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हनुमानगढ़ से निर्दलीय विधायक गणेशराज बंसल की राजनीतिक और कानूनी मुश्किलें लगातार गहराती जा रही हैं। स्थानीय पुलिस और सीआईडी-सीबी की गहन पड़ताल के बाद अब केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी विधायक से जुड़े मामलों की फाइलें खंगालने की तैयारी में है। जांच एजेंसियों के इस कड़े रुख से पूरे जिले के साथ-साथ प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल मच गई है।
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, विधायक गणेशराज बंसल और उनके परिवार से जुड़े करीब 58 मामले फिलहाल लंबित हैं। इनमें से कई प्रकरण ऐसे हैं जिनकी जांच पहले पूरी हो चुकी थी और उनमें अंतिम रिपोर्ट (एफआर) भी लगाई जा चुकी थी। हालांकि, प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि सरकार की ओर से विधायक से जुड़ी तमाम पुरानी फाइलों को दोबारा खंगालने के मौखिक निर्देश जारी किए गए हैं। इसके चलते बंद हो चुके पुराने मामलों की भी नए सिरे से समीक्षा शुरू करने की कवायद चल रही है।
जांच का सबसे अहम और बड़ा पहलू संपत्तियों से जुड़ा बताया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि पुलिस और जांच एजेंसियों के पास लगभग 57 संदिग्ध बेनामी संपत्तियों की एक विस्तृत सूची पहुंची है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, इन संपत्तियों की बाजार दर 700 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है। इतनी बड़ी मात्रा में बेनामी लेनदेन और अघोषित संपत्ति की आशंका के चलते अब इस मामले में ईडी की एंट्री तय मानी जा रही है। यदि ईडी इन संपत्तियों की वित्तीय जांच हाथ में लेती है, तो धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के तहत व्यापक स्तर पर कार्रवाई हो सकती है।
विधायक से जुड़े इस पूरे घटनाक्रम को हालिया नगर निकाय चुनाव के नतीजों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। हनुमानगढ़ नगरपरिषद के चुनाव में विधायक गणेशराज बंसल के गुट ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 60 वार्डों में से 34 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इसके बाद विधायक गुट ने नगरपरिषद में अपना निर्दलीय बोर्ड बनाने का खुला एलान किया था।
विधायक समर्थकों और उनके गुट का सीधा आरोप है कि यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है। उनका कहना है कि निकाय बोर्ड को लेकर सरकार के साथ ‘समझौता’ न होने के चलते उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। इसी खींचतान के परिणामस्वरूप करीब 23 साल पुराने एक मामले को दोबारा निकालकर मुकदमा दर्ज किया गया और बेहद जल्दबाजी में विधायक की गिरफ्तारी की गई।
पुराने मुकदमों की दोबारा जांच, बेनामी संपत्तियों की विस्तृत सूची और ईडी की संभावित जांच ने विधायक गणेशराज बंसल के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों की यह कार्रवाई राज्य की सियासत में और बड़ा मोड़ ले सकती है।






