन को मजबूत करने में सक्रिय रहे हैं। माता सुशीला खचड़ भी लगातार तीसरी बार नगरपरिषद में पार्षद चुनी गई हैं, जो क्षेत्र की जनता के बीच खीचड़ परिवार के प्रति भरोसे को दर्शाता है।
घर में बचपन से ही जनहित के मुद्दों, चुनाव प्रबंधन और जनआंदोलनों की चर्चा सुनते-सुनते निशा का झुकाव स्वाभाविक रूप से राजनीति की ओर हुआ। परिवार की तीसरी पीढ़ी के रूप में अब निशा ने स्थानीय राजनीति से आगे बढ़कर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमानी शुरू कर दी है।
राजस्थान से लेकर दिल्ली तक कार्यकर्ताओं में नया जोश
दिल्ली के इस आंदोलन में शीर्ष नेतृत्व के साथ अग्रिम पंक्ति में निशा खीचड़ की मौजूदगी ने राजस्थान, विशेषकर हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर क्षेत्र के युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह भर दिया है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि सुदूर क्षेत्र से निकलकर राष्ट्रीय स्तर के आंदोलन में प्रियंका गांधी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होना यह साबित करता है कि मेहनत और लगन से युवा राजनीति में अपनी जगह बनाई जा सकती है। दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष की लड़ाई आने वाले दिनों में क्या मोड़ लेगी यह देखना बाकी है, लेकिन इस सियासी हलचल ने हनुमानगढ़ की निशा खीचड़ को एक सशक्त और आक्रामक युवा नेत्री के तौर पर पहचान जरूर दिला दी है।





